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यूपी आवास विकास का बाबू कैसे बना करोड़पति ?

उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के घोटालेबाज लेखाकार जहीर अहमद सिद्दीकी को आखिरकार निलंबित कर दिया गया है. जहीर सिद्दीकी ने उपनी पत्नी और भाई की कम्पनी को करोड़ों रुपए का कामर्शियल प्लाट बेच दिया था. आवास आयुक्त की जांच में ये खुलासा हुआ, जिसके बाद आवास आयुक्त धीरज साहू ने जहीर अहमद सिद्दीकी को निलंबित कर विजिलेंस की सिफारिश की.

उत्तर प्रदेश के अहम विभाग आवास विकास परिषद के काले धन के कुबेर लेखाकार जहीर अहमद सिद्दीकी पर विभाग का चाबुक चला तो जनाब लापता हो गए हैं. दरअसल आवास आयुक्त धीरज साहू ने अपने विभाग में तैनात लेखकार की मिल रही शिकायतों की जांच कराई तो सबके होश उड़ गए. मालूम चला कि जनाब ने विभाग से करोड़ों के वारे-न्यारे किए है.

लखनऊ के वृन्दावन में कामर्शियल भूखण्ड के आवंटन में गड़बड़ी मिलने के बाद आवास आयुक्त धीरज साहू ने लेखाकार जहीर अहमद सिद्दीकी को सस्पेंड कर दिया. उसकी अवैध संपत्तियों की जांच के लिए आवास आयुक्त ने शासन को पत्र भी लिखा है. अधिकारियों ने जांच शुरू करायी तो कई चौंकाने वाले तत्थ सामने आए हैं.

लेखाकार ने वृन्दावन योजना में 2डी/काम-एक कामर्शियल भूखण्ड का आवंटन अपने भाई और बिल्डर के नाम कराया. जिस भूखण्ड को उसने पत्नी और भाई के नाम कराया, उसका एरिया करीब 12 हजार वर्गफुट है. भूखण्ड वृन्दावन योजना में काफी प्राइमलोकेशन पर है. इससे पहले भी 2006 से 2016 के बीच में भी उसने परिषद में कई भूखण्डों के आवंटन में खेल किया. जिसके आधार पर आवास आयुक्त ने को जहीर अहमद को सस्पेंड कर दिया.

विभाग ने इसके ख़िलाफ विजलेंस जांच का भी अनुरोध शासन से किया है. आवास विभाग ने लेखाकार, उसकी पत्नी और भाई की कम्पनी और अन्य तमाम फर्जीवाड़े की जांच के लिए शासन को पत्र लिखा है. आवास आयुक्त ने विजलेंस के साथ अन्य एजेन्सियों से भी इसकी जांच कराने की सरकार से सिफारिश की है ताकि लेखाकार की सच्चाई सामने आ सके.

लेखाकार जहीर अहमद को जैसे ही उसके खिलाफ जांच शुरू होने की जानकारी मिली वह आवास विकास परिषद से इस्तीफा देकर भागने की जुगत में लग गया. जहीर ने 6 जुलाई को ही उसने आवास विकास परिषद से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफे के साथ उसने एक महीने का वेतन भी आवास विकास को वापस कर दिया. ताकि इस्तीफा आसानी से स्वीकार हो जाए. लेकिन उसके खिलाफ जांच शुरू हो गई थी लिहाजा आवास आयुक्त ने उसका इस्तीफा नहीं स्वीकार किया. फ़िलहाल वो जहीर निलम्बित ही रहेंगे. उसके खिलाफ एक और विभागीय जांच शुरू कर दी गयी है.

पहले भ्रष्ट एआरटीओ पर शिकंजा फिर नकारा अफसरों को हटाने की तैयारी. इसी फेहरिस्त में जिस तरह से आवास विभाग ने कारवाई की है उसके बाद से विभाग में हड़कंप मचा है. फ़िलहाल ये देखना होगा ऐसी कारवाई जारी रहती है या फिर ये धन कुबेर सिस्टम पर भारी पड़ते है.

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