महाराष्ट्र में कांग्रेस महागठबंधन में ओवेसी ने लगाया पलीता

महाराष्ट्र में भी कांग्रेस के नेतृत्व में महागठबंधन का प्रयोग सफल होता नहीं दिख रहा है। अभी से यह दिखाई देने लगा है की 2019 के लोकसभा चुनावों में सभी भाजपा दलों के विरोध में एक साथ आकर चुनाव लड़ने की संभावनाएं धूमिल होती जा रही हैं। इसकी पहले औरंगाबाद में एआईएमआईएम के विधायक इम्तियाज़ जलील ने पिछले माह प्रकाश आंबेडकर के गुट से चुनावी समझौता घोषित करके कर दी थी। उस समय जमील की घोषणा को संदेह की नज़र से देखा जा रहा था ,परन्तु एआईएमआईएम अध्यक्ष असाउद्दीन ओवेसी और प्रकाश अम्बेडकर ने 2 अक्टूबर को औरंगाबाद में महारैली करके इस घोषणा को पुख्ता कर दिया। ओवेसी और प्रकाश अम्बेडकर दोनों ही कांग्रेस और भाजपा से सामान दूरी बनाने के हमेशा पक्षधर रहे हैं।

इस घटनाक्रम के बीच कांग्रेस ने भाजपा विरोधी विपक्ष को साथ न ला पाने की अपनी अक्षमता से बचने के लिए शनिवार को यह घोषणा की कि वह इस तरह के किसी गुट से चुनाव समझौता नहीं करेगी जिसमे एएमआईएम हो, इसके पहले इस बात के स्पष्ट संकेत दिए जा रहे थे कि कांग्रेस और एनसीपी के नेतृत्व वाला विपक्ष, प्रकाश अम्बेडकर की वंचित बहुजन अघाड़ी से चुनाव समझौता करेगा। हालाँकि इससे पहले ओवेसी हैदराबाद में कांग्रेस या भाजपा विहीन गुट बनाने के विषय में कह चुके थे। लिहाजा अब कांग्रेस की इस असहमति की कोई अहमियत नहीं रह जाती है।

अभी तक एएमआईएम पर जातिवादी राजनीति करने का आरोप लगा कर समझौते से बचने का बहाना करने वाली कांग्रेस की महाराष्ट्र कमेटी के सदस्य अब ओवेसी के 2 अक्टूबर की रैली में दिए भाषण का बहाना एएमआईएम के साथ गठबंधन न करने के लिए ले रहे हैं। हैदराबाद से सांसद ओवेसी ने रैली में दिए अपने आधे घंटे के भाषण में अधिकतर समय कांग्रेस के केंद्र और राज्य नेतृत्व पर निशाना साधा था और तो और ओवेसी ने भी कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए उसे ‘नेहरू गाँधी परिवार की पार्टी’ बताया था। विशेष यह कि कांग्रेस को यह नाम भाजपा द्वारा दिया गया है।

ओवेसी ने औरंगाबाद रैली में अपना हमेशा का ट्रैक अकारण नहीं बदला, यहाँ उनके सामने उनके हमेशा वाले मुसलमान श्रोता नहीं थे। यहाँ रैली में आधे से अधिक लोग अम्बेडकर समर्थक वंचित बहुजन अघाड़ी के ओबीसी, अनुसूचित जाति और जनजाति के लोग थे, उनमें भी औरतें काफी संख्या में थी। राजनीति किस तरह रंग बदलती है, यहाँ अच्छी तरह देखने को मिला। हालाँकि यहाँ भी ओवेसी ने अपना भाषण हमेशा की तरह ‘बिस्मिल्लाह अल रहमान अल रहीम’ से ही शुरू किया, जिसके बाद ‘नमस्कार’ आने के बाद ही ‘अस्सलामवालेकुम’ आया। हमेशा ऐ मुसलमानों कहने वाले ओवेसी यहाँ हम मुसलमान कहते सुने गए।

इस रैली में ओवेसी ने मुसलमानों को अम्बेडकर की हर कदम पर मदद करने वाला बताकर अपने दो स्वार्थ पूरे किये। कांग्रेस की रेपुटेशन को दलितों के बीच ख़राब करने के साथ ही प्रकाश अम्बेडकर के कांग्रेस के साथ समझौता करने की सम्भावनाओं को भी कम किया।

 

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