OPINION

समाज में महिलाओं के लिए प्रेम सामाजिक बोझ है?

किशोरावस्था और युवावस्था में प्रेम सार्वभौमिक किंतु समाज द्वारा अनपेक्षित और अस्वीकृत रिश्ता है। समर्पण और निष्ठा जैसे मूल्यों पर आधारित होने के कारण ऐसा अनुमान लगाया जा सकता है कि यहां स्त्री और पुरूष के बीच गैर-बराबरी का स्तर कम होगा। अक्सर प्रेम के इस रिश्ते का निर्माण आपसी समझ और भावनात्मक सहयोग जैसे विशेषणों के आधार पर किया ...

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बाल यौन हिंसा पर चुप्पी, क्योंकि इज्ज़त का सवाल है

हमारी संस्कृति एवं धर्म के रुढ़िवादी विचारों के कारण बच्चों के मानवीय अधिकारों का उल्लंघन होता है। इसका पता तक समाज को नहीं चलता है। हमने जो धारणाये बना रखी है कि घर के सदस्यों के साथ बच्चे सुरक्षित हैं, परन्तु अधिकतर बाल यौन हिंसा परिचित व्यक्ति के द्वारा ही की जाती है। रुढ़िवादी समाज में बच्चों के बाल यौन ...

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बैंकों में फ्रॉड के बाद फ्रॉड की लम्बी लाइन

इन दिनों कुछ ही समय के अंतराल के दौरान एक के बाद एक सामने आने वाले अरबों रुपयों के बैंक घोटालों से देश के अर्थ जगत में भूचाल सा आया हुआ है जिससे बैंकों की विश्वसनीयता पर प्रश्रचिन्ह लग गया है। सबसे पहले पंजाब नैशनल बैंक का 11,400 करोड़ रुपए का ऋण घोटाला सामने आया जो कुछ बैंकरों तथा सरकारी ...

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भारी मुनाफे का धंधा हुआ जैविक मछली पालन

सामान्य ढंग से मछली पालन की तुलना में जैविक मछली का उत्पादन शुरू में कम होता है लेकिन लम्बी अवधि के लिए यह बहुत ही उपयुक्त है। इसमें कम जोखिम है। भारत चीन के बाद सी फूड का सबसे बड़ा निर्यातक है।  मत्स्य पालन पूरी दुनिया में एक वृहत्तर उद्योग का रूप ले चुका है। मछली उत्‍पादन के क्षेत्र में ...

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नीरव मोदी के पतन की वजह नीलम ?

कल तक नीरव मोदी और मेहुल चोक्सी हीरे का पर्याय हुआ करते थे, आज उन्ही हीरों ने उन्हें और उनकी आसमान सी इज़्ज़त को कोयला बना दिया। ऐश्वर्य और समृद्धि का प्रतीक रत्न हीरा एक पारदर्शी रत्न है। रासायनिक रूप से समझें तो नाज़ुक दिल को लूटने वाला हीरा, सबसे कठोर प्राकृतिक पदार्थ है, जो कार्बन का शुद्धतम रूप है। ...

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घाटे की खेती या खेती में घटा !

आज भारत खाद्यान्न, फल, सब्जियां और दुग्ध उत्पादन में दुनिया के शीर्ष तीन देशों में है फिर भी अन्नदाता संकट में क्यों है? आखिर क्या कारण है कि यहां खेती-बाड़ी की दशा साल-दर-साल बिगड़ती जा रही है। दरअसल, आज कृषि और किसान पर जो संकट आ पड़ा है उसके दो मुख्य कारण हैं। पहला, किसान को लागत के हिसाब से ...

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अमरीका में बढ़ रहा है संयुक्त परिवारों का रुझान

कुछ सप्ताह पूर्व एक रविवार की शाम शोभना राम अपनी रसोई में जूठे बर्तन डिशवाशर में डाल रही थी। तभी अचानक उसका 85 वर्षीय ससुर डिनर टेबल से उठा और एक हाथ में छड़ी और दूसरे में खाली प्लेट लेकर उसकी ओर चल पड़ा। अचानक आंख के कोने में से उसे महसूस हुआ कि वह लडख़ड़ा गया है और संतुलन ...

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आजादी के बाद हमने क्या खोया- क्या पाया का सवाल ?

कभी-कभी जब हम सोचते हैं कि आजादी के बाद हमने क्या खोया और क्या पाया तो बहुत हताशा होती है। ‘आॅक्सफेम’ की विषमता पर आई रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में आजादी के समय अमीर और गरीब में जो फासला था वह आज के मुकाबले काफी कम था। इसका सीधा और साफ मतलब यह निकलता है कि हमने ...

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58 % भारत की सम्पति पर अरबपतियों का कब्ज़ा

‘न्यू वर्ल्ड वेल्थ’ की रपट के मुताबिक आम लोगों की कुल संपदा के मामले में भारत दुनिया भर में छठा सबसे अमीर देश बन गया है। इसके अनुसार भारतवासियों की कुल संपदा 526 लाख करोड़ हो गई है (इसमें सार्वजनिक संपत्ति शामिल नहीं है) और 2017 में इसमें पच्चीस प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह एक अधूरा और काला सच ...

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अपराध मुक्त भारत अभियान कब ?

हाल ही में जारी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की रिपोर्ट से देश में अपराधों के चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इसके अनुसार, पिछले साल के मुकाबले इस साल देश में कुल अपराधों में दस फीसद की बढ़ोतरी हुई है और राजधानी दिल्ली अपराधियों के लिए सबसे उपयुक्त जगह साबित हो रही है, जहां देश में हुए कुल अपराधों के ...

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