52 साल बाद पर्यटकों के लिए खुली नेलांग घाटी

समुद्र तल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित नेलांग घाटी सालभर बर्फ से ढकी रहती है. यहां की वादियों का आनंद लेने दूर-दूर से पर्यटक नेलांग घाटी पहुंच रहे हैं. यहां लद्दाख जैसी खूबसूरती के साथ ऊंची सड़कें हैं तो कई ऐतिहासिक महत्व वाले दर्शनीय स्थल भी मौजूद हैं. इस पूरे क्षेत्र में दूर-दूर तक कोई वनस्पति तक नहीं है.
नेलांग घाटी को एक तरह से पहाड़ का रेगिस्तान भी कहा जा सकता है. यहां तिब्बत के पठार समेत दशकों पहले बने दुर्गम पैदल पथ भी देखे जा सकते हैं. इस घाटी में गंगा समेत दो नदियां बहती हैं. गंगा आगे जाकर भैरव घाटी में भागीरथी में मिल जाती है.

भारत-चीन व्यापार के लिए था प्रसिद्ध

अपनी सुंदरता के लिए मशहूर नेलांग घाटी कभी भारत-चीन के बीच बहुत बड़ा व्यापारिक रास्ते के तौर पर भी जानी जाती थी. गंगोत्री हाइवे से करीब 20 किमी की दूरी पर स्थित इसी नेलांग घाटी से ही तिब्बत के साथ स्थानीय लोगों का व्यापार होता था. जिसका रास्ता गर्तांग गली से होकर गुजरता है.
सन् 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद घाटी को हमेशा के लिए पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था. लेकिन पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लगभग 52 साल बाद नेलांग घाटी को पर्यटकों के लिए फिर खोल दिया गया है. वर्तमान में यहां जाने के लिए जिला प्रशासन की अनुमति की जरुरत है लेकिन विदेशी पर्यटकों के लिए इलाका अब भी बंद रखा गया है.

नेलांग घाटी आने का सही समय
नवंबर और दिसंबर के महीने में नेलांग घाटी में आने की मनाही है. मार्च से जून और सितंबर-अक्टूबर का समय यहां आने के लिए उपयुक्त माना जाता है. इस क्षेत्र में गाड़ियों को भी एक सीमित मात्रा में आने की इजाजत मिलती है. उत्तरकाशी जिला प्रशासन के आंकडों की मानें तो इस साल 1 हजार 260 पर्यटक नेलांग घाटी का रूख कर चुके हैं, जिससे 1 लाख 90 हजार की आमदनी हो चुकी है.

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