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अडानी-अंबानी की बिजली कंपनियों ने लूटे हजारों करोड़

नई दिल्ली। देश की कुछ बड़ी कंपनियों ने बिजली उपकरण और ईंधन में करोड़ों का घपला किया है। जाने-माने अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने बिजली कंपनियों के फ्रॉड के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर एसआईटी से जांच की मांग की है। अडानी, एस्सार ग्रुप और रिलायंस एडीएजी समूह की बड़ी कंपनियों ने हजारों करोड़ का घोटाला किया है। उक्त दोनों कंपनियों का सत्तापक्ष से मिलीभगत जगजाहिर है। जानकारी के मुताबिक कुछ बिजली कंपनियां द्वारा बिजली उपकरण और ईंधन में 400 फीसदी से अधिक ओवर-इनवॉइसिंग के फ्रॉड में शामिल होने का आरोप है। घपले के जरिये इन कम्पनियों ने टैक्स हेवन में पंजीकृत अपने प्रमोटर कम्पनियों तक पैसा पहुंचाया और ईंधन की कीमत पर आधारित बिजली की दरों में बढ़ोतरी की।

राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने  2014 में अडानी ग्रुप को और 2015 में एस्सार ग्रुप को नोटिस भेजा था जिसमें आये दस्तावेज भी घपले की पुष्टि करते हैं। यह याचिका इन्डोनेशियाई कोयला आयात और बिजली उपकरणों के आयात पर अत्यधिक मूल्यांकन के मामले में अडानी समूह, एस्सार ग्रुप और रिलायंस एडीएजी समूह की कंपनियों सहित दर्जन से ज्यादा कंपनियों की जांच के लिए दायर की गयी है। जुलाई 2014 में सीबीआई और सीबीए के द्वारा शुरूआती जांच को पूर्व निदेशक रंजीत सिन्हा के कार्यकाल में दबा दिया गया था। भ्रष्टाचार विरोधी कानून और फेमा उल्लंघन के बावजूद मोदी सरकार ने अब तक इस मामले में कोई कार्यवाई नहीं की है।

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं स्वराज अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रशांत भूषण ने कहा, ‘‘यह एक बहुत ही गंभीर मामला है जिसमें हजारों करोड़ का खेल हुआ है। इसका सीधा  असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। सीबीआई ने अडानी ग्रुप के खिलाफ प्रारंभिक जांच दर्ज की थी, लेकिन रंजीत सिन्हा के कार्यकाल के दौरान जंाच बंद थी, अब एसआईटी द्वारा जांच की जा रही है।’’  उन्होंने कहा कि, ‘‘ इन फर्मों द्वारा ओवर-इनवॉइसिंग दिखाकर बैंकों से अधिक ऋण ली गयी। इससे टैरिफ बढ़ा के उपभोक्ताओं के साथ भी धोखाधड़ी की गयी और इन कंपनियों के शेयर धारकों का पैसा भी विदेश में बंद हो चुका है जिससे उनके साथ भी धोखा हुआ है।“

ज्ञात हो कि न्यायधीश हरी शंकर ने खुद को इस केस से हटा लिया है क्यूंकि उन्होंने इनमें से कुछ कंपनियों की वकालत पहले कर रखी है। स्वराज अभियान ने मांग किया है कि अदालत की निगरानी में एसआईटी जांच करके दोषियों को सजा हो। मामले की अगली सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट में  20 सितम्बर को होगी।

 

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