OPINION

नींव के पत्थरों पर ‘पत्थरदिल’ सियासत!

भूपेश पंत.   साफ दर्ज है कि पिथौरागढ़ में ही नहीं बल्कि उत्तराखंड की धरती पर गांधी आंदोलन को शुरू करने का श्रेय स्व. प्रयाग दत्त पंत को ही जाता है. उन्होंने इलाहाबाद में बीए की डिग्री स्वर्ण पदक के साथ हासिल की और जनपद का पहला स्नातक होने का गौरव भी हासिल किया… इस लेख की शुरुआत में फिर ...

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चीन पर निगाहें, नेहरु पर निशाना!

  भूपेश पंत जो समाज अपने इतिहास के नायकों का सम्मान नहीं करता उसकी कोख से सिर्फ खलनायक ही जन्म लेते हैं. सोशल मीडिया पर इन दिनों चीन को लेकर एक अलग तरह का आक्रोश देखने को मिल रहा है. दिलचस्प बात ये है कि आभासी दुनिया के देशभक्त रणबांकुरे चीन के मौज़ूदा आक्रामक तेवरों को नेहरु की चीन नीति ...

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उत्तराखंड की परिसम्पतियों में उत्तर प्रदेश की दादागिरी

(सी. एम. ढोंडियाल) परिसंपत्तियों के बंटवारे में उत्तर प्रदेश 75% हिस्सेदारी ले उड़ा जबकि उत्तराखंड के हिस्से मात्र 25 फ़ीसदी परिसंपत्तियां आई है। यहां तक कि हरिद्वार में जहाँ सदियों से कुंभ होता रहा है वह जमीन भी उत्तराखंड नहीं बचा पाया। उत्तराखंड के अधिकारी न तो सही ढंग से अपनी परिसंपत्तियों को हासिल करने के लिए पैरवी कर पाए ...

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आदि शंकराचार्य का “कौमार्य”

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( सुशोभित शक्तावत) शंकर “ब्रह्मचारी” थे और मात्र 32 वर्ष की आयु में देह त्यागने तक आजीवन ब्रह्मचारी ही रहे। फिर भी, “किम् आश्चर्यम्”, कि अपने जीवन की सबसे कठिन परीक्षा का संधान उन्होंने “यौन अनुभूतियों” पर संवाद के माध्यम से किया था। यह चमत्कार भला कैसे संभव हुआ? अद्भुत कथा है। आदि शंकराचार्य “वेदान्ती” थे। उनके काल में मंडन ...

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इज़रायल, इस्लाम और हम !

1940 के दशक के बीच में अचानक हंगारी, पोलैंड, जर्मनी, ऑस्ट्र‍िया के यहूदियों ने पाया था कि वे एक क़तार में खड़े हैं और क़तार ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। यहूदियों के घरों में “गेस्टापो” के जवान घुस जाते और कहते, “बाहर निकलकर क़तार में खड़े हो जाओ!” सड़क पर चलती बसों को रोक दिया जाता ...

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तालाबों की हत्या का जिम्मेदार कौन ?

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वर्तमान में देश के अधिकांश तालाब खत्म होने की कगार पर हैं। या तो वे सूख चुके हैं या उन पर गगनचुम्बी इमारतें बन गई हैं। तालाबों की हत्या की जा रही है। तालाब चीख रहे हैं, लेकिन उनकी सुनने वाले जिम्मेदार विकास की बेतुकी इबारत पढ़ाने पर आमादा हैं। राजस्व अभिलेखों के अनुसार प्रदेश में 659278 जलाशय दर्ज हैं, ...

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ये कैसा राष्ट्रवाद है !

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(मोहन भुलानी, न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया ) ईद की खरीदारी कर लौट रहे जुनैद की हत्या ने एक बार फिर से हमें सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या धर्म इंसानियत से बड़ा है? इसमें कोई दो राय नहीं है कि विगत वर्षों में कुछ ऐसा माहौल तैयार हुआ है जिसने लोगों के बीच एक खाई बना दी है। ...

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हिमालय और पर्यटन एक दूसरे के पूरक

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हिमालय पर्वत श्रंखला विश्व की सबसे ऊँची पर्वत श्रंखला है.  यह कई पर्वतों से मिलकर बनी एक पूर्ण पर्वतमाला है जैसे – धोलाधर,पीरपंजाल, महाभारत इत्यादि. यह भारत में उत्तर से लेकर उत्तर- पूर्व तक फैली हुई है.  लगभग 7 लाख वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र विस्तृत इस पर्वत माला में कई महत्वपूर्ण वन, वन्य-जीव जंतु, छोटी बड़ी नदियों के उद्गम स्थल, ...

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बुजुर्गो का अकेलापन और हमारा समाज

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(वर्षा ठाकुर) बुढ़ापा—आज नहीं तो कल सबको आना ही है। बेशक वो बुज़ुर्ग क़िस्मतवर हैं जो बुढ़ापे में अपनी औलाद के साथ रह पाते हैं। आज के समाज में तेज़ी से फैलते हुए ‘न्यूक्लियर फैमिली’ कल्चर ने ‘जॉइंट फैमिली’ के काँसेप्ट का जड़ से सफाया कर दिया है। छोटे शहरों में भी अब लोग अलग-अलग, अपनी फैमिलीज़ के साथ रहना ...

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युवा देश – बुजुर्ग सियासत -क्यों ?

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(मोहन भुलानी, न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया) राजनीतिक पार्टियां युवाशक्ति की बात तो अक्सर किया करती हैं, लेकिन युवाओं के हाथों में नेतृत्व सौंपने का सवाल उठता है, तो वे कन्नी काट जाती हैं। खासकर चुनाव के वक्त तो युवा वोटरों के बारे में बहुत-सी बातें कही जाती हैं। लेकिन, चुनाव में टिकट पाने वालों में युवाओं की संख्या गिनती की ...

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