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जायसवाल निको इंडस्ट्रीज की 101 करोड़ की संपत्ति जब्त

रायपुर.कोयला घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जायसवाल निको इंडस्ट्रीज के रायपुर और बिलासपुर में 101 करोड़ की संपत्ति मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जब्त कर लिया। ईडी जल्द ही धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के तहत समूह के एमडी अरविंद जायसवाल, संयुक्त एमडी रमेश जायसवाल और मनोज जायसवाल के खिलाफ चार्जशीट भी दायर करेगा। इनमें से मनोज जायसवाल पारिवारिक विभाजन के बाद अभी अभिजीत इंफ्रा लिमिटेड के निदेशक हैं। यह मामला विशेष न्यायाधीश पटियाला हाउस नई दिल्ली में चल रहा है।

एक साल की जांच के बाद ईडी ने पिछले साल जून में 206 करोड़ की संपत्ति अटैच की थी: ईडी रायपुर के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक कंपनी के खिलाफ साल 2014 में केस दर्ज किया गया था। एक साल की जांच के बाद ईडी ने पिछले साल जून में 206 करोड़ की संपत्ति अटैच किया था। और अब 101 करोड़ की संपत्ति । कंपनी पर आरोप है कि रायगढ़ के गारेपेलमा सब ब्लाक, 4/4 को निको जायसवाल ने धोखाधड़ी आैर गलत तरीके से हासिल किया था। कंपनी ने अपने कैप्टिव पावर प्लांट में बिना किसी अनुमति के कोल खनन भी शुरू कर दिया था। इतना ही नहीं इस खदान के एलाटमेंट के बाद कंपनी ने अपने एक्सपांशन प्लान बता बड़ी मात्रा में शेयर जारी कर लगभग 1400 करोड़ रुपए की राशि भी जुटाई।

कोल ब्लॉक घोटाले में दो जगह की गई कार्रवाई:इसके मुताबिक कंपनी को रायगढ़ या रायपुर में कोल वाशरी लगाना था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। लेकिन अपने कैप्टिव उपयोग के लिए कोल खनन करते रही। कंपनी ने 2006 से 2015 के दौरान खदान से 3.8 मिलियन टन कोयला निकाला था। कंपनी अपने सालाना माइन प्लान से परे जाकर एक्सेसिव खनन किया। इसे लेकर छत्तीसगढ़ प्रदूषण बोर्ड ने भी कंपनी को नोटिस जारी किया था। ईडी ने इसे अपराधिक मानते हुए जायसवाल निको इंडस्ट्रीज के सिलतरा (रायपुर) स्थित आफिस सहित एकीकृत इस्पात संयत्र की 80 करोड़ आैर बिलासपुर स्थित संयंत्र में 21 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली है। जांच जारी है।

इधर… केशकाल में सड़क खुदाई के दौरान मिले 12वीं सदी के सोने के 52 सिक्के

कोंडागांव (छत्तीसगढ़). केशकाल ब्लाक के गांव कोरकोटी में सड़क बनाने के लिए की जा रही खुदाई के दौरान एक मटकी में सोने के 52 सिक्के मिले। इसमें मजदूरों ने इसकी जानकारी सबसे पहले सरपंच और अन्य ग्रामीणों को दी। गांववालों ने सिक्कों को कलेक्टर ीलकंठ टीकाम के पास जमा करा दिया। ग्रामीणों का कहा था कि इन सिक्कों का उनके लिए कोई मोल नहीं है। जो सड़क बनवाई जा रही है यहीं उनके लिए सबसे बड़ी दौलत है। इसका वे सालों से इंतजार कर रहे हैं। ये सभी सिक्के 12वीं या 13वीं शताब्दी के बताए जा रहे हैं।

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