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मोदी जी इन चुनौतियों से आजादी कैसे मिलेगी ?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को लाल किले के प्राचीर से न्यू इंडिया का नारा एक बार फिर दिया और कहा कि 2022 तक देश को बदलना हमारा सपना है और इसे 125 करोड़ देशवासी मिलकर पूरा करेंगे. प्रधानमंत्री ने गरीबी खत्म करने और आतंकवाद के खात्मे का नारा दिया. लेकिन आजादी के 70 साल बाद देश आज भी उन्हीं बुनियादी चुनौतियों का सामना कर रहा है जो दशकों पहले थी. देश को आज भी इन बुनियादी चुनौतियों से छुटकारे का इंतजार है.

बाढ़, सूखा, किसानों की आत्महत्या

न्यू इंडिया की ओर बढ़ने का दावा करते भारत की एक तल्ख सच्चाई ये है कि हर साल देश के अधिकांश राज्यों में बाढ़ के हालात उत्पन्न होते हैं. सैकड़ों लोग मारे जाते हैं और लाखों-करोड़ों की खेती और घर-बार डूबकर स्वाहा हो जाते हैं. अभी भी गुजरात, राजस्थान, बिहार, असम समेत कई राज्यों में बाढ़ के हालात हैं. सिर्फ बिहार में बाढ़ से 45 लोगों की मौत हो चुकी है. 65 लाख लोग पानी में घिरे हुए हैं. ये हालात हर साल हर राज्य में आता है लेकिन इससे बचाव की योजनाएं कही भी प्रभावी नहीं दिखतीं. जल संसाधनों के प्रबंधन की कोई ठोस योजना नहीं दिखती. ऐसे में सवाल ये है कि जिस देश में हर साल लाखों लोगों की कमाई बाढ़ में बह जाता है वह न्यू इंडिया का निर्माण कैसे करेगा.

सिर्फ बाढ़ ही नहीं हर साल जाड़े के मौसम में घना कोहरा रेल से लेकर सड़क यातायात के लिए भी चुनौती बनता रहता है. ट्रैफिक जाम, लू समेत तमाम प्राकृतिक आपदाओं में जानमाल का भारी नुकसान हर साल की बात है लेकिन इससे निपटने का कोई ठोस इंतजाम नहीं दिखता. रेल तंत्र की सुविधाओं की ही बात करें तो मोदी सरकार भी बड़े वादे कर सत्ता में आई थी लेकिन कितना सुधार जमीन पर दिखता है ये जगजाहिर है. देश के कई राज्यों में सूखा पड़ता रहा है, किसानों की आत्यहत्याएं जारी हैं. कर्ज माफी के अलावा खेती-किसानी के हित में कोई ठोस कदम उठता या प्रभावी होता नहीं दिखता.

स्वास्थ्य क्षेत्र की बुनियादी चुनौतियां

देश की आजादी के 70 साल पूरे होने के बाद भी स्वास्थ्य क्षेत्र की बुनियादी समस्याएं जारी हैं. स्वास्थ्य, खान-पान, पोषण, साफ-सफाई समेत तमाम ऐसी चुनौतियां हैं जो देश के अल्पविकसित समाज बनाए हुए हैं. इसी हफ्ते देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के गोरखपुर के अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई बाधित होने से 24 घंटे में 30 बच्चों की मौत हो गई. पिछले 40 साल में गोरखपुर के आसपास के इलाकों में इनसेफेलाइटिस से ही 10 हजार बच्चों की जान चली गई. खुद सीएम योगी कहते हैं कि इसका कारण गंदगी है तो क्या प्रभावित गांवों में सफाई के लिए कोई अभियान चलाया गया. स्कूलों में जाने वाले बच्चों को सरकार की ओर से दिया जाने वाला मिड डे मील तक पोषण के मानकों पर खरा नहीं उतरते और कई हादसे इसका गवाह हैं.

आतंकवाद, नक्सलवाद

देश के सामने आतंकवाद की चुनौती करीब तीन दशक से है. खासकर कश्मीर में पाकिस्तान की मदद से पलने वाले आतंकवाद को लेकर देश लगातार शिकार होता है लेकिन इसको अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने के अलावे कोई ठोस कदम नहीं दिखते. कश्मीर में सुरक्षाबल आतंकवादियों के खिलाफ ऑपरेशन चलाते हैं और लगातार आतंकी मारे भी जा रहे हैं लेकिन आतंक की नई पौध फिर खड़ी हो जाती है. इसी तरह देश के 9 से अधिक राज्य नक्सली हिंसा से प्रभावित हैं. इन इलाकों में विकास की तमाम योजनाओं का ऐलान सरकारें करती रही हैं लेकिन चुनौती बदस्तूर जारी है.

भ्रष्टाचार

देश के सामने भ्रष्टाचार की चुनौती भी लंबे समय से बनी हुई है. 176 देशों की लिस्ट में भारत का स्थान 79वां है. देश की अदालतों में भ्रष्टाचार के मामलों पर फैसले लगातार आ रहे हैं. सीबीई, ईडी, सतर्कता विभाग समेत तमाम एजेंसियां करप्शन के मामलों की जाच कर रही हैं लेकिन हालात में कोई सुधार आते नहीं दिखता. पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछले साल नवंबर माह में नोटबंदी के फैसले का ऐलान किया था और कहा था कि इससे करप्शन के मामलों में कमी आएगी. उसके बाद मोदी सरकार ने डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के लिए कदमों का ऐलान किया और कहा कि डिजिटल लेन-देन से भ्रष्टाचार में कमी आएगी.

सामाजिक समानता

आजादी के 70 सालों में आधुनिकता के तमाम दावों के बावजूद भारतीय समाज आज भी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. गोरक्षा के नाम पर हिंसा के कई मामले लगातार हाल के दिनों में सामने आए हैं. बाल विवाह, छुआछुत, महिलाओं को प्रताड़ित करने के मामले समाज के लिए आज भी चुनौती बने हुए हैं. महिला सशक्तीकरण के लिए हर साल सरकारें बजट और योजनाओं का ऐलान करती हैं लेकिन महिलाओं के लिए देश के हर हिस्से से चुनौतियां सामने आती रही हैं.अगर मोदी सरकार को अगले 5 सालों में न्यू इंडिया के सपने को साकार करना है तो इन बड़ी और बुनियादी चुनौतियों के समाधान के लिए ठोस योजना और रणनीति बनानी होगी. उस दिशा में कदम उठाने होंगे और पूरी मशीनरी को इस काम में लगाना होगा तभी जाकर दुनिया एक नए भारत से परिचित हो पाएगी.

 

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