CM कुमारस्वामी ने बनाया ब्राह्मण डेवलपमेंट कॉरपोरेशन

बेंगलुरु राज्य विधानसभा चुनावों से कुछ महीने पहले जनता दल (सेक्युलर) के संस्थापक एचडी देवगौड़ा और उनकी पत्नी चेनम्मा ने सहस्रचंडिका यज्ञ कराया. 11 दिनों का ये आयोजन चिकमगलूर जिले के 1300 साल पुराने श्रृंगेरी शंकर मठ में किया गया. गौड़ा परिवार की आस्था है कि इस विशेष धार्मिक आयोजन की वजह से ही एचडी कुमारस्वामी दुबारा मुंख्यमंत्री बन सके.

गहरी धार्मिक आस्था वाले मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने अपने पहले ही बजट में घोषणा की कि इस साल राज्य भर में आदि शंकराचार्य की जयंती का आयोजन किया जाएगा. हिंदू जागरण करने वाले शंकराचार्य ने सातवीं शताब्दी में श्रृंगेरी में शारदा पीठ की स्थापना की थी. शंकराचार्य जयंती के आयोजन के अलावा राज्य के तकरीबन 4 फीसदी ब्राह्मणों का दिल जीतने के लिए 25 करोड़ रुपये का ब्राह्मण डेवलपमेंट कॉरपोरेशन बनाने की भी घोषणा कर दी. ये कॉरपोरेशन राज्य में आर्थिक तौर पर कमजोर ब्राह्मणों के हितों की देख-रेख करेगा.

बातचीत करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि उन्होंने चुनावों के दौरान इसका वायदा किया था. मुख्यमंत्री के अनुसार उन्होंने अपने पहले बजट में इसे पूरा किया है. कुमारस्वामी का कहना है, “बहुत से गरीब ब्राह्मण हैं. दुर्भाग्य से हम उन्हें जातिगत आरक्षण नहीं दे सकते. हमारी सरकार सभी जातियों-धर्मों के लोगों के लिए है. इसी कारण से हमने 25 करोड़ का ब्राह्मण डेवलपमेंट कॉरपोरेशन बनाया है.”

उन्होंने सरकार की ओर से किए जा रहे शंकराचार्य जयंती के आयोजन को भी सही ठहराया. मुख्यमंत्री ने कहा कि शंकराचार्य दुनिया के एक बड़े आध्यात्मिक नेता थे. ये उनकी सरकार की खुशकिस्मती है कि उनका सम्मान किया जा रहा है. जातियों को खुश करने के लिए कुमारस्वामी ने 17 जातिगत मठों को 25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं. इनमें दलित और आदिवासियों के मठ भी हैं. चुनावों के कुछ समय पहले उस वक्त के मुख्यमंत्री सिद्धारमैय्या  ने भी ब्राह्मण डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के गठन पर सहमति जता दी थी, लेकिन तब इसका गठन नहीं हो सका.

उस वक्त राज्य कांग्रेस के ताजा अध्यक्ष बनाए गए वरिष्ठ विधायक दिनेश गुंडुराव ने मामले को उठाया था. दिनेश गुंडुराव को कर्नाटक में कांग्रेस का ब्राह्मण चेहरा माना जाता है. जातियों को रिझाने के कुमारस्वामी के इस फैसले पर बीजेपी दुविधा में है. क्योंकि पहले की बीएस येदियुरप्पा की बीजेपी सरकार के दौरान ही जातियों के मठों और मंदिरों के लिए धन की व्यवस्था करने की शुरूआत की गई थी. इसके तहत दर्जनों मठों मंदिरों को 100 करोड़ से ज्यादा राशि दी गई. पड़ोसी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में भी कुछ साल पहले ब्राह्मणों के लिए अलग से कॉरपोरेशन की स्थापना की जा चुकी है.

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