हड़ताल पर नियंत्रण को विचार कर रही सरकार: सीएम त्रिवेंद्र

उत्तराखंड में निवेश के लिए दुनियाभर में माहौल तैयार कर रही सरकार एक के बाद एक हो रही हड़ताल से चिंतित है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि ‘आज देश में प्रदेश की छवि हड़ताली प्रदेश के रूप में बनती जा रही है और इससे निवेश पर असर पड़ सकता है।’ उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को हड़ताली प्रदेश नहीं बनने दिया जाएगा। सरकार हड़तालों पर नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठाने पर भी विचार करेगी।

मुख्यमंत्री शुक्रवार को देहरादून में एक कार्यक्रम के दौरान पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी मांगों के लिए हड़ताल करना उचित नहीं है। कहा कि संगठनों को समझना होगा कि समस्याओं का निराकरण वार्ता की मेज पर होता है। कर्मचारियों की जायज मांगें पूरी करने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है।

इस दौरान उन्होंने राज्य की कमजोर आर्थिक स्थिति का भी हवाला दिया। कहा कि इस वजह से कई बार मजबूरन कई मांगें चाहकर भी पूरी नहीं हो पाती। इसमें थोड़ा समय लगता है। सरकार की स्थिति को भी समझें। उन्होंने कहा कि आज देश-विदेश के बड़े-बड़े पूंजीपति प्रदेश में निवेश की संभावनाएं देख रहे हैं।

ताइवान, कोरिया, सिंगापुर के उद्योगपतियों ने प्रदेश में निवेश का आश्वासन दिया है, लेकिन हड़ताल से निवेशकों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। नसीहत दी कि कर्मचारी-अधिकारी संगठन प्रदेश हित में अनावश्यक आंदोलन से बचें।

देश में सर्वाधिक हड़ताल उत्तराखंड में 

हड़ताल के मामले में उत्तराखंड देश में अव्वल है। ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2016 में प्रदेश में 21 हजार 966 आदोलन किए गए। इनमें भी सर्वाधिक आंदोलन कर्मचारी, राजनीतिक व छात्रों के रहे। आंदोलन के मामले में उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र जैसे विशाल राज्य उत्तराखंड से काफी पीछे हैं।

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