कांग्रेस, आखिर कैसे लगा पाएगी चुनावी नैया को पार

नई दिल्‍ली । लोकसभा चुनाव के बाद लगातार विधानसभा चुनाव में भी पिछड़ने वाली कांग्रेस के दिन आगे भी सुधरते दिखाई नहीं दे रहे हैं। यह हाल तब है जब आने वाले समय में राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में कांग्रेस अपने नेताओं की महत्‍वाकांक्षा के मकड़जाल में बुरी तरह से फंसती दिखाई दे रही है। आने वाले समय में जिन राज्‍यों में चुनाव होने हैं उनमें से एक राजस्‍थान की कहानी कुछ ऐसी है कि यहां हर पांच वर्ष बाद सरकार बदलती रही है। लेकिन यहां पर भी इस बार पुराने और नए कांग्रेसी आमने-सामने आते दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ यदि बात की जाए मध्‍य प्रदेश की तो पिछले दिनों जिस तरह के पोस्‍टर यहां पर दिखाई दिए थे वह भी कांग्रेस के लिए परेशानी की बड़ी वजह बन सकते हैं। तीसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ है, जहां पर कांग्रेस को सत्ता पाने के लिए अभी कई कदम चलने पड़ेंगे।

पार्टी के पिछड़ने की वजह 
कांग्रेस के पिछले कुछ समय पर नजर डालेंगे तो यह साफतौर पर पता चल जाएगा कि पार्टी की हार के पीछे क्‍या वजह हैं। पार्टी की जमीनी हकीकत और पकड़ दोनों ही ढिली हुई हैं। भाजपा की तुलना में वह निचले स्‍तर पर कभी सही तरीके से काम नहीं कर सकी है और न ही इसका कोई खाका तैयार कर सकी है। इतना ही नहीं जिस तरह से भाजपा सालों-साल चुनाव की तैयारी करती दिखाई दी है और अपने बूथ स्‍तर के कार्यकर्ता को मजबूत करती दिखाई दी है वैसा कुछ कांग्रेस में दिखाई नहीं देता है। हालांकि कांग्रेस अध्‍यक्ष इस बारे में कई बार कहते सुने गए हैं कि वह लाइन में खड़े आखिरी व्‍यक्ति को मंच पर लाने का काम करेंगे। लेकिन यह हकीकत से अब भी कोसों दूर हैं। दोनों पार्टियों की तुलना की जाए तो जहां भाजपा राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव के लिए कमर कस चुकी है वहीं कांग्रेस केवल राजस्‍थान में कवायद करती दिखाई दे रही है।

छत्तीसगढ़ में पार्टी की हालत 
आपको यहां पर बता दें कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्‍यमंत्री अजीत जोगी जो कि खुद कांग्रेसी नेता रह चुके हैं, उन्‍होंने जिस तरह का बयान कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी को लेकर दिया है वह पार्टी की पोल को खोलने के लिए काफी है। इसके अलावा राहुल गांधी द्वारा लोकसभा में किया कृत्‍य आम जनता ने खूब देखा और समझा है। ऐसा पहली बार नहीं है कि राहुल गांधी की नेतृत्‍व क्षमता को लेकर उनके ही किसी पूर्व नेता ने सवाल किया हो। इससे पहले पूर्व विदेश मंत्री सीएम कृष्‍णा भी राहुल गांधी को लेकर निशाना साध चुके हैं।

सही दिशा की कमी 
बहरहाल, राजनीतिक विश्‍लेषक मानते हैं कि कांग्रेस के पास आज भी उस सोच की कमी साफ दिखाई देती है जिसके दम पर भाजपा लगातार अपने शासित राज्‍यों को बढ़ाती आ रही है। छत्तीसगढ़ की ही यदि बात करें तो यहां आंकड़े बताते हैं कि यहां के 80 फीसद मतों पर केवल कांग्रेस और भाजपा का ही कब्‍जा है। इसका अर्थ यह साफ है कि कांग्रेस और भाजपा की यहां पर सीधी टक्‍कर है। इसके बाद भी वह सत्ता से बाहर ही है। वहीं यदि रमन सिंह की बात करें तो वह 2003 से राज्‍य के मुख्‍यमंत्री हैं। उनके नेतृत्‍व में भाजपा ने 2008 और 2013 में राज्‍य के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की है। उनकी छवि पार्टी और राज्‍य में एक इमानदार नेता की है।

नहीं उभर सका तीसरा दल 
इससे पूर्व वह 1990 और 1993 में भी मध्यप्रदेश विधानसभा के भी सदस्य रह चुके हैं। 1999 में वे छत्तीसगढ़ की राजनंदगांव लोकसभा सीट से चुने गए और अटल सरकार में केंद्रीय मंत्री भी बनाए गए थे। वहीं अजी‍त जोगी को भूल चुकी कांग्रेस के पास आज भी यहां पर एक दमदार नेता की कमी साफतौर पर झलकती है। हालांकि जोगी यहां के लिए एक जाना पहचाना नाम और चेहरा हैं। लेकिन उनके साथ परेशानी ये है कि यहां की राजनीति में कोई भी क्षेत्रीय दल उभर नहीं पाया है। यही वजह है कि कांग्रेस और भाजपा के विकल्‍प में रूप में आज तक कोई तीसरा दल अपनी जगह नहीं बना पाया है।

 

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