OPINION

हैवानियत की घटनाओं के बाद ही बदलेगा समाज?

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(दीपा धामी ) सवाल ये है कि क्या समाज में बदलाव के लिए किसी लड़की के साथ हैवानियत होना जरूरी है? क्या ऐसी वारदातों के बाद ही हम महिलाओं के अधिकारों और उनकी सुरक्षा के प्रति जागरूक होंगे? आखिर हमारी न्यायिक व्यवस्था, उस बलात्कार के बारे में कब जागेगी, जो घरों के भीतर होते आए हैं? आईपीसी की धारा 375, ...

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जमीन जनता की “कब्ज़ा” सरकार का क्यों ?

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(अनिल गर्ग सामाजिक-कार्यकर्ता ) 2006 में लागू वन अधिकार क़ानून कहता है कि जो ज़मीनें आज़ादी के पहले सामुदायिक अधिकारों के लिए थीं, वो यथावत बनी रहेंगी. लेकिन मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 90 लाख हेक्टेयर ऐसी ज़मीनों पर सरकार का क़ब्ज़ा है. सन 1950 में संविधान लागू होने के बाद इस देश में पहला सबसे क्रांतिकारी क़ानून मालगुजार, ज़मींदार, ...

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येे मोदी की जीत से ज़्यादा अरविंद की हार

(सुशील बहुगुणा) भीड़ अगर किसी को पीट रही हो तो कभी उस भीड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहिए. क्योंकि भीड़ में मार पिटाई करने वाले अधिकतर लोग बिना किसी तर्क और जानकारी के हाथ पैर चला रहे होते हैं और पिटने वाला भी अपने गुनाह से ज़्यादा और कई बार बेवजह पिट जाता है. मैं दिल्ली के निगम चुनावों की ...

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हिन्दी इंग्लिश की तरह सेक्सी नहीं

-श्रद्धा शर्मा जैसे-जैसे इंसान की भाषा बदलती है, वैसे-वैसे उसकी इच्छाएं, ज़रूरतें और ज़िंदगी को देखने-सोचने-समझने का नज़रिया भी बदलता है। मैं भी कहीं बदल न जाऊं, इसलिए मैंने अपनी भाषा को कभी खुद से दूर नहीं होने दिया। कहते हैं न अपनी मिट्टी और अपनी भाषा कभी दिल से नहीं जुदा होते, तो मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही ...

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इस गांव में जिंदगियां निगल रही खदानों की धूल

उत्तरी गोवा के धूलभरे खनन क्षेत्र सोंशी गांव के निवासी 10 वर्षीय वासुदेव गावड़े की वार्षिक परीक्षाएं करीब हैं, लेकिन पढ़ाई या परीक्षाओं की तैयारी का ख्याल तक उसके दिलों-दिमाग से कोसों दूर है। गावड़े जैसे और भी कई नाबालिग अपने माता-पिता के कैद से छूटने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जिन्हें गांव में ट्रकों के जरिए लौह ...

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Bullet ट्रेन से ज़्यादा ज़रूरत है Safe ट्रेन की

(नीरज त्यागी ) 15 अप्रैल को हुआ राज्यरानी एक्सप्रेस का रेल हादसा इस साल की तीसरा बड़ा रेल हादसा है। इससे पहले महाकौशल एक्सप्रेस और भुवनेश्वर एक्सप्रेस के रेल हादसे भी पिछले महीनो में हुए। वहीं राज्य सभा में एक प्रश्न के जवाब में जानकरी सामने आई, जिसमे कहा गया की 1 अप्रैल 2016 से 28  फ़रवरी 2017 तक कुल ...

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दिल्ली में क्यों “मल” खा रहा किसान – धिक्कार है

(मोहन भुलानी ) मैं किसान हूं। पेशाब पीना मेरे लिए खराब बात नहीं है। जहर पीने से बेहतर है पेशाब पीना। जहर पी लिया तो मेरे साथ मेरा पूरा परिवार मरेगा पर पेशाब पीने से केवल आपकी संवेदनाएं मरेंगी, मेरा परिवार शायद बच जाए। कई बार लगता है आपकी संवेदनाएं मेरे लिए बहुत पहले ही मर गईं थी लेकिन कई ...

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सत्ता संभालने के तीन साल बाद कहां है सबका विकास ?

(सुबीर रॉय) आम तौर पर यह माना जाता है कि वर्ष 2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार बनने में ‘सबका विकास’ का नारा अहम रहा। प्रश्न यह है कि इस मोर्चे पर राजग सरकार का प्रदर्शन कैसा रहा है? यह सवाल अहम है क्योंकि भाजपानीत केंद्र सरकार के पांच साल के कार्यकाल के तीन वर्ष पूरे होने ...

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प्रशांत किशोर ने कांग्रेस की नाक क्यों कटाई ?

रणनीति और राजनीति पर्यायवाची शब्द नहीं हैं. इन दोनों में जमीन और आसमान का फर्क है. चाहे वो राजनीति का सबसे बड़ा धुरंधर ही क्यों न हो, जब भी किसी ने रणनीति को राजनीति समझने की गलती की, वो चौपट हो गया. अगर चुनाव सिर्फ रणनीति के सहारे जीते जा सकते, तो पूरी दुनिया में राजनीति शास्त्र के पंडितों व ...

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VIP गाड़ियों से लाल ‘बत्ती गुल’ होने की पूरी कहानी

अगर आप लाल बत्ती लगाए और हूटर बजाते हुए नेताओं की गाड़ियों से परेशान हैं जो सड़क पर दनदनाती हुई गुजरती हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा कदम उठाया है जिससे देश में वीवीआईपी कल्चर ही खत्म हो जाएगा. एक मई से आपको पूरे देश भर में किसी भी गाड़ी के ऊपर कोई ...

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