Net Neutrality approved in India

भारत में नेट न्यूट्रैलिटी को मिली मंजूरी

टेलिकम्युनिकेशन विभाग (DoT) की सर्वोच्च बॉडी टेलिकॉम कमीशन ने नेट न्यूट्रैलिटी को लेकर TRAI की सिफारिशों को मंजूरी दे दी है. नेट न्यूट्रैलिटी के तहत हर किसी को ऑनलाइन बराबर एक्सेस मिलेगा और कोई भी भेदभाव नहीं किया जाएगा. सिर्फ कुछ क्षेत्रों को अपवाद के तौर पर नेट न्यूट्रैलिटी से बाहर रखा गया है. ये क्षेत्र हैं autonomous driving, tele-medicine या remote-diagnostic services. इनके लिए मौजूदा इंटरनेट स्पीड से तेज इंटरनेट की जरूरत पड़ सकती है इसलिए इन इमरजेंसी सेवाओं को इस सिस्टम से बाहर रखा गया है.

अलग-अलग सेवाओं के नहीं देने होंगे अलग से पैसे

इन क्षेत्रों के अलावा पहले की तरह टेलिकॉम ऑपरेटर्स अपने यूजर्स को क्लोज्ड कम्युनिकेशन नेटवर्क (इंट्रानेट) के जरिए सुविधाएं उपलब्ध कराना जारी रखेंगे. Net neutrality का सिद्धांत जो किसी भी वेबसाइट को टेलिकॉम ऑपरेटर्स द्वारा अलग से स्पीड मुहैया कराने का विरोध करता है, वह अभी भी लागू रहेगा और differential pricing regulation पर रोक पहले जैसी ही रहेगी. जिसका मतलब है कि जो भी कॉन्टेंट इंटरनेट पर उपलब्ध है उनपर कोई भी टेलिकॉम कंपनी अपने सब्सक्राइबर्स से किसी भी खास टाइ-अप के जरिए ज्यादा पैसे नहीं ले सकती और उन्हें अलग से तेज स्पीड मुहैया नहीं करा सकतीं.

सबको एक जैसी इंटरनेट स्पीड

जब सभी नियम तैयार हो जाएंगे तो ऑपरेटर्स विशेष सेवाओं के लिए तेज इंटरनेट मुहैया करा पाएंगे. लेकिन उन्हें इस दौरान ये बात भी ध्यान में रखनी होगी कि वे नॉर्मल सर्विसेज के लिए भी पर्याप्त बैंडविथ मुहैया कराते रहें. वैसे स्पेशल सर्विसेज के लिए नॉर्मल सर्विसेज की स्पीड बिल्कुल धीमी नहीं की जाएगी और इंटरनेट की स्पीड बरकरार रखी जाएगी. स्पेशल सर्विस वे हैं जिनकी जरूरत मानव हित में और इमरजेंसी में होगी. उदाहरण के तौर पर अगर इंटरनेट से बातचीत के जरिए ऑपरेशन किया जा रहा है तो बैंडविथ में किसी भी तरह की कोताही नहीं की जाएगी. वही चीज बिना ड्राइवर वाली कार के लिए लागू होगी.

इमरजेंसी सेवाओं को  नेट न्यूट्रैलिटी से रखा गया है बाहर
एक अन्य क्षेत्र है जिसे नेट न्यूट्रैलिटी से बाहर रखा गया है वह है कॉन्टेंट डिलिवरी नेटवर्क. यह टेलिकॉम कंपनियों और नेटवर्क ऑपरेटर्स जैसे फेसबुक और यूट्यूब के बीच टाई-अप जैसा है. Trai ने अपनी सिफारिशों में कहा था कि देश में इन नेटवर्क पर कॉटेंट खासा लोकप्रिय है, इसलिए ये नेटवर्क यूजर्स के लिए देश में टेलिकॉम ऑपरेटर्स के सहयोग से सर्वर सेट अप कर सकते हैं ताकि क्वालिटी को बेहतर और सेवाओं तेज बनाया जा सके. बहरहाल, टेलिकॉम ऑपरेटर्स और नेटवर्क ऑपरेटर्स के बीच इस एग्रीमेंट का पारदर्शी होना जरूरी है.

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