Chief minister Devendra Fadnavis reviewing the jalyukta shivar project at village Lambota in Nilanga taluka at district Latur. Express photo

अरबों की जमीन कौड़ियों के भाव में बेचने वाली महाराष्ट्र सरकार

मुंबई से सटे नवी मुंबई में एक जमीन सौदे को लेकर महाराष्ट्र सरकार सवालों के घेरे में आ गई है. विपक्ष का आरोप है कि राज्य सरकार ने अरबों की जमीन एक बिल्डर को कौड़ियों के भाव में बेच दी. इससे पहले जब हरियाणा में रॉबर्ट वाड्रा के जमीन सौदे की बात आई थी, तो बीजेपी ने कांग्रेस सरकार पर शिकंजा कस दिया था, लेकिन अब कांग्रेस महाराष्ट्र की फडणवीस सरकार को कठघरे में खड़ा कर रही है. सवालों की फांस से बचने के लिए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे दिए हैं.


कैसे उठा ये जमीन विवाद, और कौन-कौन से नाम इस विवाद के घेरे में हैं

नवी मुंबई जहां एक वर्गफीट जमीन का दाम एक लाख रुपए से ऊपर है. जल्द ही यहां एयरपोर्ट बनने वाला है, लेकिन विमानों की उड़ान से पहले ही जमीन के भाव आसमान छूने लगे हैं. यही जमीन इन दिनों महाराष्ट्र सरकार के गले की फांस बनी हुई है. कांग्रेस का आरोप है कि नवी मुंबई के खारघर में जमीन के बहुत बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया है. यहां किसानों के नाम पर 24 एकड़ जमीन लेकर 24 घंटे के अंदर बिल्डर के नाम कर दी गई. आरोपों के मुताबिक ये जमीन CIDCO यानी सिटी एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन की है लेकिन सरकारी अफसरों ने इस जमीन का सौदा CIDCO को अंधेरे में रखकर कर दिया. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी MLC प्रसाद लाड के करीबी मित्र और पैराडाइज बिल्डर के मालिक मनीष भतीजा को जमीन औने-पौने दाम में दी गई है. लेकिन सरकार के विस्थापित आयोग के उपाध्यक्ष माधव भंडारी ने इस मामले में किसी भी तरह का घोटाला होने से इनकार कर दिया. उनके मुताबिक ये जमीन सरकार की है, सिडको की नहीं. और कांग्रेस बेवजह इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है.

क्या था मामला ?
26 फरवरी 2018 को रायगढ़ जिले के कलेक्टर ने आठ किसानों को जमीन देने का ऐलान किया. 8 मई 2018 को राजस्व विभाग के अधिकारियों ने जमीन का सर्वे किया.14 मई 2018 को तहसीलदार ऑफिस ने किसानों के नाम पर जमीन ट्रांसफर कर दी.
बता दें कि रायगढ़ के उन आठ किसानों को नवी मुंबई की वही जमीन अलॉट की गई, जो आज विवादों के घेरे में है. आरोप है कि घोटाले को अंजाम देने वालों की नजर पहले से ही इस जमीन पर लग गई थी. वो किसी तरह ये जमीन बिल्डर तक पहुंचाना चाहते थे.

14 मई 2018 को ही जमीन से जुड़ी सभी पार्टियों को नोटिस जारी किया गया
उसी दिन आठ किसान जमीन की पावर ऑफ अटार्नी बिल्डर मनीष भतीजा और संजय भालेराव को दे दिया
14 से 15 मई के दौरान बिल्डर जमीन खरीद लेता हैं
पूरा सौदा सिर्फ 3 करोड़ 60 लाख रुपए में हो जाता है
23 जून 2018 को पुलिस बिल्डर को जमीन पर कब्जा दिला देती है.

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