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फिनटेक स्टार्टअप की नजर छोटे शहरों पर

फिनटेक स्टार्टअप पेनीयर के महानगरों की जगह छोटे कस्बाई शहरों में ज्यादा उपभोक्ता हैं। कारोबारियों को डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के लिए प्लेटफॉर्म मुहैया कराने वाली हैदराबाद की यह फर्म छोटे कस्बों में तेजी से आगे बढ़ रही है। कंपनी के 50,000 व्यापारी ग्राहकों में दो तिहाई छोटे शहरों के हैं। जीएसटी सुविधा प्रधान करने के लिए प्रमाणित पेनीयर कारोबारियों को कर का भुगतान ऑनलाइन करने की सुविधा देती है, जिसके बारे में कंपनी का कहना है कि वह खाईं को भर रही है। पेनीयर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक प्रभु राम ने कहा, ‘छोटे शहरों के कारोबारी लोग संसाधनों के लिए संघर्ष करते हैं। हमने एक प्लेटफॉर्म तैयार किया है जो बाधाएं दूर करता है। इससे हमें बढऩे में मदद मिल रही है।’

इंटिग्रेटेड सॉल्यूशंस प्रदाता इन्सटैमोजो की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़े शहरों में स्थित छोटे उद्यमों के राजस्व मेंं जहां 100 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है, वहीं मझोले और छोटे शहरों में राजस्व में वृद्धि 75 प्रतिशत रही है, जो इंटरनेट की पहुंच की वजह से हुआ है। इंटरनेट की व्यापक पहुंच और सरकार द्वारा डिजिटलीकरण को बढ़ावा दिए जाने से फिनटेक कंपनियों को देश भर में बड़ी संख्या में ग्राहक बनाने में मदद मिली है। हालांकि अभी भी उन्हें डिजिटल अशिक्षा, क्रेडिट प्रोफाइलिंग की कमी और मजबूत आपूर्ति शृंखला जैसे संकट से जूझना पड़ रहा है।

पी2पी लेंडिंग कंपनी फिनमोमेंटा के सह संस्थापक और सीईओ ब्रह्म महेश खादेरबाद ने कहा, ‘उधारी लेने वालों के आंकड़े बमुश्किल उपलब्ध होते हैं। ऑटोमेशन और जीएसटी के बाद से वित्तीय सूचनाएं बढ़ रही हैं लेकिन उधार लेने वालों को चिह्नित करना बड़ी चुनौती बनी हुई है।’ छोटे उद्यम चलाने वालों में डिजिटल साक्षरता के प्रचार और पूरक समाधान मुहैया कराने के मामले में फिनटेक कंपनियां एक दूसरे की मदद भी कर रही हैं।

केपीएमजी में इनोवेशन ऐंड फिनटेक की डिजिटल रणनीति की प्रमुख और पार्टनर नेहा पुंटेर ने कहा, ‘जहां तमाम फिनटेक सेवाओं ने मेट्रो शहरोंं से कारोबार शुरू किया है, वहीं गैर मेट्रो शहरोंं में विस्तार के साफ संकेत मिल रहे हैं।’ फिनटेक सेवाओं में वृद्धि की अपार संभावनाएं हैं और वे बाजार तक व्यापक पहुंच मेंं छोटे उद्यमियों की मदद कर सकती हैं। वे वैकल्पिक क्रेडिट स्कोरिंग मॉलड और बुनियादी वित्तीय और लेखा सेवाएं मुहैया करा सकती हैं। डिजिटल भुगतान आसान होने से भी छोटे कस्बों में कारोबार की लागत घटाने में मदद मिली है। नेहा ने कहा, ‘जीएसटी परिवर्तनकारी रहा है और इससे तमाम छोटे कारोबारियों को क्रेडिट प्रोफाइल तैयार करने में मदद मिलेगी।’ हाल ही में डिजिटल लेंडर कैपिटल फ्लोट और ग्रामीण खुदरा सेवा प्रदाता स्टोरेकिंग फिनटेक सेवा के क्षेत्र में एक उदाहरण हैं कि वे अपनी पहुंच बड़े पैमाने पर छोटे कारोबार की ओर बढ़ा रही हैं।

वोडाफोन बिजनेस सर्विसेज में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और एसएमई और सोहो के प्रमुख अजय सहगल ने कहा, ‘छोटे कारोबारियों के लिए धन जुटाना आसान नहीं होता है। इसकी वजह से इन उद्यमों को टेक्नोलॉजी में निवेश की पर्याप्त सहूलियत नहीं रहती, जिससे वे दीर्घावधि लाभ सुनिश्चित कर सकें।’ यह छोटे कारोबारियों के लिए पार्टनर प्रोग्राम चलाती है। वैश्विक भुगतान सेवा प्रदाता पे-पाल चमड़ा निर्यातकों और छोटे फैशन रिटेलर्स के साथ काम कर रही है।

ग्रामीण क्षेत्र में उपभोक्ताओं की जरूरतों को देखते हुए रेजर पे जैसी भुगतान सॉल्यूशंस कम बैंडविथ में निवेश कर रही हैं। रेटिंग एजेंंसी क्रिसिल की हाल की रिपोर्ट के मुताबिक छोटे उद्यमों की उधारी में अगले 2 साल तक 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना है, जिसमें गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की अहम भूमिका रहेगी।

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