इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स ने बाइक के इंजन से बनाई कार

नए-नए प्रयोगों के इस ‘ई-वर्ल्ड’ दौर में तकनीक को आधार बनाकर वैश्विक स्तर की समस्याओं को हल करने की कोशिश लगातार जारी है। इसमें एक नई कड़ी जोड़ते हुए बेंगलुरु के सर एम. विश्वेश्वरैया इन्स्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलजी के 24 युवा इंजीनियर्स की टीम ‘फ़्यूचरैमिक’ ने एक कार का प्रोटोटाइप डिज़ाइन तैयार किया है, जिसमें 100 सीसी की मोटरसाइकल का इंजन लगा हुआ है।

  कार के डिज़ाइन को ‘अथर्व 2.0’ नाम दिया गया है। फ़्यूचरैमिक टीम का यह डिज़ाइन 8-11 मार्च के बीच संपन्न हुए शेल ईको-मैराथॉन इवेंट में प्रदर्शित हुआ। युवा इंजीनियर्स की टीम ने इवेंट में गैसोलीन कैटिगरी में हिस्सा लिया।

नए-नए प्रयोगों के इस ‘ई-वर्ल्ड’ दौर में तकनीक को आधार बनाकर वैश्विक स्तर की समस्याओं को हल करने की कोशिश लगातार जारी है। इसमें एक नई कड़ी जोड़ते हुए बेंगलुरु के सर एम. विश्वेश्वरैया इन्स्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नॉलजी के 24 युवा इंजीनियर्स की टीम ‘फ़्यूचरैमिक’ ने एक कार का प्रोटोटाइप डिज़ाइन तैयार किया है, जिसमें 100 सीसी की मोटरसाइकल का इंजन लगा हुआ है। कार के डिज़ाइन को ‘अथर्व 2.0’ नाम दिया गया है। फ़्यूचरैमिक टीम का यह डिज़ाइन 8-11 मार्च के बीच संपन्न हुए शेल ईको-मैराथॉन इवेंट में प्रदर्शित हुआ। युवा इंजीनियर्स की टीम ने इवेंट में गैसोलीन कैटिगरी में हिस्सा लिया।

लगातार चौथी बार की शिरकत

टीम पिछले तीन से लगातार इस इवेंट में हिस्सा ले रही है और इस कार का एक प्रोटोटाइप डिज़ाइन, एसईएम में पहले भी प्रदर्शित कर चुकी है। इस वजह से ही कार के डिज़ाइन को ‘अथर्व 2.0’ नाम दिया गया है। अभिनंदन कहते हैं कि इस बार वह अपने डिज़ाइन और उसकी कार्य क्षमता को लेकर पहले की अपेक्षा अधिक सकारात्मक हैं। 24 युवा इंजीनियरों की इस टीम को लीड कर रहे हैं, 21 वर्षीय अभिनंदन प्रभु डुग्गावती। अभिनंदन टीम के मैनेजर हैं।

पहले भी मिल चुकी है सफलता

अभिनंदन ने एसईएम इवेंट में अपनी पहली जीत के बारे में बताते हुए कहा कि प्रोटाटाइप को मिली सफलता के बाद भी प्रोजेक्ट को स्पॉन्सर्स नहीं मिले। इस बारे में अभिनंदन मानते हैं कि इन चुनौतियों ने ही उन्हें और भी बेहतर प्रोडक्ट बनाने के लिए प्रेरित किया। लंबी रिसर्च और सुधारों के बाद अथर्व 2.0 का विकास हुआ।

कार के डिज़ाइन में क्या-क्या है ख़ास

कार सिंगल सीटर है और इसे बनाने के लिए एयरक्राफ़्ट एल्युमिनियम 7075 चेसिस का इस्तेमाल किया गया है। टीम का दावा है कि यह कार, 100 किमी/लीटर का माइलेज देगी। टीम के मुताबिक़, कार की बॉडी या चेसिस हल्की है, लेकिन सेफ़्टी को ध्यान में रखते हुए इसकी मजबूती के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया गया है। अभिनंदन ने बताया कि इंजन मैनेजमेंट सिस्टम के साथ-साथ गाड़ी में इलेक्ट्रॉनिक फ़्यूल इंजेक्शन का फ़ीचर भी है। टीम इसे इंजन का दिमाग़ बताती है, क्योंकि अच्छे माइलेज और गुणवत्ता के लिए इसकी ख़ास प्रोग्रामिंग की गई है।

टीम ‘फ़्यूचरैमिक

इलेक्ट्रॉनिक फ़्यूल इंजेक्शन सिस्टम की मदद से फ़्यूल और एयर के मिश्रण के साथ-साथ फ़ाइरिंग टाइम को भी नियंत्रित किया जाता है। गाड़ी में 4-स्पीड गियरबॉक्स लगा हुआ है और पीछे के पहिए इंजन से चलते हैं। गाड़ी में डिस्क ब्रेक्स की सुविधा भी दी गई है और ऐलॉय व्हील्स का इस्तेमाल किया गया है। ऐयरोडायनैमिक बॉडी और फ़्यूल एफ़िसिएंसी, कार को कॉमर्शियल यूज़ के लिए भी उपयुक्त बनाते हैं।

इलेक्ट्रिक वाहनों का है भविष्य

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का आधुनिक मार्केट लगाता बढ़ रहा है और 2030 तक देश में 100 प्रतिशत ई-मोबिलिटी हासिल करने की तैयारी है। इस क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं। टीम फ़्यूचरैमिक इस तथ्य से प्रभावित होकर ही, लंबे समय से ऊर्चा की बचत करने वाले वाहनों के शोध में लगी हुई है, जिससे पेट्रोल आदि ईंधनों की खपत को कम से कम किया जा सके और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित किया जा सके।

 इस साल एसईएम के दूसरे चरण तक 12 भारतीय टीमें पहुंची और टीम फ़्यूचरैमिक इनमें से एक है। टीम पहले भी इस इवेंट में प्रतिभागिता दर्ज करा चुकी है। 2015 में उन्हें पहली बड़ी सफलता हासिल हुई थी, जब उन्होंने भारतीय टीमों में पहला और एशियाई टीमों में 7वां स्थान हासिल किया था। अभिनंदन बताते हैं कि उनकी टीम पिछले तीन साल से लगातार इस इवेंट का हिस्सा रही है और यह चौथी बार है, जब उनका प्रोटोटाइप इवेंट में शिरकत कर रहा है। उन्होंने कहा कि 2015 मे मिली जीत के बाद उनकी टीम को फ़्यूल-एफ़िसिएंट गाड़ियां बनाने के लिए और भी अधिक प्रोत्साहन मिला।

क्या है टीम की सोच?

अभिनंदन बताते हैं कि उनकी टीम के हर प्रयोग के पीछे एक ही उद्देश्य होता है कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर से बेहतर इस्तेमाल हो सके। उन्होंने आगे कहा कि ऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोत के बारे में बात करने से पहले हम लोगों को अपनी कारों की तकनीक में नए फ़ीचर्स जोड़कर उन्हें बेहतर से बेहतर बनाने पर विचार करना चाहिए। ऐसी तकनीक के विकास की कोशिश करनी चाहिए कि जिससे जीवाश्म ईंधनों को बचाया जा सके; मौसम में कार्बन की मात्रा में कटौती हो सके और फलस्वरूप ग्लोबल वॉर्मिंग के दुष्प्रभावों को कम किया जा सके। टीम ने क्राउडफ़ंडिंग प्लेटफ़ॉर्म और कॉलेज में विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के माध्यम से अपनी रिसर्च के लिए पैसा इकट्ठा किया। अभिनंदन मानते हैं कि भारत, ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े बदलावों के लिए पूरी तरह से तैयार है।

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