स्टूडेंट्स ने लड़ी 20 महिलाओं के ‘अधिकार’ की लड़ाई

दिल्ली स्कूल ऑफ आर्ट्स ऐंड कॉमर्स के 11 स्टूडेंट्स ने पूर्वी दिल्ली की कुछ महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में मदद की। इन स्टू़डेंट्स ने ‘अधिकार’ नाम का एक प्रॉजेक्ट तैयार किया जिसके तहत महिलाओं को शिष्टाचार, आत्मरक्षा के गुर और ड्राइविंग करना सिखाया गया। इसके अलावा इन स्टूड़ेंट्स ने महिलाओं को ट्रैफिक के नियमों के बारे में जानकारी दी और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने में भी मदद की।

इन स्टूडेंट्स ने गरीब महिलाओं को माइक्रो-फाइनैंस के जरिए ई-रिक्शा खरीदने में भी मदद की। रोजगार के इस साधन से ये महिलाएं औसतन 30,000 रुपये महीने की कमाई कर रही हैं। स्टूडेंट्स ने साल 2015 में इस प्रॉजेक्ट की शुरुआत की और ये स्टूडेंट्स 10 लाख अमेरिकी डॉलर की सीड फंडिंग की कोशिश कर रहे हैं।

इस प्रॉजेक्ट के मेंबर स्टूडेंट ऋषभ कोहली ने कहा, ‘हमने महिला शोषण की समस्या से शुरुआत की थी। हमने पाया कि मेट्रो महिलाओं के लिए सुरक्षित है लेकिन उसके बाहर? स्टडी से पता चलता है कि 67 फीसदी महिलाएं यौन शोषण का शिकार हुई हैं।’ अधिकार प्रॉजेक्ट को अब तक कई अवॉर्ड मिल चुके हैं। प्रॉजेक्ट को वॉलमार्ट विमिन एम्पावरमेंट ग्रांट, महिंद्रा राइज ग्रांट, ब्लूडार्ट ग्रांट और इनैक्टस इंडिया अवॉर्ड्स से नवाजा जा चुका है।

महिलाओं के यौन शोषण की समस्या का समाधान दो पहलुओं वाले मॉडल के रूप में सामने आया। पहला, कैब-रिक्शा-ऑटो और मेट्रो में महिला ड्राइवर होना ताकि वे कहीं आने-जाने में सुरक्षित महसूस कर सकें और दूसरा उन्हें रोजगार मिल सके।

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