मुस्लिम युवाओं ने की सुरक्षा नीति में शामिल करने की मांग

नई दिल्ली : मुस्लिम छात्रों और युवाओं के समूह मुस्लिम स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ऑफ इंडिया (एमएसओआई) ने सरकार से अपील की कि वह समुदाय को राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में शामिल करे. इसके साथ ही संगठन ने कुछ खास चरमपंथी विचारधाराओं के बारे में आगाह किया जिनका परिणाम आतंकवाद के रूप में निकला.

एमएसओआई द्वारा जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि राष्ट्रीय राजधानी में कल आयोजित एक दिवसीय सम्मेलन में मुस्लिम विद्वानों और युवाओं ने उन मुद्दों पर चर्चा की जिनका सामना समुदाय कर रहा है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सामाजिक सौहार्द बनाए रखने के प्रयास होने चाहिए. उन्होंने इस संबंध में सूफी आध्यात्मिक सिद्धांतों के क्रियान्वयन पर भी जोर दिया.

तंजीम उलेमा ए इस्लाम के अध्यक्ष मुफ्ती अशफाक हुसैन ने कहा कि ऐसी कुछ खास चरमपंथी विचारधाराओं से देश और विश्व के समक्ष गंभीर खतरा है जिनका परिणाम आतंकवाद के रूप में निकला. उन्होंने कहा, ‘‘यदि भारत सरकार समझना चाहती है तो हम उसकी मदद कर सकते हैं. नीति में भागीदारी मिलने पर देश के प्रति मुसलमानों का प्यार बढ़ेगा. सत्ता में भागीदारी की तुलना में नीति में भागीदारी पर विचार किया जाना चाहिए.’’

सम्मेलन के संयोजक और कंजुल ईमान के संपादक मौलाना जफरुद्दीन बरकती ने कहा कि भारत का मिजाज विविधता में एकता में निहित है. इसलिए देश के समक्ष सांप्रदायिक तत्वों की चुनौती को कमतर नहीं आंकना चाहिए. उन्होंने कहा, ‘‘प्रत्येक समुदाय को इसे देखना चाहिए जिसमें मुसलमानों में सूफी विचारधारा सर्वश्रेष्ठ है.’’ संगठन के पूर्व अध्यक्ष एवं मुख्य वक्ता सैयद मोहम्मद कादरी ने कहा कि भारत एक विविधता वाला देश है और युवा इसकी एकता को कायम रखने में सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं.

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