गुजरात की दो लड़कियां बनीं ‘पैडगर्ल’

इसकी टेस्टिंग भी की जा रही है। जिसके लिए इसे एक अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में दे दिया गया है। वहां पर इस बात की जांच की जाएगी कि यह स्त्रियों के इस्तेमाल के लिए उचित है या नहीं।

इन दिनों अक्षय कुमार की फिल्म ‘पैडमैन’ की काफी चर्चा है। उनकी यह फिल्म सैनिटरी पैड बनाकर क्रांति लाने वाले अरुणाचलम मुरुगनाथम के जीवन पर आधारित है, जिन्होंने ग्रामीण महिलाओं के लिए सस्ते नैपकिन बनाने में अपनी पूरी जिंदगी लगा दी। इसी तरह गुजरात के मेहसाणा जिले में दो लड़कियों ने भी सस्ते और इको फ्रेंडली पैड के मॉडल पेश किए हैं। इन पैड्स की खास बात यह है कि इन्हें पूरी तरह से ऑर्गैनिक तरीके से तैयार किया गया है। यानी कि ये स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के काफी अनुकूल हैं। इन दोनों लड़कियों का नाम राजवी और धार्मि पटेल हैं।

मेहसाणा के आनंद निकेतन स्कूल की नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली दोनों लड़कियों ने स्कूल लेवल पर पहले इसे प्रदर्शित किया था। उसके बाद वड़ोदरा में सीबीएसई की जोन लेवल पर साइंस एग्जिबिशन में उसे दिखाया गया। वहां इस प्रॉजेक्ट और इनकी सोच की काफी तारीफ हुई। भास्कर की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस मॉडल को अब राष्ट्रीय स्तर की विज्ञान प्रदर्शनी में दिखाने के लिए दिल्ली ले जाया जाएगा। इसकी टेस्टिंग भी की जा रही है। जिसके लिए इसे एक अस्पताल के स्त्री रोग विभाग में दे दिया गया है। वहां पर इस बात की जांच की जाएगी कि यह स्त्रियों के इस्तेमाल के लिए उचित है या नहीं।

अभी सिर्फ 15 सैंपल अस्पताल को दिए गए हैं। धर्मि और राजवी को स्कूल की तरफ से पूरा सपोर्ट मिला। स्कूल के प्रबंधक बिपिन भाई पटेल और प्रिंसिपल डॉ. ट्रेशा पॉले ने बताया कि स्कूल के टीचर जॉनी अब्राहम और तपस्या ब्रह्मभट्ट के मार्गदर्शन में कक्षा 9 की स्टूडेंट्स धार्मि पटेल ओर राजवी पटेल ने यह सेनेटरी पेड तैयार किया है। उन्होंने इसके लिए काफी रिसर्च किया और वड़ोदरा की एक एजेंसी से संपर्क कर केले के खराब हो चुके तने से रेशे निकाला गया। उन रेशों से ये पैड तैयार किए गए।

राजवी के टीचर जॉनी अब्राहम ने बताया कि इस पेड को ट्रायल के लिए महेसाणाा के सिविल हॉस्पिटल में दे दिया गया है। स्कूल इन पैड्स को बड़े पैमाने पर प्रॉडक्शन करने पर विचार कर रहा है। केले के पेड़ का बेकार तना इसके लिए बहुत ही उपयोगी है। तने से रेशे निकालकर उससे पैड बनाया जाता है। इस वजह से यह पर्यावरण के लिए काफी अच्छा है और महिलाओं के लिए अनुकूल भी है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी कीमत भी ज्यादा नहीं है। गरीब महिलाएं भी आराम से इसे खरीद सकेंगी। क्योंकि इसकी कीमत 5 रुपये आंकी गई है। इस्तेमाल के बाद यह पैड किसी भी तरह से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता और उसी में मिल जाता है।

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