डॉ. गिरीबाला जुयाल संवार रही गरीब और बंचित बच्चो का जीवन

देहरादून : 62 वर्षीय डॉ. गिरीबाला जुयाल कौलागढ़ की मजदूर बस्ती के 70 बच्चों का जीवन शिक्षा के दीपों से जगमग कर रही हैं। डॉ. जुयाल बस्ती के बच्चों के लिए कक्षाएं चलाती हैं। यहां सिर्फ शिक्षा ही नहीं, बल्कि बच्चे में छिपी प्रतिभा को भी निखारा जाता है। साथ ही डांस, गायकी, योग समेत कई अन्य गतिविधियों की विशेष कक्षाएं भी आयोजित होती हैं। इसी का नतीजा है कि आज ओएनजीसी जैसे बड़े संस्थानों के कार्यक्रमों में प्रस्तुति के लिए यहां के बच्चों को विशेष आमंत्रण दिया जाता है।

वर्ष 2004 में डॉ. गिरीबाला जुयाल ने मनोहर भाव संस्था की स्थापना की थी। यह संस्था देहरादून के कौलागढ़ क्षेत्र की मजदूर बस्ती में रहने वाले निर्धन और जरूरतमंद बच्चों को 13 वर्षों से शिक्षा दे रही है। वर्तमान में संस्था की ओर से कौलागढ़ स्थित पंचायती भवन में शाम चार से छह बजे तक कक्षाओं का संचालन होता है। जिसमें नर्सरी से 10वीं कक्षा तक के करीब 70 से अधिक बच्चों को पढ़ाया जाता है।

इन बच्चों को शिक्षा के साथ ही डांस, गायकी, कला, योग, कराटे के गुर भी सिखाए जाते हैं। यहां तक कि डांस, योग आदि के लिए विशेष शिक्षिका रखी गई हैं। डॉ. जुयाल चाहती हैं कि ये बच्चे किसी भी क्षेत्र में कमतर न रहें, इसके लिए वे इन बच्चों को खेल समेत अन्य गतिविधियों में भी प्रशिक्षित करती हैं। डॉ. जुयाल के साथ इस नेक काम में कुछ अन्य सदस्य भी हाथ बंटाती हैं।

37 वर्षों से जला रहीं शिक्षा की अलख 

मनोहर भाव संस्था की संस्थापक डॉ. गिरीबाला जुयाल इससे पूर्व वर्ष 1980-85 में टिहरी जिले के फकोट गांव में निर्धन एवं जरूरतमंद बच्चों के लिए क्षेत्र का पहला अंग्रेजी माध्यम स्कूल खोल चुकी हैं। स्कूल खोलने में केंद्रीय भूमि संरक्षण संस्थान में वैज्ञानिक के पद पर कार्यरत डॉ. गिरीबाला के पति डॉ. गोपाल जुयाल ने भी अपने संस्थान से सहयोग दिलाया था।

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