योगी कैबिनेट में फेरबदल की तैयारी

लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने मंत्रिमंडल के हर सदस्य के काम का आंकड़ा तैयार रखते हैं। प्रदेश को विकास की राह पर लाने को कमर कस चुके योगी आदित्यनाथ नॉन परफार्मिंग मंत्री को अपने कैबिनेट से बाहर भी कर सकते हैं। इसके संकेत मिलने लगे हैं।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार करीब नौ महीने के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल की तैयारी में जुटी है, जिसे लेकर मंत्रियों की नींद उड़ी हुई है। इस फेरबदल में कई मंत्रियों की कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह कुछ नए चेहरे शामिल किए सकते हैं। नीति आयोग की अपेक्षा के मुताबिक योगी सरकार ने ब्यूरोक्रेसी को स्मार्ट और जवाबदेह बनाने के लिए एक-दूसरे से जुड़े विभागों क विलय की तैयारी शुरू कर दी है। जाहिर है, विभागों के विलय के बाद अलग-अलग महकमा संभाल रहे मंत्रियों का भी दायित्व बदलेगा।

योगी आदित्यनाथ जल्द ही अपने मंत्रिमंडल में फेरबदल भी कर सकते हैं। इस फेरबदल में उनकी कसौटी पर खरा न उतरने वाले कुछ मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है। इस सुगबुगाहट से कई मंत्रियों की नींद उड़ गई है। लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों को दायित्व सौंपे जाएंगे। इसमें सामाजिक और भौगोलिक संतुलन का भी ध्यान रखा जाएगा।

प्रदेश का विधानसभा का शीत कालीन सत्र 14 दिसंबर से शुरू हो रहा है। 22 दिसंबर तक इसके समाप्त होने की संभावना है। इस बीच गुजरात के विधानसभा चुनाव भी समाप्त हो जाएंगे। चूंकि सरकार और संगठन का सारा ध्यान लोकसभा चुनाव पर है तो ऐसे में अपने कार्य और प्रदर्शन को लेकर सरकार और संगठन दोनों गंभीर हैं। लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों को दायित्व सौंपे जाएंगे। इसमें सामाजिक और भौगोलिक संतुलन का भी ध्यान रखा जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नौ माह की अपनी सरकार में मंत्रियों की कार्यशैली और क्षमता से पूरी तरह परिचित हो चुके हैं। उनकी कसौटी पर कुछ बेहद खरे उतरे तो कई फिसड्डी भी साबित हुए हैं।

नीति आयोग की अपेक्षा के अनुरूप विभागों के विलय होने पर कार्य का स्वरूप भी बदलेगा। प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य से संबंधित सभी विभागों को एक करने का फैसला किया है। इसमें चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सिद्धार्थनाथ सिंह और चिकित्सा शिक्षा विभाग आशुतोष टंडन संभालते हैं। सभी विभाग एक साथ हो जाने पर एक मंत्री को ही दायित्व मिलेगा। ऐसे में किसी एक का समायोजन दूसरे विभाग में होना तय है। यह भी संभव है कि नये सिरे से तय होने वाले विभागों के अनुरूप पहले मंत्रियों को दायित्व सौंप दिया जाए और फिर उनका विलय किया जाए। निकाय चुनाव में अच्छी परफार्मेंस देने वाले मंत्री भाजपा और सीएम योगी आदित्यनाथ की निगाह में हैं। मूल्यांकन के आधार पर ओहदा घटाया-बढ़ाया जा सकता है।

यह भी कहा जा रहा है कि नौ महीने के कार्यकाल में सीएम ने कई मंत्रियों के कामकाजों को भी परख लिया है। इसमें कई मंत्री फिसड्डी साबित हुए हैं, जिनकी छुट्टी तय मानी जा रही है। इसके अलावा कुछ मंत्रियों के दायित्वों में फेरबदल भी हो सकता है। कई मंत्रियों का प्रमोशन तो कुछ नए चेहरे भी शामिल हो सकते हैं।

मोदी और शाह तक शिकायत

कुछ मंत्रियों की शिकायत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह तक पहुंची है। कई सांसदों ने मंत्रियों की शिकायत दर्ज कराई जबकि कुछ विधायक भी असंतुष्ट हैं। अमित शाह ने तो जुलाई माह के दौरे में 12-12 विधायकों का ग्रुप बनाकर मंत्रियों को उनकी कमान दी गई थी।

मकसद विधायकों का असंतोष दूर करना और विकास को गति देना था लेकिन, इस कार्य में भी कई मंत्रियों ने रुचि नहीं ली। मंत्रिमंडल के फेरबदल में इसका भी प्रभाव पडऩा तय है।

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