केदार घाटी में हेलीकॉप्‍टरों के शोर से वन्य जीव जोखिम में

देहरादून : रुद्रप्रयाग जिले में समुद्रतल से दस हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर घने जंगलों में रहने वाले दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीवों के जीवन पर मानवीय ज्यादतियां भारी पड़ रही हैं। तमाम नियमों के दरकिनार कर केदारनाथ वन्य जीव प्रभाव में हेलीकॉप्टरों का शोर उनके जीवन को लील रहा है। इसे देखते हुए वन विभाग ने हेली सेवाओं का संचालन करने वाली कंपनियों के लिए मानक भी निर्धारित किए थे, लेकिन इन पर अमल नहीं हो पा रहा। हैरत देखिए कि मानकों के विरुद्ध उड़ान भर रही हेली कंपनियों पर सरकार ने भी अब तक कोई एक्शन नहीं लिया है।

उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाए जाने वाले दुर्लभ प्रजाति के वन्य जीवों का ग्राफ लगातार सिमट रहा है। वन्य जीव संरक्षण को ठोस पहल न होने और मौसम के साथ ही पारिस्थितिकीय तंत्र में आ रहे बदलाव उनके जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहे हैं। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग की ही बात करें तो यहां से हेलीकॉप्टर बड़ी संख्या में केदारनाथ के लिए उड़ान भरते हैं। जिससे इस हिमालयी क्षेत्र में भारी ध्वनि प्रदूषण होता है। हेलीकॉप्टरों की निगरानी को वन विभाग की ओर से बनाए गए मॉनीटरिंग सेंटर की रिपोर्ट बताती है कि जो मानक विभाग ने निर्धारित किए थे, उन पर हेली कंपनियां खरी नहीं उतर रही। रोजाना मानकों से कहीं अधिक उड़ान भरी जा रही हैं। इतना ही नहीं, तय ऊंचाई 600 मीटर से काफी नीचे हेलीकॉप्टर उड़ान भर रहे हैं। जिसका सीधा असर दुर्लभ वन्य जीवों पर पड़ रहा है।

बता दें कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में वास करने वाले वन्य जीव सबसे ज्यादा प्रभावित ध्वनि प्रदूषण से ही होते हैं। तेज शोर होने पर वह घबरा जाते हैं, जिससे उनकी जीवनचर्या पूरी तरह गड़बड़ा जाती है। दूसरी ओर, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने भी इस संबंध में प्रदेश सरकार से रिपोर्ट तलब की है।

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