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पंचायत राज कानून से प्रधानों के लिये खतरे की घंटी

उत्तराखंड के नये पंचायती राज एक्ट ने ग्राम प्रधानों के लिये खतरे की घंटी बजा दी है। आम जनता के कामों को प्राथमिकता देने के बजाय केवल ग्राम पंचायत सदस्यों को साध रहे ग्राम प्रधानों को जनता की नाराजगी भारी पड़ने वाली है। अब ग्राम प्रधान को हटाने के लिये ना तो सदस्यों की जरूरत है और ना ही दो तिहाई बहुमत की। आधे से एक वोट अधिक पड़ने पर ही प्रधान की कुर्सी चली जाएगी। इसके चलते प्रधानों में हड़कंप मचा हुआ है।

उत्तराखंड पंचायती राज एक्ट में ब्लाक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष को हटाने का प्रावधान तो उत्तर पंचायत पंचायत राज एक्ट के अनुसार ही दो तिहाई सदस्यों का है लेकिन ग्राम पंचायत में ग्राम प्रधान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया का सरलीकरण कर दिया है। यह सरलीकरण अब कई ग्राम प्रधानों के गले की फांस बनने जा रहा है। दरअसल पुराने एक्ट में ग्राम पंचायत सदस्यों का विशेष महत्व था। इतना ही नहीं प्रधान को हटाने के लिये कुल मतदाताओं का दो तिहाई बहुमत जरूरी है लेकिन अब ऐसा नहीं है। गांव के पांच लोग ही जाकर एक चौथाई लोगों का हस्ताक्षर युक्त प्रार्थना पत्र यदि जिला पंचायत राज अधिकारी को दे देते हैं और आधे से अधिक मतदाता प्रधान के खिलाफ वोट देते हैं तो प्रधान की कुर्सी चली जाएगी। जिला पंचायत राज अधिकारी आरसी त्रिपाठी ने बताया कि नये एक्ट के बारे में जानकारी करने के लिये हर रोज ग्रामीण उनके दफ्तर आ रहे हैं। कुछ और भी संशोधन हुये है।

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