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मेरठ में वंदे मातरम् पर गरमाई सियासत

मेरठ. बसपा मेयर सुनीता वर्मा के पति और पूर्व विधायक योगेश वर्मा के ‘वंदे मातरम’ पर विवादित बयान देने के बाद भाजपा नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। भाजपा की नवनिर्वाचित महिला पार्षदों ने तो चेतावनी दे दी है कि अगर योगेश सदन में घुसे तो उन्हें वहां से खदेड़ दिया जाएगा। वार्ड 47 के पूर्व भाजपा पार्षद विरेन्द्र शर्मा ने कहा कि पिछले कार्यकाल में सदन की शुरुआत वंदे मातरम से हुर्इ है। योगेश वर्मा कौन होते हैं, निगम सदन में वंदे मातरम कहने से रोकने वाले। योगेश सदन की गरिमा का अपमान कर रहे हैं। वह यह भूल गए हैं कि वे अब नवनिर्वाचित मेयर के पति हैं और उनका ऐसा बयान गैरजिम्मेदार की श्रेणी में आता है। नवनिर्वाचित पार्षद अनुज वशिष्ठ ने कहा कि योगेश वर्मा ने जो कहा है, उसका विरोध करते हैं। निगम में कई सालों से वंदे मातरम होता आया है। यदि योगेश ऐसा करते हैं तो उसका खुलकर विरोध होगा। हम सड़क से सदन तक योगेश का विरोध करेंगे।

भाजपा के मंडल अध्यक्ष संजीव शर्मा ने कहा कि एक चुनाव जीतने के बाद लोगों के दिमाग खराब हो गए हैं। इन लोगों का आपराधिक इतिहास सारा शहर और प्रदेश जानता है। पिछली सरकारों में इन लोगों ने क्या-क्या किया सब जानते हैं। उन्होंने कहा कि बयान मेयर स्वयं दें। मेयर पति कौन होते हैं इस तरह का बयान देने वाले। वार्ड 26 से भाजपा की पार्षद सुनीता रानी ने कहा कि मेयर पति कौन होते हैं सदन के बारे में फैसला लेने वाले। हम इसका विरोध करते हैं।

वहीं, कानूनविदों की मानें तो किसी भी सदन के लिए टिप्पणी करने या उसके कार्य में हस्ताक्षेप का अधिकार सदन के सदस्य या मेयर को है। मेयर पति को इसका कोई अधिकार नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता गजेन्द्र सिंह धामा के अनुसार योगेश वर्मा को इस तरह की टिप्पणी करने का कोई अधिकार नहीं है। यह अधिकार सिर्फ मेयर और वहां के सदस्यों का है।

पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ नगर निगम में लंबे समय से वंदे मातरम् पर जारी राजनीति में उस समय नया मोड़ आ गया है। बसपा के टिकट पर नवनिर्वाचित महापौर सुनीता वर्मा के पति ने कहा था कि सदन की कार्यवाही में वंदे मातरम नहीं है। उनका कहना है कि सदन नियम कानून के तहत चलेगा और वंदे मातरम् नहीं गाया जाएगा। आपको बता दें कि बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ी सुनीता वर्मा पूर्व विधायक योगेश वर्मा की पत्नी हैं । गौरतलब है कि इससे पहले भाजपा के पिछले मेयर के कार्यकाल में वंदे मातरम् को लेकर खासा बवाल हुआ था । इसके बाद हरिकांत अहलूवालिया ने सदन में ध्वनि मत के सहारे से वंदे मातरम् का प्रस्ताव पास कर दिया था। लेकिन, अब मेयर पति ऐसे किसी प्रस्ताव की जानकारी होने की बात से भी इनकार कर रहे हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि अपनी पत्नी की बदौलत क्या वह सदन में वंदे मातरम पर रोक लगा पाते हैं या फिर यह मुद्दा एक नया तूल पकड़ेगा, क्योंकि उनके इस बयान के बाद भाजपा नेताों ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।

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