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उत्तराखंड पंचायत निकायों में चार करोड़ की हेराफेरी

राज्य में जिन त्रिस्तरीय पंचायतों पर ग्राम सुराज का दारोमदार है, वे वित्तीय अनियमितता का शिकार हो रही हैं। आलम ये है कि नाली, सड़क, पेयजल टंकी, सीसी सड़कों व सिंचाई गूलों के निर्माण में गड़बड़ियां की गई हैं। कई स्थानों पर पंजीकृत ठेकेदारों से निर्माण कार्य कराने के बजाय विभागीय अधिकारियों को नियम विरुद्ध तरीके से कार्य सौंपे गए।

यही नहीं, बुनियादी सुविधाओं जुटाने के लिए मुहैया कराई गई तकरीबन सवा चार करोड़ की धनराशि का सदुपयोग करने के बजाए नियमों को ताक पर रख बैंक खातों में दबाकर रखा गया। इसे सरकारी खजाने या शासन को वापस करने की जरूरत महसूस नहीं की गई।

टिहरी, चमोली, हरिद्वार व नैनीताल जिले में वर्ष 2013-15 तक त्रिस्तरीय पंचायतों में कराए गए ऑडिट में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। राज्य के ग्रामीण क्षेत्र तमाम बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं, ऐसे में गांवों में विकास के लिए जिम्मेदार त्रिस्तरीय पंचायतें सरकारी धन का जमकर दुरुपयोग कर रही हैं।

राज्य की विभिन्न पंचायतों ने करोड़ों की धनराशि अनियमित रूप से बैंक खातों में रखी, जबकि इनका गांवों की जरूरतें पूरी करने के लिए खर्च किया जाना चाहिए था। इस्तेमाल नहीं की जा सकी धनराशि को शासन या सरकारी खजाने में वापस नहीं किया जा रहा है। इससे सरकारी धन के खुर्द-बुर्द होने का अंदेशा भी बना हुआ है।

जिला पंचायत टिहरी: 

-वर्ष 2011-12 से 13-14 तक पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि के तहत 1194.39 लाख धनराशि मे से 31 मार्च, 2015 तक 99.92 लाख रुपये खर्च नहीं किए जा सके। इस राशि का उपयोग करने के बजाए इसे बैंक खातों में रखा।

-जिला पंचायत, राज्य वित्त आयोग, 13वां वित्त आयोग, दैवीय आपदा, विधायक निधि, सांसद निधि, पिछड़ा क्षेत्र अनुदान निधि, जिला योजना, पर्यटन विभाग से प्राप्त अनुदानों की 108.89 लाख धनराशि का उपयोग न कर गंभीर वित्तीय अनियमितता की गई

-वन विभाग से 85 हजार बतौर रायल्टी वसूल किए जाने थे, लेकिन नियमित वसूली नहीं की गई। इसीतरह संपत्ति कर व अन्य कर की अवशेष 4.77 लाख राशि को वर्ष 2014-15 तक नियमित वसूल नहीं किया गया।

क्षेत्र पंचायत प्रतापनगर

-विभिन्न अनुदानों से मिली 90.33 लाख की राशि शासन के निर्देशों के मुताबिक उपयोग नहीं किया और इसे बैंक खातों में रख अनियमितता बरती गई।

-अनुदानों से अर्जित ब्याज की 4.84 लाख की धनराशि सरकारी खजाने में जमा कराने से गुरेज।

-वर्ष 2014-15 में स्वच्छता, नाली, शौचालय, सिंचाई गूल व पेयजल टंकी बनाने को 1.55 लाख की धनराशि अग्रिम मंजूर की गई, लेकिन निर्माण कार्य निर्धारित समय पर पूरे नहीं हुए, इस धनराशि का समायोजन नहीं किया गया।

-2011-12 से लेकर 2013-14 के बीच 11 स्वीकृत निर्माण कार्य की 1.40 लाख की धनराशि से काम पूरे नहीं कराए गए।

क्षेत्र पंचायत जाखणीधार:

-क्षेत्र पंचायत को मिली 111.55 लाख अनुदान राशि का समय पर सदुपयोग न कर बैंक खातों में अवरुद्ध रखा गया, अनुदानों से अर्जित ब्याज राशि 3.79 लाख को भी शासन को समर्पित नहीं किया गया

-पिछड़ा क्षेत्र विकास निधि योजना में सीसी निर्माण को ग्राम विकास अधिकारी को 60 हजार रुपये अग्रिम दिए गए, लेकिन 15 महीने गुजरने पर भी काम पूरा नहीं। ग्राम विकास अधिकारी ने शेष रकम अपने पास रखी।

क्षेत्र पंचायत कीर्तिनगर:

क्षेत्र पंचायत को विभिन्न अनुदानों से मिली 83.40 लाख की राशि को उपयोग में अनियमितता बरतते हुए बैंक खातों में रखा गया।

-सीसी मार्ग के लिए 1.82 लाख रुपये से सीमेंट खरीदा गया, लेकिन इस खरीद में प्रोक्योरमेंट नियमावली का पालन नहीं किया गया।

विकासखंड हल्द्वानी

-विकासखंड हल्द्वानी ने 252.94 लाख की धनराशि का तय समय पर उपयोग नहीं किया, 5.29 लाख ब्याज धनराशि को भी सरकारी खजाने में जमा कराने के बजाए बैंक खातों में अनियमित रूप से रखा गया।

-वर्ष 2014-16 में राज्य वित्त, तेरहवें वित्त व पंचायत निधि के तहत स्वीकृत कार्यों की 9.49 लाख की धनराशि का इस्तेमाल नहीं हुआ।

क्षेत्र पंचायत रुड़की:

-निर्माण कार्यों को प्रयोग की जाने वाली सामग्री पर ठेकेदारों के बिलों से रॉयल्टी की राशि 1.11 लाख कटौती नहीं की गई।

-विभिन्न मदों में प्राप्त धनराशि पर अर्जित ब्याज 18.49 लाख की राशि सरकारी खाते में जमा नहीं की गई।

-राज्य वित्त आयोग के निर्देशों का उल्लंघन कर 1.40 लाख की राशि को अनियमित मदों में खर्च किया गया।

-13वें वित्त आयोग के निर्देशों के विपरीत 84,049 रुपये को दूसरे मद में खर्च किया गया।

क्षेत्र पंचायत नारायणबगड़:

-वर्ष 2013-14 व 2014-15 में क्षेत्र पंचायत ने विभिन्न योजनाओं में तीन लाख तक के निर्माण कार्य मस्टरोल के आधार पर भुगतान कर अनियमितता की गई, यह कार्य पंजीकृत ठेकेदारों से कराने की व्यवस्था है, लेकिन कार्यादेश के आधार पर विभागीय अधिकारियों से निर्माण कार्य कराया गया।

-विभिन्न निधियों से प्राप्त धनराशि में से अग्रिम राशि 22.97 लाख का समायोजन न कर वित्तीय अनियमितता।

-राज्य वित्त की धनराशि 99,947 रुपये व 97,270 रुपये और विधायक निधि की 1,49,520 राशि से किए गए निर्माण कार्य का ग्राम विकास अधिकारी को नियम विरुद्ध भुगतान कर राजस्व को नुकसान।

-विभिन्न योजनाओं में 9,03,503 की धनराशि शासन को समर्पित नहीं की गई।

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