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MCD चुनाव: BJP की प्रतिष्ठा और AAP की परीक्षा

राष्ट्रीय राजधानी में आज दिल्ली नगर निगम के लिए मतदान किया जाएगा। पिछले एमसीडी चुनाव तक मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही रहता था, लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी (आप) के भी मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। इसके अलावा जेडी (यू) क्षेत्रीय दल और योगेन्द्र यादव के स्वराज अभियान ने भी एमसीडी चुनाव के लिए अपने उम्मीदवार खड़े किए हैं। एमसीडी चुनावों का असर दिल्ली की सीमाओं से बाहर तक होगा।

दिल्ली के नगर निगमों पर पिछले 10 वर्षों से बीजेपी का कब्जा है। 2012 में दिल्ली नगर निगम को तीन हिस्सों- ईस्ट दिल्ली म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन, नॉर्थ दिल्ली म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन और साउथ दिल्ली म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में बांट दिया गया था। इनमें से नॉर्थ और ईस्ट कॉर्पोरेशन में बीजेपी को बहुमत मिला था और ईस्ट में वह सबसे बड़ी पार्टी थी। कांग्रेस तीनों कॉर्पोरेशन में दूसरे स्थान पर रही थी।

दिल्ली नगर निगम चुनाव में कुल 272 सीटों के लिए 1 करोड़ 32 लाख 206 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। दिल्ली में कुल 13,022 बूथ बनाए गए हैं। उत्तरी दिल्ली नगर निगम में 1,004 उम्मीदवार हैं। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम में 985 और पूर्वी दिल्ली नगर निगम में 548 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होना है। एमसीडी चुनावों को देखते हुए मेट्रो सुबह 4 बजे से चलनी शुरू हो जाएगी। वोटिंग से लेकर 26 अप्रैल को काउटिंग होने तक, संपूर्ण सुरक्षा की जिम्मेदारी दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 56 हजार जवानों के हाथों में होगी। 26 अप्रैल को चुनाव नतीजे आएंगे।

बीजेपी की प्रतिष्ठा
हाल के समय में महाराष्ट्र और चंडीगढ़ में स्थानीय निकाय चुनावों और ओडिशा में पंचायत चुनाव में बीजेपी की स्थिति मजबूत हुई है। 2015 के विधानसभा चुनाव में आप के हाथों बड़ी हार का सामना करने वाली बीजेपी के लिए दिल्ली के एमसीडी चुनाव प्रतिष्ठा का सवाल हैं।

AAP की परीक्षा
दो वर्ष पहले दिल्ली विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से जीत दर्ज करने वाली आप के लिए पंजाब और गोवा के विधानसभा चुनावों में हार का सामना करने के बाद एमसीडी चुनाव अपना राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। पार्टी को हाल ही में राजौरी गार्डन विधानसभा सीट पर उप चुनाव में नाकामी हाथ लगी थी और उसका उम्मीदवार अपनी जमानत भी नहीं बचा सका था।

कांग्रेस की नजर पुराने वोट बैंक पर
कांग्रेस ने हाल ही में पंजाब में विधानसभा चुनाव जीतकर सरकार बनाई है और राजौरी गार्डन के उप चुनाव में अपना वोट शेयर बढ़ने से भी पार्टी उत्साहित है। कांग्रेस राजधानी में अपना पुराना आधार वापस पाने की कोशिश कर रही है। पार्टी को पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में आप और बीजेपी ने बड़ी शिकस्त दी थी। दिल्ली में आप की लोकप्रियता घटने को पार्टी अपने लिए फायदे की बात मान रही है। कांग्रेस को मुस्लिमों, दलितों और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले प्रवासियों के बीच अपना वोट शेयर बढ़ने की उम्मीद है। इन सभी वर्गों ने 2015 के विधानसभा चुनाव में आप का समर्थन किया था।

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