OPINION

आखिर अपने पहाड़ी ही क्यों हो रहे अपनों के विरोधी !

पहाड़ के लोगों के लिये ये कहावत पता नहीं कब और कैसे चर्चा में आ गयी और धीरे धीरे पर्वतीय समाज का अकाट्य तथ्य बन चुकी है कि ये लोग एक गहरे बर्तन में कैद उन केकड़ों की तरह हैं जिन्हें भरोसे के साथ बिना ढक्कन लगाये कैद रखा जा सकता है। वजह है केकड़ों की वो मानसिकता जिसके चलते ...

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किसानो की बदहाली का जिम्मेदार कौन ?

(मोहन भुलानी, न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया) हमारी सरकार यदि सोशल अॉन्त्रोप्रेन्योर को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दे, तो हमारी आज की युवा पीढ़ी ग्रामीण इलाकों के किसानों के लिए और गाँवों के लिए एक नई उम्मीद बन सकती हैं। आज सरकार कृषि क्षेत्र में जो भी प्रयास कर रही है वही विफल हो रहा है। यदि सरकार युवाओं को किसानों ...

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नशे की गिरफ्त में उजड़ रहा संपन्न पंजाब

जो प्रदेश कभी अपने लहलहाते खेतों और सरहदों की रखवाली करने वालों के लिए जाना जाता था, अब बुरी तरह नशे की गिरफ्त में है और वहां की सरकार को इससे दो-दो हाथ करने के लिए कड़े उपाय करने पड़ रहे हैं। बात पाकिस्तान से सटे और अनाज से लेकर हर मामले में धनी कहलाने वाले राज्य पंजाब की हो ...

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एक ट्वीट ने मानव तस्करी से बचाई 26 मासूम लड़कियां

गोरखपुर में जीआरपी और आरपीएफ ने एक ट्रेन से 26 नाबालिग लड़कियों को रेस्क्यू किया है. ये लड़कियां मुजफ्फरपुर-बांद्रा अवध एक्सप्रेस से नरकटियागंज से ईदगाह जा रहीं थीं. इनके साथ 22 साल और 55 साल के दो पुरुष थे. पुलिस मामले की जांच कर रही है और लड़कियों के पैरेंट्स को सूचना दी गई है. 10 से 14 साल की ...

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IDBI-LIC के घालमेल से बड़ी आपदा आने की आशंका

भारत के बीमा क्षेत्र के नियामक, आईआरडीएआई ने एलआईसी को आईडीआईबी बैंक के 51% शेयरों को खरीदने के लिए मंजूरी दे दी हैI यह पहला सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है जिसे सरकार के प्रत्यक्ष नियंत्रण से बाहर निकाल दिया गया है| ये अन्य बैंको के लिए भी मंच को स्थापित कर रहा है। अभी एलआईसी का आईडीबीआई बैंक के शेयरों में 11% ...

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GST ने किया छोटे व्यापारियों को बर्बाद

1 जुलाई 2018 को वस्तु तथा सेवा कर यानी जीएसटी के लागू हुए एक साल पूरा हो गया। मोदी सरकार ने इसे अप्रत्यक्ष कर के गड़बड़ी को समाप्त करने के लिए पेश किया था जो मौजूदा कर अनुपालन में सुधार के लक्ष्य को बेहतर करने के लिए था। इस एक वर्ष का अनुभव बताता है कि इससे बड़े व्यवसायियों को फायदा हुआ, जबकि ...

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मुख्यमंत्री जनता दरबार में “अहंकार” के साथ “तिरस्कार” काण्ड

सरकार और जनता के बीच संवाद का एक कुदृश्य इस समय पूरे देश में सनसनी फैला रहा है. कोशिश पूरी हुई कि यह नज़ारा किसी तरह जनता के बीच पहुंच न पाए, लेकिन ज़माना सोशल मीडिया का है. उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के उस ‘जनता दरबार’ में सरकार से एक नागरिक की फरियाद करने के दौरान हुई ‘तू-तू मैं-मैं’ का नज़ारा कैमरों में कैद हो चुका ...

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संजू’ बनी राजू हिरानी की सबसे कमज़ोर फ़िल्म है…

संजू’ फिल्म का खलनायक कौन है…? राजू हिरानी के मुताबिक वह प्रेस, जो सूत्रों के मुताबिक या प्रश्नवाचक चिह्न लगाकर अफ़वाहों को ख़बरों की तरह पेश करता है. मीडिया से इस शिकायत को फिल्म में इतनी अहमियत दी गई है कि फिल्म का अंत बाकायदा एक गाने से होता है, जिसमें मीडिया का मज़ाक बनाया गया है. यह सच है कि मीडिया कई बार ...

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उत्तरा प्रकरण और सोशल मीडिया का प्रभाव

(दिनेश जुयाल, पूर्व संपादक दैनिक हिंदुस्तान एवं अमर उजाला ) जब सरकार आलोचना से परे नहीं तो अखबारों की समालोचना क्यों नहीं होनी चाहिए?  उत्तरा प्रकरण पर अपनी टिप्पणी के साथ मैंने अखबारों की भूमिका पर भी छोटी सी टिप्पणी कर दी थी। लानत तो खुद को भेजी थी। कुछ पुराने साथी नाराज है और होना ही चाहिए , नहीं ...

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राम मंदिर को लेकर BJP-RSS में पक रही है खिचड़ी

क्या अयोध्या में राम मंदिर को लेकर बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शीर्ष स्तर पर कोई खिचड़ी पक रही है? या फिर सिर्फ चुनाव नजदीक देख कर एक बार फिर बयानों की गर्मी दिख रही है? वैसे तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है और बीजेपी कहती आई है कि वो राम मंदिर बनाने के पक्ष में है, लेकिन ...

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