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हाईकोर्ट के टाइपिंग मिस्टेक से छूटा अपराधी

नई दिल्ली. डबल मर्डर का एक दोषी हाईकोर्ट के ऑर्डर में टाइपिंग मिस्टेक की वजह से रिहा हो गया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा है कि वह पहले सरेंडर करे तभी उसकी पिटीशन पर सुनवाई होगी। बता दें कि टाइपिंग में हुई गलती का पता चलने पर हाईकोर्ट ने उसे दोबारा अरेस्ट करने का ऑर्डर दिया था। इसके खिलाफ उसने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन लगाई थी।
– जस्टिस एके सीकरी और अशोक भूषण ने दोषी को किसी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया।
– दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट रहे दोषी जितेंद्र को ट्रायल कोर्ट ने मर्डर के केस में 30 साल जेल की सजा सुनाई थी।
– सुप्रीम कोर्ट ने फरार चल रहे जितेंद्र के वकील से साफ कहा कि पहले उनके क्लाइंट को सरेंडर करना होगा। इसके बाद वह जमानत के लिए एप्लीकेशन दे तभी उसकी पिटीशन पर सुनवाई होगी।
– विक्टिम्स के रिलेटिव्स ने भी सुप्रीम कोर्ट में एक पिटीशन लगाई थी, जिसमें दोषी को दोबारा जेल भेजने की मांग की थी। कोर्ट ने इस पिटीशन पर दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है।
एक दिन में 2 हत्या
– जितेंद्र ने 10 मार्च 1999 को केशवपुरम इलाके में अनिल भड़ाना की गोली मारकर हत्या कर दी थी। अनिल एक केस में जितेंद्र के खिलाफ गवाह थे।
– पुलिस को इस घटना की जानकारी अनिल के दोस्त सुमित नैयर ने दी थी। जितेंद्र उसी रात सुमित की हत्या के इरादे से उसके घर पहुंचा। वहां सुमित नहीं मिला तो उसने उसके पिता कीमती लाल की गोली मारकर हत्या कर दी।
– 23 जनवरी 2000 को जितेंद्र को गिरफ्तार कर लिया गया।
टाइपिंग में क्या हुई गड़बड़ी?
– जितेंद्र को 2003 में सेशन कोर्ट ने सजा सुनाई थी। जज ने ऑर्डर में लिखा था कि उसकी रिहाई पर 30 साल से पहले विचार नहीं किया जाएगा।
– बाद में उसके वकीलों ने हाईकोर्ट में चैलेंज किया कि उसे दी गई सजा बहुत ज्यादा है।
– इस पर हाईकोर्ट की डबल बेंच के जज जस्टिस जीएस सिस्तानी और जस्टिस संगीता धींगरा सहगल ने पिछले साल 24 दिसंबर को ऑर्डर दिया।
– इसमें लिखा, “हमारा मानना है कि इंसाफ के लिए 30 साल की शर्त हटाना जरूरी है। ऐसे में हम सजा के पीरियड पर ऑर्डर में बदलाव करते हुए उसे अपील करने वाले के जेल में बिताए वक्त 16 साल 10 महीने करते हैं।”
– “अपील करने वाले को गुनहगार ठहराने के ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए सजा में बदलाव किया जा रहा है। अगर अपील करने किसी और केस में जरूरत न हो तो उसे रिहा कर दिया जाए।”
– इस ऑर्डर के बाद जितेंद्र को तिहाड़ जेल से रिहा कर दिया गया।
दूसरा ऑर्डर हुआ तो फरार हुआ दोषी
– बाद में हाईकोर्ट की उसी डबल बेंच ने इस साल 14 फरवरी को दूसरा ऑर्डर दिया। उसमें लिखा गया कि 24 दिसंबर के फैसले में टाइपिंग की गलती पाई गई है। ऐसे में उसमें से गैर-जरूरी सेंटेंस हटाया जा रहा है।
– ये सेंटेंस हैं- “अपील करने वाले के जेल में बिताया हुए वक्त, यानी 16 साल 10 महीने’ और ‘अगर किसी दूसरे केस में अपीलकर्ता की जरूरत न हो तो उसे रिहा कर दिया जाए।”
– हाईकोर्ट के नए ऑर्डर के तहत दिल्ली पुलिस जितेंद्र उर्फ कल्ला की तलाश में जुट गई हैं। पुलिस के मुताबिक, “हाईकोर्ट के दूसरे ऑर्डर के बाद जितेंद्र फरार हो गया है।”

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