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बैलों की जगह खुद हल खींच रहे ये दंपती

भोपाल।मध्यप्रदेश में दो बेटियों को हल में जोतने का मामला सामने आने के कुछ दिन बाद ही डिंडोरी के आदिवासी दंपती की ये तस्वीर सब को झकझोर देगी। यह दंपती सात सालों से बैलों की जगह खुद को हल में जोतकर अपना पेट पालने को मजबूर है। इनकी यह स्थिति सरकारी योजनाओं में हो रहे भ्रष्टाचार का प्रतीक भी बन गई है।
आपको बताने जा रहा है मध्यप्रदेश के डिंडोरी जिले के मेंहदवानी विकास खंड के मटियारी गांव के ऐसे दंपती की कहानी, जो सरकारी भ्रष्टाचार के कारण बैलों की जगह खुद को जोतकर अनाज पैदा कर अपना पेट पाल रहा है।यह ताजा तस्वीरें PM मोदी के कैबिनेट में शामिल केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते के संसदीय क्षेत्र और मध्यप्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे के विधानसभा क्षेत्र की हैं।
(आदिवासी किसान गेंदू सिंह अपनी पत्नी सविता के साथ हल जोतते हुए।)
यह है मामला
वर्ष 2009 की बात है जब एक गरीब किसान गेंदू सिंह गोंड ने विशेष केंद्रीय सहायता योजना के अंतर्गत ग्राम पंचायत से बैल जोड़ी का आवेदन किया था। काफी चक्कर लगाने के बाद गेंदू के लिए बैल जोड़ी की स्वीकृति मिल गई। गेंदू के नाम पर सारी कागजी पूरी कर ली गई। लेकिन, जब काफी चक्कर लगाने के बावजूद भी उसे बैल जोड़ी नहीं मिले, तब पता चला कि गेंदू को मिलने वाली बैल जोड़ी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गए हैं। पूर्व जनपद पंचायत अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद मामला पुलिस में पहुंचा और सरपंच सचिव और जनपद सदस्य के खिलाफ जालसाजी का प्रकरण दर्ज कर लिया गया। फिलहाल मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
पति-पत्नी के कंधे पर जीवन का बोझ
भ्रष्टाचार के शिकार होने के बाद मामला न्यायालय में चले गया और गेंदू को अब तक न बैल जोड़ी मिले न ही न्याय। गरीब गेंदू के पास इतने भी पैसे नहीं रहते हैं कि वह किराए पर बैलजोड़ी ला सके। परिवार का पेट पालने के लिए पत्नी सविता के साथ उसे खुद ही बैल के स्थान पर लगना पड़ता है।
अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला
गेंदू सिंह को बैल जोड़ी नहीं दिलवा पाने के मामले में जनपद पंचायत के अधिकारी पल्ला झाड़ लेते हैं। वे मामला न्यायालय में होने का हवाला देकर मामले को चलता कर देते हैं।
कलेक्टर बोले- जांच होगी
2009 में बैगा विकास परियोजना निवास से विशेष केंद्रीय सहायता मद से गेंदू सिंह को बैल जोड़ी मिला था। वहां उसे बैल नहीं मिला। कहां गड़बड़ी हुई इसकी जांच के आदेश दे दिए हैं। फिलहाल 30 हजार का चेक गेंदू सिंह को दे रहे हैं। ताकि वे बैल खरीदकर खेती कर सकें।
-अमित तोमर, कलेक्टर, डिंडोरी

 

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