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आखिर मलबे में कैसे दबा गोमुख ग्लेशियर का हिस्सा ?

उत्तरकाशी : बीती 16 जुलाई को भारी बारिश के बाद आकाश गंगा में आए उफान ने भागीरथी (गंगा) के उद्गम स्थल गोमुख का स्वरूप ही बदल डाला था। इसकी तस्वीरें अब सामने आई हैं। 16 जुलाई के बाद पहली बार गढ़वाल हिमालय माउंटेनियरिंग एंड ट्रैकिंग एसोसिएशन का दल 26 अगस्त को गोमुख क्षेत्र में रास्तों की स्थिति देखने गया। दल में शामिल ट्रैकिंग संचालकों ने गोमुख की स्थिति देखी तो वे हैरान रह गए। आकाश गंगा के उफान के कारण गंगोत्री ग्लेशियर का काफी हिस्सा मलबे से दबा हुआ है और तपोवन व नंदनवन को जाने वाले रास्ते का 200 मीटर हिस्सा भी बेहद खतरनाक हो गया है। दल ने इसकी तस्वीरें भी शेयर की हैं।

गढ़वाल हिमालय माउंटेनियरिंग एंड ट्रैकिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र सिंह राणा बताते हैं कि 16 जुलाई के दौरान हुई बारिश के कारण गंगोत्री नेशनल पार्क प्रशासन ने गोमुख क्षेत्र में आवाजाही पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया था। अब नेशनल पार्क की अनुमति के बाद ट्रैकिंग से जुड़े लोग गोमुख ट्रैक का निरीक्षण करने के लिए गए।

बताया कि उफान के कारण गोमुख के स्वरूप में बहुत अधिक बदलाव गया है। जबकि, बीती 16 जुलाई से पूर्व गोमुख का स्वरूप कुछ और ही था। गंगोत्री ग्लेशियर के बायीं ओर शिवलिंग चोटी से आने वाली आकाश गंगा नदी में इतना उफान आया कि गोमुख के पास आधा किलोमीटर क्षेत्र में ग्लेशियर के ऊपर मलबा पसरा हुआ है। इसी कारण गोमुख में भागीरथी की धारा का बहाव करीब 150 मीटर दाहिनी ओर खिसक गया है। साथ ही आकाश गंगा की ओर भी गहरी खाई बनी हुई है।

जयेंद्र राणा बताते हैं कि कालिंदी पास, तपोवन, नंदनवन व वासुकीताल सहित गंगोत्री हिमालय क्षेत्र के लिए पर्यटक और पर्वतारोही गोमुख के निकट से होकर ही जाते हैं। लेकिन, आकाश गंगा के उफान के कारण अब यह रास्ता काफी खतरनाक हो गया है। भोजवासा से आगे कालिंदी पास, तपोवन, नंदनवन व वासुकीताल केवल वही पर्यटक जा सकते हैं, जिनके साथ प्रशिक्षित गाइड हो।

गोमुख पहुंची टीम में गढ़वाल हिमालय माउंटेनियरिंग एंड ट्रैकिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र सिंह राणा, दीपक राणा, कपिल पंवार, सौरभ राणा, विनोद सिंह, श्रवण थापा, नवीन आदि ट्रैकिंग संचालक शामिल थे। वहीं गंगोत्री ग्लेशियर पर अध्ययन कर रहे पंडित गोविंद बल्लभ पंत हिमालय पर्यावरण एवं विकास संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक कीर्ति कुमार बताते हैं कि आकाश गंगा में आए उफान के बाद हुए गंगोत्री ग्लेशियर के अध्ययन की रिपोर्ट नहीं मिली है। ग्लेशियर को कितना नुकसान पहुंचा, रिपोर्ट मिलने के बाद ही इस संबंध में कुछ कहा जा सकेगा।

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