OPINION

दिल्ली में क्यों “मल” खा रहा किसान – धिक्कार है

(मोहन भुलानी ) मैं किसान हूं। पेशाब पीना मेरे लिए खराब बात नहीं है। जहर पीने से बेहतर है पेशाब पीना। जहर पी लिया तो मेरे साथ मेरा पूरा परिवार मरेगा पर पेशाब पीने से केवल आपकी संवेदनाएं मरेंगी, मेरा परिवार शायद बच जाए। कई बार लगता है आपकी संवेदनाएं मेरे लिए बहुत पहले ही मर गईं थी लेकिन कई ...

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सत्ता संभालने के तीन साल बाद कहां है सबका विकास ?

(सुबीर रॉय) आम तौर पर यह माना जाता है कि वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार बनने में ‘सबका विकास’ का नारा अहम रहा। प्रश्न यह है कि इस मोर्चे पर राजग सरकार का प्रदर्शन कैसा रहा है? यह सवाल अहम है क्योंकि भाजपानीत केंद्र सरकार के पांच साल के कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे होने ...

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प्रशांत किशोर ने कांग्रेस की नाक क्यों कटाई ?

रणनीति और राजनीति पर्यायवाची शब्द नहीं हैं. इन दोनों में जमीन और आसमान का फर्क है. चाहे वो राजनीति का सबसे बड़ा धुरंधर ही क्यों न हो, जब भी किसी ने रणनीति को राजनीति समझने की गलती की, वो चौपट हो गया. अगर चुनाव सिर्फ रणनीति के सहारे जीते जा सकते, तो पूरी दुनिया में राजनीति शास्त्र के पंडितों व ...

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VIP गाड़ियों से लाल ‘बत्ती गुल’ होने की पूरी कहानी

अगर आप लाल बत्ती लगाए और हूटर बजाते हुए नेताओं की गाड़ियों से परेशान हैं जो सड़क पर दनदनाती हुई गुजरती हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा कदम उठाया है जिससे देश में वीवीआईपी कल्चर ही खत्म हो जाएगा. एक मई से आपको पूरे देश भर में किसी भी गाड़ी के ऊपर कोई ...

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आदिवासियों को कब शामिल करेंगे न्यू इंडिया में?

भारतीय समाजशास्त्री भली भांति यह जानते हैं कि भारत मे हजारों वर्ष पूर्व आदिवासी समुदाय ने ही जंगल, पहाड़ एवं पहाड़ की कन्दराओं और गुफाओं मे आश्रय लेने के उपरांत जंगलों को साफ कर खेती करना सीखा, बनैले पशुओं को पालतू बनाया और एक स्थायी सामाजिक जीवन की शुरुवात की। प्रथम भारतीय ग्रामीण सभ्यता की नींव डालने वाले आदिवासी समुदाय ...

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सावधान ये सोशल मीडिया बना रहा एंटी-सोशल ..

आज सोशल मीडिया मे कोई भी बात कुछ ही घंटों मे वायरल हो जाती है, फिर चाहे सच हो या अफवाह। एक तरफ सोशल मीडिया के हजारों फायदे हैं, तो दूसरी तरफ हज़ारों नुकसान। जहां उभरते हुये साहित्यकार, कलाकार आदि इसका भरपूर फायदा उठा कर अपनी रचनाओं को पाठकों तक पहुंचा रहे हैं और नाम व पैसे दोनों कमा रहे ...

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कर्जमाफी के साथ बुनियादी समस्याओं का हल भी ज़रूरी

पिछले दिनों तमिलनाडु से दिल्ली आये 170  सूखा पीड़ित किसानो ने जंतर-मंतर पर उनके आत्महत्या कर चुके किसान साथियो के नर कंकालों के साथ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। मुद्दा था प्रति एकड़ मिलने वाली सूखा राहत की राशि का अपर्याप्त होना। वहीं नव निर्वाचित उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अपने चुनाव घोषणा पत्र के तहत प्रदेश के किसानों के लिए ...

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कड़क फैसलों से भरा रहा योगी सरकार का पहला महीना

तमाम आदेशों, निर्देशों, घटनाक्रम से भरा एक महीना कई मायने में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जहां कड़क छवि को सामने लाता है, वहीं अफसरशाही के लिए एक सबक भी है। उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद कुछ ही दिनों में अवैध बूचडख़ानों पर लगाम लगाने, किसानों की कर्जमाफी, समूह तीन व चार की नौकरियों में साक्षात्कार खत्म करने, लड़कियों ...

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उधार के सर्वरों से कैसे हो ‘डिजिटल इंडिया’ की क्रांति?

‘डिजिटल इंडिया’’- कंप्यूटर, मोबाइल, सॉफ्टवेयर तथा इंटरनेट के बहुआयामी प्रयोग से समाज, शासन तथा अर्थव्यवस्था में विकास के अभियान का नाम है. देश में कई इलाकों में मोबाइल नेटवर्क एवं इंटरनेट से वंचित वर्ग को डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना मुश्किल है परन्तु डिजिटल इंडिया को स्वदेशी बनाकर इसे सफल बनाया जा सकता है. ‘इंडियन डाटा भारतीय सर्वर्स’ अभियान से बढ़ाएं ...

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हिन्दुओ के देश में “गाय माता” के खाने के लिए “प्लास्टिक “और कूड़ा है न !

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार ने आते ही गायों की रक्षा के लिए क़दम उठाया। सारे अवैध बूचड़खानों को बंद करने का आदेश आ गया। जैसे-जैसे बूचड़खाने बंद होते गए, मुझे नोटबंदी के दिन याद आने लगे। प्रधानमंत्री मोदी ने 8 नवंबर 2016 की रात देशवासियों से आह्वान किया था, कि नकली करेंसी को ख़त्म करने के लिए ...

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