सवर्ण आंदोलन में साधुओं की एंट्री से BJP में खलबली

उज्जैन के दशहरा मैदान में यह किसी मिनी कुंभ का नज़ारा तो नहीं था, लेकिन जो हुंकार यहां से भरी गई वो भाजपा की नींद उड़ाने वाली है. SC/ST एक्ट के खिलाफ सवर्णों के विरोध आंदोलन में अब साधु ब्रिगेड ने भी एंट्री ले ली है. लाइसेंसी बंदूक, तलवारें और हथियारों के साथ हुए इस उग्र प्रदर्शन ने बता दिया है कि सपाक्स, सरकारी कर्मचारी, सामान्य वर्ग से जुड़ा यह आंदोलन अब साधु –संतों के मठों तक जा पहुंचा है. ‘जब जब ब्राह्मण बोला है राज सिंहासन डोला है’ की चित्कार भरती हुई आवाजें आने वाले चुनाव में नई गरमी पैदा करने वाली हैं.

इस आंदोलन का दबाव इसी बात से मेहसूस हो सकता है कि इस आयोजन के एक दिन पहले ही बालाघाट में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने एक बड़ा बयान दिया कि – मध्य प्रदेश में एससी/एसटी एक्ट में बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं होगी. लेकिन इसका कोई असर इस ब्राह्मण कुंभ पर नहीं हुआ, बल्कि एससी/एसटी संगठन सरकार के खिलाफ मैदान में आ गए, भाजपा के ही सांसद उदित राज ने इसका विरोध कर डाला.

उज्जैन में संत कमल किशोर नागर, महामंडलेश्वर अतुलेश्वरानंद, महामंडलेश्वर शैलेषानंद सहित कई साधु-महंतों ने इसमें शिरकत की और दावा किया कि जब दीन-हीन होने के बावजूद सुदामा ने श्रीकृष्ण से कुछ नहीं मांगा तो हमें दिल्ली वालों से क्या मांगना?

इस पूरे घटनाक्रम ने भाजपा और संघ के खेमे में खलबली पैदा कर दी है. सवर्ण आंदोलन में साधुओं की एंट्री ने भाजपा संघ के लिए मुश्किल पैदा कर दी है. उसे साधुओं की नाराज़गी से अपना परंपरागत वोट बैंक खिसकता नज़र आ रहा है.

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि जो भी साधु- संत इस कुंभ में शामिल हुए हैं वे भाजपा समर्थक नहीं रहे हैं. उनका झुकाव कांग्रेस की ओर रहा है. यह राजनीतिक विरोध था. शिवराज सिंह ने एससी एसटी एक्ट को लेकर सरकार की भूमिका स्पष्ट कर दी है. बिना जांच के किसी की गिरफ्तारी नहीं होगी.

वहीं पार्टी के अंदर ही एक अन्य पक्ष का मानना है मामला पेचीदा हो गया है. साधु- संतों में भाजपा- कांग्रेस जैसा कोई भी मसला नहीं है. उनका मैदान में आना ही चुनावी मुश्किलों की नई शुरुआत है. ग्रामीण और शहरी इलाकों में जनमानस पर प्रभाव रखने वाले संतों के साथ बीजेपी ने खुलकर अपने मंच साझा किए हैं. अब उनकी नाराज़ी भाजपा को भारी पड़ सकती है.

साधुओं की मौजूदगी में हुए इस आयोजन में साधुओं ने समाज की एकता पर ज़ोर दिया. और पूरे आंदोलन को एससीएससी एक्ट से आगे आरक्षण तक ले आए. उन्होंने आर्थिक आरक्षण सहित कई मांगों के प्रस्ताव तक पारित कर दिए.

बताया जा रहा है कि इस आंदोलन के बाद भाजपा संघ और संघ अनुशांगिक संगठन विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल के बीच चर्चा जारी है. साधुओं का एक वर्ग तैयार किया जा रहा है जो सवर्ण आंदोलन के विरोध की गति को रोकने में भूमिका निभा सके.

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