कैसे चल रही है माओवादियों की आर्थिक दुनिया?

सवाल उठता है कि माओवादियों को धन कौन दे रहा है या यों कहें कि माओवादियों की आर्थिक दुनिया किस तरह चल रही है? नक्सल प्रभावित इलाकों में अभियान पर उतरी सुरक्षा एजेंसियों और सरकार दोनों को यह सवाल एक लंबे अरसे से परेशान करता रहा है. साल 2016 के 8 नवंबर को नोटबंदी का एलान हुआ तो उम्मीद बांधी गई कि इससे माओवादियों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ टूट जाएगी लेकिन दरअसल ऐसा हुआ नहीं.

समस्या से सीधे-सीधे निबटने और नक्सलियों के वित्तीय संसाधनों की राह रोकने के लिए सरकार ने एक बहुमुखी एक्शन ग्रुप बनाया है. इसमें अल-अलग केंद्रीय एजेंसियों तथा नक्सल समस्या से प्रभावित राज्यों के पुलिस महकमे के अधिकारियों को रखा गया है. इस ग्रुप की अगुवाई गृहमंत्रालय के अतिरिक्त सचिव (एडिशनल सेक्रेटरी) के हाथ में है. ग्रुप में खुफिया ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय(ईडी), डायरेक्टरोट ऑफ रेवेन्यू इंटेलीजेंस, राष्ट्रीय जांच एजेंसी(एनआईए), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के नुमाइन्दे रखे गए हैं. इसके अतिरिक्त सीआईडी और राज्यों के खुफिया विभाग के भी सदस्य ग्रुप में शामिल हैं.

छत्तीसगढ़ पुलिस के एंटी नक्सल ऑपरेशन के चीफ डीएम अवस्थी ने फ़र्स्टपोस्ट को बताया कि ‘स्पेशल इंटेलीजेंस ब्रांच सूबे में माओवादियों की गतिविधियों और उन्हें हासिल वित्तीय संसाधनों की बड़ी बारीकी से निगरानी कर रहा है साथ ही ब्रांच का संपर्क केंद्र से बना हुआ है. हमने संदेह के घेरे में आए नक्सलियों के बैंक खाते जब्त किए हैं. झारखंड में तो ऐसे मामले में भी नजर आए हैं जब माओवादी नेताओं ने अपने निजी इस्तेमाल के लिए रकम उड़ा ली. ऐसे नक्सलियों के परिवार बड़े शहरों में मजे की जिन्दगी जी रहे हैं और उनके बच्चे भारत या भारत के बाहर मशहूर कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे हैं.’

डीएम अवस्थी ने सीपीआई (माओवादी) के झारखंड-बिहार स्पेशल एरिया कमिटी के कुछ माओवादी नेताओं जैसे प्रद्युम्न शर्मा, संदीप यादव और अरविंद यादव के नाम गिनए. प्रद्युम्न शर्मा ने प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में अपनी भतीजी का एडमिशन कराने के लिए 22 लाख रुपए के डोनेशन का भुगतान किया है जबकि अरविंद यादव ने अपने भाई का दाखिला प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज में कराने के लिए 12 लाख रुपए चुकाए हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इन लोगों के खिलाफ प्रिवेन्शन ऑफ मनी लॉडरिंग एक्ट तहत मामला दर्ज किया है, इनकी 1.5 करोड़ रुपए की संपदा और 32 एकड़ जमीन का पता चला है, 2.45 करोड़ रुपए नकद जब्त हुए हैं जिसमें नोटबंदी के दौरान जब्त हुए 1 करोड़ रुपए शामिल हैं.

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