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गढ़वाली बोली में प्रचार, सोशल मीडिया को कैसे बनाया हथियार

भारत में सौ से ज्यादा भाषाएं हैं, 15 सौ से ज्यादा बोलियां हैं और हर 20 कोस के बाद बोली बदल जाती है। वहीं कुछ ऐसी बोलियां हैं जो धीरे-धीरे दम तोड़ रही हैं। उत्तराखंड  के श्रीनगर इलाके में रहने वाली राखी धनाई  को अपनी गढ़वाली भाषा  से प्रेम था, लेकिन उन्होने अपने आसपास देखा कि लोग इसे बोलना पसंद नहीं करते। इसलिये उन्होने तय किया कि वो खुद ही गढ़वाली भाषा  को लोकप्रिय बनाने के लिये कुछ नया करेंगी। इसलिये उन्होने सोशल मीडिया का सहारा लिया और अपने एक साथी के साथ मिलकर ‘बीइंग उत्तराखंडी’  नाम से एक यू-ट्यूब चैनल (YouTube channel) शुरू किया। कुछ ही वक्त में उनका ये यू-ट्यूब चैनल युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हो गया है। इस यू-ट्यूब चैनल में वो छोटी छोटी घटनाओं को बड़े ही मजेदार तरीके से लोगों के सामने रखती हैं। इससे ना केवल वो आम लोगों तक अपना संदेश पहुंचाने में कामयाब होती हैं, बल्कि गढ़वाली भाषा  का प्रचार और प्रसार भी हो जाता है।

उत्तराखंड  के श्रीनगर की रहने वाली राखी धनाई  को बचपन से ही डांस का काफी शौक था। वो स्थानीय लोकगीतों पर डांस किया करती थीं। ये शौक उनका कब एक्टिंग में बदल गया उनको भी पता नहीं चला। अपनी संस्कृति और भाषा से प्यार करने वाली राखी ने उत्तराखंड  के मशहूर कलाकारों नरेंद्र सिंह नेगी , बसंती बिष्ट  जैसे कई कलाकारों के साथ काम किया है। इन कलाकारों के साथ मिलकर उन्होंने स्टेज पर कोरस, लोकनृत्य, लोकनाटक और कई पहाड़ी वीडियो एल्बम में भी काम किया। इस दौरान भावना का शौक तो पूरा हो रहा था लेकिन उनकी अपनी पहचान नहीं बन रही थी। इस बीच नौकरी की तलाश में उनका दिल्ली आना हुआ। जिसके बाद वो शौक को पीछे छोड़ नौकरी करने लगीं। राखी नौकरी तो कर रहीं थीं, लेकिन एक कलाकार होने के नाते उनको हमेशा अपनी संस्कृति और कला के लिए ज्यादा कुछ ना करने का अफसोस रहता था।

दिल्ली में नौकरी के दौरान उनको ‘डब मैस’ ऐप के बारे में पता चला। इस ऐप में कई भाषाओं के वीडियो थे। उसी ऐप में उन्होने अपना भी एक गढ़वाली वीडियो डाला। राखी ने  बताया कि

इस वीडियो में एक डायलॉग था कि क्या आप गढ़वाली हो तो औरत कहती हैं नहीं मैं देहरादून से हूं, हमें गढ़वाली नहीं आती। मेरा ये वीडियो खूब वायरल हुआ जिसके बाद मुझे एक नई पहचान मिली।

इस वीडियो के वायरल होने के बाद राखी को महसूस हुआ कि आजकल की युवा पीढ़ी अपनी मातृ भाषा के वीडियो पसंद करती है और वो कहीं ना कहीं इनसे अपने को जुड़ा हुआ मानते हैं। वहीं दूसरी ओर राखी देखती थी कि जब किसी से गढ़वाली भाषा में बात की जाए तो वो नहीं करता। राखी इसमें आज की युवा पीढ़ी की गलती नहीं देखती। वो मानती हैं कि लोग अब घर में भी गढ़वाली में बात करना पसंद नहीं करते और जब ऐसा माहौल घर में नहीं होगा तो कोई कैसे बोलेगा।

वो इसे गढ़वाली भाषा के लिए एक संकट के तौर पर देखती हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए राखी ने सोचा कि क्यों ना मनोरंजक तरीके से गढ़वाली भाषा का प्रसार किया जाये। इसके लिए उन्होने सोशल मीडिया का इस्तेमाल एक प्लेटफार्म के तौर पर करने का फैसला लिया। जिसका आज की युवा पीढ़ी खूब इस्तेमाल करती है। इसके लिये उन्होने उत्तराखंड के कोटद्वार में रहने वाले रजनीश अग्निहोत्री की मदद ली और उसके बाद ‘बीइंग उत्तराखंडी’ (Being Uttarakhandi) नाम से एक यू-ट्यूब चैनल शुरू किया।

‘बीइंग उत्तराखंडी’ चैनल वैसे तो करीब 10 साल पहले शुरू किया गया था। लेकिन इसे शुरू करने वाले रजनीश इस चैनल में काफी समय से एक्टिव नहीं थे। खुद रजनीश एक प्रोडक्शन हाउस चलाते हैं और इस समय मुंबई में रहते हैं। राखी काफी समय से रजनीश को जानती हैं। तब उन्होने रजनीश के साथ मिलकर इस चैनल को दोबारा से इस साल जुलाई से शुरू किया है। राखी इस चैनल में रजनीश अग्निहोत्री की को-पार्टनर हैं। इस चैनल को दोबारा शुरू करने का उद्देश्य उत्तराखंड की संस्कृति और भाषा को बचाना है। राखी के मुताबिक

हम ऐसे वीडियो तैयार करते हैं जिसमें गढ़वाली भाषा  के साथ कॉमेडी का टच हो। वीडियो में हम पहाड़ी रीति रिवाज और भाषा को आसान तरीके से बताते हैं। इस चैनल में हम मां-बेटे, दादी-पोती जैसे पारिवारिक रिश्तों को उठाते हैं। ये ऐसे मुद्दे हैं जो हर घर से जुड़े हैं। खास बात ये है कि इसमें दोनों तरह के किरदार मैं ही निभाती हूं।

काफी सारे स्टेज शोज करने के कारण राखी जानती हैं कि केवल भाषण देने से अपनी संस्कृति और भाषा का विकास नहीं हो सकता। अगर इसे बचाना है तो आज की युवा पीढ़ी के साथ उनके तरीकों से भी जुड़ना पड़ेगा। वहीं युवाओं को इस बात का भरोसा दिलाना होगा कि हमारी संस्कृति और भाषा कितनी अच्छी और समृद्ध है। देश के हर राज्य में पहाड़ी समाज का कोई ना कोई सदस्य बसा हुआ है। बावजूद कई लोग अपने को पहाड़ी कहलाना पसंद नहीं करते हैं। वहीं दूसरे राज्यों के लोग अपनी भाषा और संस्कृति पर गर्व करते हैं। राखी लोगों की इसी सोच को बदलना चाहती हैं।

वो चाहती हैं कि एक दिन उनके वीडियो देखकर लोग कहें कि अरे ये तो गढ़वाली है और वो भी गढ़वाली हैं। अपने सारे वीडियो वो घर पर ही बनाती हैं जिसे उनकी बहन मोबाइल से शूट करती है। उसके बाद इन वीडियों में एडिटिंग का काम रजनीश अग्निहोत्री करते हैं। इन तीन महीनों में राखी 10 वीडियो अपलोड कर चुकी हैं। उनके ये वीडियो डेढ़ से चार मिनट के होते हैं। राखी अपने वीडियो कुंमाऊनी भाषा  में भी लाना चाहती हैं। इसके लिए वो कुंमाऊनी भाषा  सीखने की कोशिश कर रहीं हैं।

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