OPINION

वो जो गरीबी में जीते हैं और गुमनामी में मर जाते हैं

(प्रातिभ मिश्रा) (नोएडा की महागुन सोसायटी में हुई घटना हमारे समाज की एक ऐसी तस्वीर दर्शाती है, जिससे पता चलता है कि हम सब में बर्दाश्त करने की क्षमता ख़त्म होती जा रही है। ये घटना इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि शोषित और वंचित वर्ग के साथ अत्याचार और भीड़तंत्र हमारे देश में धीरे-धीरे स्थापित हो रहा है।) ...

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बिहार: सत्ता की प्यास और सिद्धांतों की लाश!

भूपेश पंत देश की सियासत के मौजूदा दौर में बिहार का ताज़ा राजनीतिक उलटफेर अप्रत्याशित नहीं लेकिन जेडीयू नेता और सीएम नीतीश कुमार ने सत्ता की चाह में जो राह पकड़ी है उसकी उम्मीद कई राजनीतिक विश्लेषकों ने नहीं की थी. भ्रष्टाचार के खिलाफ़ सिद्धांतों से समझौता ना करते हुए नीतीश कुमार ने जिस तरह अपने कई मूल्यों, विरोधों और ...

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देश में क्यों बढ़ रही है नफ़रत!

भूपेश पंत देश में विभिन्न समुदायों के बीच नफ़रत का ग्राफ पिछले तीन सालों से लगातार बढ़ रहा है. 2014 से अब तक नफ़रत से होने वाले अपराधों में 41 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी है. तीन सौ गुना बढ़ोत्तरी के साथ यूपी पहले नंबर पर है जबकि उत्तराखंड जैसे शांत प्रदेश में भी ऐसे मामले कई गुना बढ़े हैं. ...

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जन ‘आक्रोश’ से बनेगी ‘साख’

भूपेश पंत पिछले विधानसभा चुनावों में राज्य की सियासत के तहखाने में धकेल दी गयी यूकेडी के सभी धड़े अब एकजुट हो कर राज्य में अपनी खोई प्रसन्गिकता की तलाश में जुट गए हैं. इस एकता से उत्साहित यूकेडी नेता पूरे जोरशोर से पार्टी को आन्दोलनों के जरिये पुनर्जीवित करने की रणनीति बना रहे हैं. सत्तारूढ़ रावत सरकार पर हमलावर ...

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खात्मे की ओर मायावती की दलित राजनीति

(मोहन भुलानी, न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया ) बसपा सुप्रीमों और उत्तर प्रदेश में चार बार मुख्यमंत्री रही मायावती को राज्यसभा में न बोलने दिया जाना लोकतंत्र की हत्या करने जैसा है। देश में बीजेपी सरकार एक तरफ तो समतामूलक समाज की स्थापना की बात करती है वहीं दूसरी तरफ वह उसी वर्ग से आए नेताओं को बोलने की अनुमति नहीं ...

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‘इंदु सरकार’ पर सियासी तकरार

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(जय प्रकाश जय ) फिल्में बनती तो राजनीति पर हैं लेकिन उसमें चाशनी तालियां पिटवाने के लिए मिलाई जाती है, न कि देश के राजनीतिक यथार्थ के पीछे खड़े जनद्रोहियों के चेहरे से नकाब खींचने के लिए। शायद इसीलिए राजनीतिक फिल्मों में जो हीरो हिट हो जाते हैं, राजनीति में शामिल होते ही उनकी छवि पिट जाती है। ‘राजनीति’ बनाने ...

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मोक्ष की कामना कर रही मोक्षदायिनी गंगा

सेंट्रल पाॅल्यूशन कन्ट्रोल बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा सफाई पर विभिन्न परियोजनाओं के मद में लगभग 20 हजार करोड़ रुपये पानी की तरह बहाए जा चुके हैं। फिर आज क्या हम इस स्थिति में पहुंचे हैं कि मोक्षदायिनी गंगा को स्वच्छ नदी का दर्ज दे सकते हैं? बिडंबना यह है कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण जैसी संस्था गंगा को स्वच्छ ...

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नींव के पत्थरों पर ‘पत्थरदिल’ सियासत!

भूपेश पंत.   साफ दर्ज है कि पिथौरागढ़ में ही नहीं बल्कि उत्तराखंड की धरती पर गांधी आंदोलन को शुरू करने का श्रेय स्व. प्रयाग दत्त पंत को ही जाता है. उन्होंने इलाहाबाद में बीए की डिग्री स्वर्ण पदक के साथ हासिल की और जनपद का पहला स्नातक होने का गौरव भी हासिल किया… इस लेख की शुरुआत में फिर ...

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चीन पर निगाहें, नेहरु पर निशाना!

  भूपेश पंत जो समाज अपने इतिहास के नायकों का सम्मान नहीं करता उसकी कोख से सिर्फ खलनायक ही जन्म लेते हैं. सोशल मीडिया पर इन दिनों चीन को लेकर एक अलग तरह का आक्रोश देखने को मिल रहा है. दिलचस्प बात ये है कि आभासी दुनिया के देशभक्त रणबांकुरे चीन के मौज़ूदा आक्रामक तेवरों को नेहरु की चीन नीति ...

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उत्तराखंड की परिसम्पतियों में उत्तर प्रदेश की दादागिरी

(सी. एम. ढोंडियाल) परिसंपत्तियों के बंटवारे में उत्तर प्रदेश 75% हिस्सेदारी ले उड़ा जबकि उत्तराखंड के हिस्से मात्र 25 फ़ीसदी परिसंपत्तियां आई है। यहां तक कि हरिद्वार में जहाँ सदियों से कुंभ होता रहा है वह जमीन भी उत्तराखंड नहीं बचा पाया। उत्तराखंड के अधिकारी न तो सही ढंग से अपनी परिसंपत्तियों को हासिल करने के लिए पैरवी कर पाए ...

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