गोमती रिवर फ्रंट घोटले की जांच की आंच से मचा हड़कंप

गोमती रिवर फ्रंट घोटाले के आरोपी इंजीनियरों की संपत्तियों की प्रवर्तन निदेशाल (ईडी) द्वारा जांच शुरू किये जाने से सिंचाई विभाग में हड़कंप मंच गया है. ईडी को अशंका है कि गोमती रिवर फ्रंट निर्माण से जुडे इंजीनियरों ने करोडों की अवैध चल-अचल संपत्ति अर्जित की है. जिसके बाद अब इन आरोपी इंजीनियरों के खिलाफ मनीलांड्रिग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर, इनकी एक-एक सम्पत्तियों की जांच शुरू कर दी गई है.

गोमती रिवर फ्रंट घोटले की जांच की आंच अब आरोपी इंजीनियरों की जुटाई गई अकूत संपत्तियों पर आती दिख रही है. प्रवर्तन निदेशाल ने आरोपी इंजीनियरों की अचल संपत्तियों की जांच शुरू करते हुए तत्कालीन गोमती रिवर फ्रंट से जुडे अधीक्षण अभियन्ता शिवमंगल सिंह यादव और चीफ इंजीनियर गोलेश चन्द्र गर्ग और उनकी पत्नी मधुबाला गर्ग, पुत्र तनुज गर्ग के साथ पुत्र वधु स्वाति तनुज गर्ग के हाउस, फ्लैट, कामर्शियल लैंड और अन्य जमीनों का ब्योरा आईजी स्टाम्प से मांगा है. जिसके बाद आईजी स्टाम्प सीताराम यादव ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के एआईजी स्टाम्प से आरोपी इंजीनियर और उनके परिजनों की संपत्तियों का ब्योरा तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश जारी कर दिया है.

गौरतलब है कि योगी सरकार ने पूर्व सपा सरकार की महात्वाकांक्षी परियोजना गोमती रिवर फ्रंट में घोटाले का आरोप लगाते हुए जांच शुरू किया था. दरअसल, 1513 करोड़ की परियोजना में 1437 करोड़ रूपया खर्च होने के बावजूद भी काम 65 फीसदी ही पूरा किया गया. जबकि परियोजना की 95 फीसदी रकम निकाल ली गई थी. जिसमें सरकार ने मई 2017 में रिटायर्ड जज अलोक कुमार सिंह की अध्यक्षता में न्यायिक आयोग से जांच कराई. जांच रिर्पोट के आधार सरकार ने सीबीआई जांच की मांग की.

गोमती रिवर फ्रंट की कई जांचे चल रही हैं.

    • मई 2017अलोक कुमार सिंह न्यायिक जांच कमेट.
    • 19 जून 2017 को गौतमपल्ली थाना में 8 आपराधिक के खिलाफ अपराधिक केस दर्ज.
    • नवम्बर 2017: ईओडब्लू ने भी जांच शुरू किया.
    • दिसम्बर 2017: सीबीआई ने जांच को अपने हाथ में लेकर केस दर्ज किया
    • दिसम्बर 2017आईआईटी की टेक्निकल जांच.
    • 28 मार्च 2018 ko ईडी ने केस दर्ज कराया

गौरतलब है कि गोमती रिवर फ्रंट के निर्माण कार्य से जुडे इंजीनियरों पर दागी कम्पनियों को काम देने, विदेशों से मंहगा समान खरीदने, चैनालाइजेशन के कार्य में घोटाल करने, नेताओं और अधिकारियों के विेदेश दौरे में फिजूलखर्ची करने सहिते वित्तीय लेन देने में घोटाला करने, ड्राइंग के अनुरूप कार्य नहीं कराने का आरोप है. जिसमें 8 इजीनियरों के खिलाफ पुलिस, सीबीआई और ईडी मुकदमा दर्ज कर जांच कर रही हैं. इनमें तत्कालीन चीफ इंजीनियर गोलेश चन्द्र गर्ग, एसएन शर्मा, काजिम अली, शिवमंगल सिंह, कमलेश्वर सिंह, रूप सिंह यादव सुरेन्द्र यादव शामिल हैं. यह सभी सिंचाई विभाग के इंजीनियर हैं, जिन पर जांच चल रही है.

लेकिन ई़डी ने इंजीनियरों द्वारा काली कमाई से जुटाई गई संपत्तियों की जांच शुरू किये जाने से इंजीनियरों में हड़कंप मचा हुआ है. ईडी ने अधीक्षण अभियन्ता शिवमंगल सिंह यादव, इंजीनियर अखिल रमन और गोलेश चन्द्र गर्ग से पूछताछ कर रही है. इन इंजीनियरों ने अपनी संपत्तियों का ब्योरा देने में आना कानी करने पर ई़डी के असिस्टेन्ट डायरेक्टर सुनील कुमार ने आईजी स्टाप से शिवमंगल सिंह और गोलेश चन्द्र के अचल संप्तियों को सभी 75 जिलों का ब्यारों मांगा है.

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