पिथौरागढ़ के मालपा व घटियाबगड़ में रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

पिथौरागढ़ : पिथौरागढ़ के मालपा और घटियाबगड़ में हुर्इ बादल फटने की घटना के बाद से लगातार आइटीबीपी के जवान और सेना द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन चलया जा रहा है। अबतक इस हादसे में करीब 17 लोगों की मौत हो गई जबकि 30 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस क्षेत्र में अभीतक भी प्रशासनिक मदद नहीं पहुंंच पाई है। मलबे से सेना के एक जेसीअो  व दाे सैनिक  घायलावस्था में‍ ‍‍‍‍पाए गए थे, जिन्हें अस्पताल में भर्ती करा दिया गया।  अब भी लापता लाेगाें में सेना के एक जेसीअो  समेत पांच जवान शामिल हैं। लापता लोगों के ‍‍‍मिलने की उम्मीद धूमिल हाेती जा  रही  है। अंदाजा लगाया  जा रहा है ‍कि शव अगर काली नदी में चले गए होंगे ताे ‍मिलना मुश्किल हाेगा।

बादल फटने से प्रभावित मालपा और घटियाबगड़ में मृतकों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है। मालपा तक नजंग के पास मार्ग बंद होने से नीचे से पहुंच पाना मुश्किल है। ऊपर की ओर तैनात एसएसबी, आईटीबीपी और गर्ब्यांग गूंजी आदि स्थानों के युवक राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं। वहीं शासन द्वारा भेजा गया हेलीकॉप्टर भी पिथौरागढ़ में है। इससे मौसम के साफ होते ही मालपा से शवों को लाया जाएगा।

वहीं घटियाबगड़ में सेना, एसएसबी के जावान राहत और खोज में जुटे हैं। राहत-बचाव के दौरान एक जेसीओ और दो जवान सोमवार को सुरक्षित मिले। इन तीनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।, जबकि एक जेसीओ और पांच जवान अभी भी लापता हैंं। वहीं शासन द्वारा आज घटियाबगड़ में वायरलेस सिस्टम लगाया जा रहा है। फिलहाल क्षेत्र में मौसम खराब है।

गौरतलब है कि सोमवार तड़के करीब 2.45 बजे सात हजार फीट की ऊंचाई स्थित कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर दुंगदुंग में बादल फटने की पहली घटना हुई। इसी दौरान मालपा में भी बादल फट गया। जिससे ननगाड़ और ठुलगाड़ व मालपा नाला उफान पर आ गए। इन नालों के प्रवाह से सिमखोला नदी विकराल हो गई। नतीजतन मालपा में तीन होटल बह गए। जबकि घटियाबगड़ में आर्मी ट्रांजिट कैंप तबाह हो गया। कैंप में सो रहे जवानों ने पहाड़ी पर चढ़कर जान बचाई।

इस दौरान सेना के तीन ट्रक सहित आधा दर्जन अन्य वाहन व सेना का साजो सामान भी बह गया। सैन्य सूत्रों के अनुसार सेना के दो जेसीओ व पांच जवान अब भी लापता हैं। मालपा व घटियाबगड़ में अभी तक मलबे से छह शव ही बरामद किए जा सके हैं। कुछ क्षत-विक्षत अंग भी मिले हैं। बरामद शवों में एक सेना का जेसीओ बताया जा रहा है। शवों के क्षत-विक्षत होने से शिनाख्त नहीं हो पा रही है।

याद आया 1998 का मंजर 

मालपा की तबाही ने 1998 के भयावह मंजर की याद ताजा कर दी। यह स्थान कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग पर तीसरे दिन की पैदल यात्रा में पड़ता है। 1998 से पहले यह मानसरोवर यात्रा का तीसरा पैदल पड़ाव होता था। 17 अगस्त 1998 की रात यहां बादल फटने से पहाड़ी ढह गई थी। जिसमें 60 कैलास मानसरोवर यात्रियों समेत 260 आइटीबीपी, पुलिस व यात्रा सेवकों की मौत हो गई थी। महीनों शवों की खोज का अभियान चला था। तभी से यहां कैलास यात्रियों को रुकने नहीं दिया जाता। अलबत्ता बाद के दिनों में फिर यहां बसासत होनी लगी। तीन-चार होटल बन गए। भारत चीन व्यापार में जाने वाले और उच्च हिमालयी गावों के लोग धारचूला आने जाने के दौरान रात्रि विश्राम भी यहीं करते हैं।

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