सियासत में ‘कांग्रेस के राम’ और ‘बीजेपी के मुसलमान’

देश की सियासत में इन दिनों नया रंग देखने को मिल रहा है. बीजेपी से मुकाबला करने के लिए कांग्रेस सॉफ्ट हिंदुत्व की राह पर चलने को मजबूर है तो वहीं मुसलमानों से दूरी बनाकर चलने वाली बीजेपी अब उन्हें ही गले लगाने की कवायद में जुटी है. गुजरात चुनाव के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने मंदिर-मंदिर माथा टेका और दर्शन किया तो इसका सियासी फायदा भी मिला. कांग्रेस इसी फॉर्मूले के साथ अब कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान विधानसभा चुनाव में उतरने की तैयारी कर रही है. इसके जवाब में बीजेपी भी अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए बंगाल में मुस्लिम मतों को रिझाने के लिए काम कर रही है.

मुस्लिम तुष्टीकरण से तौबा

बता दें कि लंबे समय से कांग्रेस पर मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप बीजेपी लगाती थी और हिंदुत्व कार्ड का उसे फायदा भी मिलता था. लेकिन गुजरात में राहुल गांधी ने बीजेपी का ये समीकरण गड़बड़ा दिया. राहुल सॉफ्ट हिंदुत्व की रणनीनति के साथ आगे बढ़े और विधानसभा चुनाव में जबर्दस्त सियासी फायदा भी हुआ. कांग्रेस की सीटें बढ़ी और 77 विधायक जीतने में कामयाब रहे. अब पार्टी इस रणनीति को और आगे बढ़ाती हुई नजर आ रही है.

चुनाव जीतने के बाद भी गुजरात में कांग्रेस ने अपनी रणनीति के साथ और आगे बढ़ने का फैसला किया है. गुजरात में 148 राम मंदिरों का कायाकल्प करने का बीड़ा कांग्रेस नेताओं ने उठाया है. पार्टी ने बकायदा इसके लिए ‘श्रीराम सूर्योंदय संध्या आरती समिति’ का गठन किया है. कांग्रेसी कार्यकर्ता मंदिरों में जाकर सुबह-शाम आरती करेंगे. खासकर उन मंदिरों में जहां भक्तों की संख्या अपेक्षाकृत कम होती है.

मंगलावर को गुजरात के साबरकांठा जिले में रैली में नवनिर्वाचित विपक्षी नेता और कांग्रेस विधायक परेश धानानी ने कहा कि बीजेपी सिर्फ भगवान राम के नाम पर राजनीति करती है. वो नकली हिंदुत्व की प्रथा को आगे बढ़ाती है. उन्होंने कहा कि गैरसरकारी संगठन के तहत गांवों के राम मंदिरों को पुनर्जीवित करने की पहल कर रहे हैं. इसके तहत गांव के राम मंदिरों में आरती करेंगे. आरती के लिए पूजा किट का भी वितरण करेंगे.पूजा में इस्तेमाल होने वाले शंख, झालर और नगाड़ा समेत अन्य चीजें इस किट में हैं. कांग्रेस नेता का मानना है कि इसके जरिए हिंदू धर्म की परंपरा के साथ भक्ति भी भावना को बनाए रखने की है.

कांग्रेस की सॉफ्ट हिंदुत्व की राह बीजेपी के उस साजिश को तोड़ने के लिए अच्छा कदम है, जिसके तहत पिछले कुछ सालों में कांग्रेस को हिंदू विरोधी पार्टी बताने की कोशिश की गई. इसीलिए कांग्रेस इसी रणनीति को लेकर इस साल होने वाले कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित बाकी राज्यों में आगे बढ़ेगी. राहुल गांधी गुजरात की तर्ज पर इन राज्यों में भी मंदिर-मंदिर जाएंगे.

देश की बदलती सियासी माहौल के देखते हुए बीजेपी ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है. देर से ही सही, लेकिन बीजेपी भी अब मुस्लिमों को रिझाने में जुट गई है. मोदी सरकार तीन तलाक के खिलाफ सख्त कदम उठाकर मुस्लिम महिलाओं को पार्टी से जोड़ने की पहल की है. इसी के चलते हाल ही में तीन तलाक के खिलाफ अपील दायर करने वाली इशरत जहां बीजेपी ज्वाइन कर चुकी हैं. इसके अलावा इस साल 5 हजार हज कोटा को और सरकार बढ़वाने में सफल रही है.

BJP का मुस्लिम सम्मलेन

पश्चिम बंगाल में मुस्लिम मतों की सियासी अहमियत को देखते हुए बीजेपी कोलकाता के मो. अली पार्क में अल्पसंख्यक सम्मेलन कर रही है. पश्चिम बंगाल में करीब 30 फीसदी मुस्लिम आबादी है, जो राजनीतिक तौर पर काफी महत्वपूर्ण है. पश्चिम बंगाल में पैर जमाने की जुगत में जुटी बीजेपी की नजर अब पंचायत चुनावों पर है. राज्य की सत्ता में आने के लिए मुस्लिम वोट जरूरी है, लिहाजा इस समुदाय पर पकड़ बनाने के लिए बीजेपी का अल्पसंख्यक मोर्चा पूरी तरह सक्रीय है. तीन महीने में बीजेपी का दूसरा अल्पसंख्यक सम्मेलन है.

 

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