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REAL HERO

ऑफिस हेल्पर ने बना ली 3 करोड़ की कंपनी

मुत्तुकुमार ने चेन्नई में प्रिंटिंग प्रेस में प्रिंटिंग की सारी बारीकियां सीख ली थीं। जिसके बाद उन्होंने अपनी बहन के घर पर स्क्रीन प्रिंटिंग का काम भी शुरू कर दिया। वे बताते हैं कि उनकके पास उस वक्त सिर्फ 1,000 रुपये थे। मुत्तु सिर्फ सफलता के बारे में नहीं सोचते बल्कि वे पर्यावरण प्रेमी भी हैं। इसी वजह से वे ...

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केले के तने से बिजली बनाने वाला गरीब लड़का

11वीं क्लास में जिस छात्र को कई स्कूलों ने सिर्फ इसलिए दाखिला देने से इनकार कर दिया था क्योंकि उसका रूझान पढ़ाई की जगह रिसर्च पर था, आज उसी छात्र की गई रिसर्च को हासिल करने के लिए कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियों में घमासान छिड़ा हुआ है। उसके पिता छोटे से किसान हैं जो केले की फसल उगाते हैं, लेकिन उस ...

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गांव के टाट-पट्टी वाले स्कूल में पढ़ने वाली IAS सुरभि गौतम

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यूनिवर्सिटी टॉपर और गोल्ड मेडलिस्ट सतना की सुरभि गौतम को 2016 के सीविल सर्विसिज़ एग्ज़ाम में 50वीं रैंक हासिल हुई थी। इनकी 12वीं तक की पढ़ाई गांव के हिंदी मीडियम स्कूल से हुई। सुरभि उन लोगों के लिए एक करारा जवाब हैं, जिन्हें या तो अपने हिंदी होने पर शर्म आती है या फिर जो हिंदी को बहुत गया गुज़रा ...

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देह व्यापार से बचाकर उस सदमें से उबारने की कोशिश ‘पूर्णता’

किसी इंसान की पहचान उसके काम से होती है, लेकिन किसी का काम उसकी पहचान के लिये खतरा बन जाये और वो उसे छोड़कर नई जिंदगी शुरू करना चाहे तो ये आसान नहीं होता। मुंबई (Mumbai) में रहने वाले आबू वर्गीस (Aaboo Verghese) ऐसे लोगों की मदद कर रहे हैं जो देह व्यापार जैसे कलंकित पेशे में हैं और वो ...

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नौकरी छोड़ स्लम के बच्चों को बना रही हैं काबिल

अमेरिकी दार्शनिक जॉन डेव के मुताबिक शिक्षा जीवन की तैयारी नहीं, बल्कि शिक्षा ही जीवन है। यही वजह थी कि मुंबई (Mumbai) में रहने वाली अफसाना परवीन (Afsana Parveen) ने अपनी नौकरी छोड़ ऐसे बच्चों को शिक्षित करना शुरू किया जो पढ़ना चाहते थे। उन्होने महसूस किया कि ज्यादातर अपराधों में ऐसे लोग शामिल होते हैं जो कम पढ़े लिखे ...

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उत्तराखंड के इस कवि की कविताओं से रंगीं जेल की दीवारें

श्रीमन’ ऐसे यशस्वी कवि और स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं, जिनके मातृगांव पर अंग्रेजों ही नहीं, राजशाही ने भी सबसे ज्यादा जुल्म ढाया था। उनका जन्म 17 जुलाई 1919 को टिहरी गढ़वाल में पट्टी सकलाना के गांव उनियाल में हुआ था।  वह छात्र जीवन से ही कविताएं लिखने लगे थे। उन्हें प्रथमतः सुमित्रा नंदन पंत और डॉ. हरिवंश राय बच्चन से ...

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अंग्रेजी के भूत को भगाने का बीड़ा उठती ये महिला

संध्या ने अक्टूबर 2016 में एक फेसबुक पेज शुरू किया और थोड़ा दिमाग लगाने के बाद इस पेज को स्पीकिंग चाक (बोलते हुए चाक) के नाम से पुकारा जाने लगा। स्पीकिंग चाक का उद्देश्य छात्रों को उपयुक्त बोली जाने वाली अंग्रेजी कौशल के साथ लैस करना था। स्पीकिंग चाक को अपने कार्य को कुशलता से पूरा करने के लिए अधिक ...

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गरीब महिला कैसे बनी मसाले का कारोबार से लखपति ?

लक्ष्मी के घर की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी, ऊपर से जवान बेटे के असमय देहांत के बाद मानों उन पर ग़मों का पहाड़ टूट पड़ा। इसी विपदा की घड़ी से उनकी सफलता की नींव पड़ी। साल 2000 का वक्त था उस वक्त आज के जैसे शॉपिंग के लिए ई-कॉमर्स वेबसाइट नहीं मौजूद थीं। वे मसाले तैयार करके नजदीकी ...

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गरीबी की मार ने इस बिहारी लड़के को बना दिया सफल कारोबारी

हमारी आज की कहानी एक निष्कलंक उदाहरण है कि कैसे कोई बाधाओं पर विजय पाने के लिए क्या कुछ नहीं कर सकता है। यह शख्स एक मिट्टी के घर में 22 लोगों के साथ संघर्ष करता था। मगर उसने कभी भी अपनी परिकल्पना को सीमित नहीं किया। औरंगाबाद, बिहार के अनुप राज ने एक बहुत ही प्रशंसनीय स्टार्ट-अप पी.एस. टेक ...

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भष्टाचार के खिलाफ बुलंद आवाज उठाने वाला IFS ऑफिसर

हमारे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज ऊठाना एक दुष्कर कार्य है। एक सामान्य अवधारणा है कि व्यवस्था में परिवर्तन लाने के लिए व्यवस्था का हिस्सा बनना पड़ेगा। परंतु अब इस कथन की चमक खोने लगी है। बाहूलसंख्य को कोई अकेला या मुठ्ठी भर लोग नियंत्रित नहीं कर सकते हैं। यह बदलाव अपने अन्दर में जगानी होगी, यह लहर पूरे ...

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