44 जिलों से खत्म हुआ नक्सल आतंकः गृह मंत्रालय

देश में नक्सली गतिविधियों में जहां कमी आई है, वहीं नक्सलियों का इलाका भी घटा है. गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक नक्सल से प्रभावित देश के 126 जिलों में से सरकार ने 44 जिलों को नक्सलमुक्त क्षेत्र घोषित कर दिया. देश में अब महज 82 जिले बचे हैं जो नक्सल प्रभावित हैं. हालांकि गृह मंत्रालय की रिपोर्ट की मानें तो इसमें नए 8 जिले नक्सल प्रभावित इलाके में शामिल किया गया है. सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिलों की संख्या 35 से घटकर 30 पहुंच गई है.

मिली जानकारी के मुताबिक जिन 44 जिले नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की सूची से हटे हैं, उनमें आंध्र प्रदेश के 3 जिले (प्रकाशम, कर्नूल, अनंतपुर), छत्तीसगढ़ के 3 जिले (सरगुजा, कुरिया और जसपुर), झारखंड के 2 जिले (देवघर और पाकुड़) शामिल हैं. इन 44 जिलों में सबसे ज्यादा तेलंगाना से 19 जिलों को नक्सल प्रभावित जिलों की सूची से हटाया गया है.

4 सालों में आई कमी

गृह मंत्रालय के मुताबिक नक्सली हिंसा के फैलाव बीते चार वर्ष में उल्लेखनीय ढंग से कमी आई है. इसका श्रेय सुरक्षा और विकास संबंधी उपायों की बहुमुखी रणनीति को जाता है. गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक 44 जिलों में नक्सली या तो हैं ही नहीं या फिर उनकी मौजूदगी न के बराबर है.

नक्सली हिंसा अब उन 30 जिलों तक सीमित रह गई है जो जिले कभी इससे बुरी तरह प्रभावित थे. गृह मंत्रालय के मुताबिक नक्सल विरोधी नीति की मुख्य विशेषता है हिंसा को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करना और विकास संबंधी गतिविधियों को बढ़ावा देना ताकि नई सड़कों, पुलों, टेलीफोन टावरों का लाभ गरीबों और प्रभावित इलाकों के लोगों तक पहुंच सके.

बढ़ती कनेक्टिविटी से आया सुधार

रिपोर्ट के मुताबिक नक्सल प्रभावित जिलों में पहले फेज में 2,329 कुल मोबाइल टावर लगाए जा चुके हैं जिससे वहां पर कनेक्टिविटी बढ़ी है. झारखंड में अब तक 816 मोबाइल टावर लगाए गए हैं, उसी तरह छत्तीसगढ़ में 519 मोबाइल टावर लगाए का चुके हैं. जबकि ओडिशा में 256 मोबाइल टावर लगाए गए हैं. दूसरे फेज में गृह मंत्रालय 4,000 से ज्यादा मोबाइल टावर नक्सल प्रभावित क्षेत्र में लगाएगा.

गृह मंत्रालय ने 10 राज्यों के 126 जिलों को नक्सल प्रभावित क्षेत्रों की श्रेणी में रखा है. ये प्रभावित जिले सुरक्षा संबंधी खर्च ( SRE) योजना के तहत आते हैं. इसका उद्देश्य सुरक्षा संबंधी खर्च जैसे ढुलाई, वाहनों को भाड़े पर लेना, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को वजीफा देना, सुरक्षा बलों के लिए आधारभूत ढांचे का निर्माण आदि के लिए भुगतान करना शामिल है.

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