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राजनीति में उलझे हिमाचल के हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट

केंद्रीय मंत्रियों नितिन गडकरी, जेपी नड्डा से लेकर पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल और पार्टी के राज्य प्रभारी मंगल पांडे आरोप लगा रहे हैं कि वीरभद्र सरकार रोड प्रोजेक्टस की डीपीआर तैयार कर नहीं भेज रही। वहीं, सीएम वीरभद्र सिंह सहित प्रदेश कांग्रेस के सभी नेता इस मामले में हो रही देरी पर केंद्र सरकार को कोस रहे हैं। हाल ही में हिमाचल के राजनीतिक गलियारों में ये चर्चा छिड़ी कि केंद्र सरकार ने 61 नए नेशनल हाइवे के लिए एक लाख करोड़ रुपये जारी किए हैं। जैसे ही ये चर्चा जोर पकड़ने लगी सीएम वीरभद्र सिंह के निर्देश पर तुरंत ही सरकारी प्रवक्ता ने इस पर स्थिति साफ की।

 सरकार ने कहा कि केंद्रीय सड़क एवं उच्च मार्ग मंत्रालय की तरफ से सीआरएफ (सेंट्रल रोड फंड) में अंतरराज्यीय संपर्क तथा नेशनल हाइवे वर्क के लिए फंड का भुगतान होता है। डीपीआर यानी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने में भी प्रदेश सरकार की ओर से कोई भी कोताही नहीं बरती गई है। यही नहीं, प्रदेश सरकार ने दावा किया कि नाबार्ड के तहत राज्य को मिली धनराशि और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की डीपीआर के आधार पर मंजूर 2500 करोड़ रुपये से 800 करोड़ से अधिक की सड़क परियोजनाओं की डीपीआर तैयार कर ली गई है।

हिमाचल सरकार ने बताई हकीकत
सरकारी प्रवक्ता ने कहा कि केंद्रीय सड़क एवं उच्च मार्ग मंत्रालय ने वर्ष 2017-18 की सालाना योजना के लिए सिर्फ 270 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसके अलावा कंसल्टेंट नियुक्त करने के साथ ही भूमि अधिग्रहण और पुलों के काम के लिए 469 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि पिछले साल 14 सितंबर को केंद्रीय मंत्रालय ने 61 नेशनल हाइवे मंजूर किए थे। साथ ही साथ अन्य सड़कों को भी इसमें शामिल किया गया। इनमें से तीन का निर्माण किया जा रहा है। कुल्लू जिला की मणिकर्ण-पुल्गा सड़क, शिमला जिला की ओल्ड हिंदुस्तान-तिब्बत सड़क का हिस्सा और सोलन जिला के बद्दी-कसौली-धर्मपुर सड़क की रिपोर्ट तैयार की जा चुकी है।

सरकारी प्रवक्ता ने साफ कहा कि हिमाचल सरकार को केंद्र से प्रत्यक्ष तौर पर धनराशि नहीं मिलती है। इसे केंद्र सरकार सीधे परामर्शदाताओं व ठेकेदारों को देती है। लोक निर्माण विभाग ने 61 नई सड़कों को लेकर कंसल्टेंट नियुक्त करने के लिए टेंडर बुलाए और केंद्र सरकार के साथ नियमों में छूट देने का मामला उठाया गया। प्रदेश सरकार ने 36 रोड्स की तकनीकी व वित्तीय निविदाएं खोली हैं, जिन्हें मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।

सीएम वीरभद्र ने भी रखा पक्ष
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का कहना है कि उन्होंने केंद्र सरकार से इन नेशनल हाइवे की डीपीआर तैयार करने के लिए प्रदेश के लोक निर्माण विभाग और एचपीआरआईडीसी को ऑथराइज्ड करने का मामला उठाया था। ये वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट्स की कार्यान्वयन एजेंसी है। वीरभद्र सिंह का कहना है कि उनकी सरकार पर रोड प्रोजेक्ट्स में देरी का आरोप लगाना सही नहीं है। सीएम के अनुसार सच्चाई ये है कि जिन 10 रोड प्रोजेक्ट्स के लिए मार्च में मंजूरी मांगी गई थी, उनमें से अभी तक कुल दो प्रोजेक्ट्स के लिए ही केंद्र ने मंजूरी दी है।

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