सवालों के घेरे में मंत्री-विधायकों का विदेश दौरा

देहरादून। भारी बारिश से प्रदेश में मचे कोहराम के बीच मंत्रियों और विधायकों का विदेश दौरा काफी चर्चा में है। इन विदेश दौरों पर हो रही किरकिरी की वजह से अब सफाई पेश करने का दौर शुरू हो गया है। पहले सीएम त्रिवेंद्र ने कहा कि ये रुटीन वर्क से जुड़ा दौरा है। अब खुद विदेश दौरे पर गए विधायक सोशल मीडिया पर अपनी मीटिंग के दौरान की तस्वीर साझा करके इस बात का सबूत दे रहे हैं कि वो सैर-सपाटा में नहीं बल्कि प्रदेश के विकास से जुड़े कार्य में व्यस्त हैं।

दरअसल, पहले ऋषिकेश विधायक प्रेम चंद अग्रवाल का लेह-लद्दाख दौरा खबरों में बना रहा, क्योंकि उनकी विधानसभा के लोग गौहरीमाफी में डूब रहे थे। ये मामला थमा नहीं था कि इसके बाद सरकार का 11 सदस्यीय दल का विदेश दौरा चर्चाओं में आ गया। विधायकों की  सैर-सपाटे की तस्वीर ने लोगों के जख्मों में जैसे नमक का काम किया। जनता सरकार के मंत्रियों के सैर-सपाटे के जवाब मांगने लगी। मामला तूल पकड़ता गया और सीएम त्रिवेंद्र रावत को खुद सामने आकर बताना पड़ा की वो रुटीन वर्क के विदेश दौरे पर गए हैं।

इसके बाद हाल ही में विधायकों के इस दल ने तस्वीर साझा कर जानकारी दी है कि ये दौरा मेट्रो और रोपवे के निर्माण के लिए है। वो विदेश में सैर-सपाटा नहीं बल्कि मीटिंग में व्यस्त हैं।  हालांकि ये बात सबको पता थी कि माननीय मेट्रो से जुड़े कार्य के लिए विदेश दौरे पर हैं, लेकिन लोगों का सवाल ये था कि इस त्राहिमाम की स्थिति के दौरान क्या ये दौरा इतना जरूरी था? क्यों इसे मॉनसून सीजन खत्म होने तक के लिए टाला नहीं गया?  वैसे  जानकारी के मुताबिक इस दौरे में कुछ ऐसे विधायकों को भी विदेश भेजा गया हैं, जिनका ना तो मेट्रो से कोई लेना देना है और ना ही रोपवे से। इतना ही नहीं स्विटजरलैंड की यात्रा पर निकले विधायक अपनी पत्नियों को भी साथ ले गए हैं।
 

ये हैं विदेश दौरे पर
विधायक, मंत्री और अधिकारियों का 11 सदस्यी दल तीन देशों की यात्रा पर है। इस दौरे में शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक, केदारनाथ विधायक मनोज रावत, सल्ट विधायक सुरेंद्र सिंह जीना, हरिद्वार से रानीपुर विधायक आदेश चौहान, लोहाघाट विधायक पूरन सिंह फर्त्याल, बागेश्वर विधायक चंदन राम दास और 5 अधिकारी गए हैं।

यह दल पहले स्विट्जरलैंड और उसके बाद जर्मनी जाकर मेट्रो और रोप-वे की तकनीकों के बारे में जान रहा है, जिससे उस तरह के निर्माण राज्य में भी हो सके। लेकिन इससे पहले के विदेश दौरों पर गए मंत्रियों ने वहां जाकर क्या सीखा और उसका इंप्लीमेंट राज्य में कब, कहां और कितना हुआ यह किसी से छुपा नहीं है।
विकास के आधुनिक तरीके और मेट्रो का कार्य की जानकारी लेने के लिए विधायकों का दल विदेश यात्रा पर तो चला गया लेकिन प्रदेश में बाढ़ जैसे हालात के बीच विधायकों का ये दौरा कितना जायज है इसपर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। खास बात ये है कि इस दौरे पर कांग्रेस भी सवाल नहीं उठा रही है क्योंकि दस दौरे दौरों में सत्ता पक्ष के साथ विपक्ष के विधायक भी विदेश पहुंचे हुए हैं।

बता दें कि उत्तराखंड सरकार पर इस समय 36 हजार करोड़ रुपए का कर्जा है। यानि प्रत्येक राज्यवासी इस समय करीब 4000 रुपए के कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। ऐसे में सरकार के मंत्रियों और विधायकों का यह सैर-सपाटा कितना वाजिब है।

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