OPINION

गाय के गोबर से बने हैंडमेड पेपर से मुनाफा अर्जित

खादी एवं ग्रामोद्योग उद्योग मिशन की एक यूनिट कुमारप्पा नेशनल हैंडमेड पेपर इंस्टीट्यूट (KNHPI) द्वारा इस पेपर का निर्माण किया गया है। इस हैंडमेड पेपर को गाय के गोबर और चिथड़े कागज को मिलाकर बनाया गया है। जानवरों के गोबर को आमतौर पर ज्यादा उपयोगी नहीं माना जाता। हालांकि इसे खेतों में खाद के तौर पर जरूर इस्तेमाल किया जाता ...

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बंधुआ मज़दूर, जिन्हें कभी छुट्टी ही नहीं मिलती

आज जब मैं ट्रेन से घर जा रहा था तब शौचालय के पास एक व्यक्ति बैठा था जिसकी आंखों में डर साफ दिखाई दे रहा था। उसने मुझसे मोबाइल फोन मांगा कि भाई साहब एक फोन करना है। मैंने मोबाइल निकालकर उसके बताये नंबर पर फोन लगाकर उसे दे दिया पर वो फोन में किसी और भाषा में बात कर ...

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अनूप जलोटा और जसलीन से समाज असहज क्यों हो जाता है?

(राजीव चौधरी ) प्यार को देखने का सबका अपना अलग-अलग नज़रिया होता है, धर्म का अपना अलग नज़रिया है, तो समाज का अलग। खुद के प्रेम में महानता दिखाई देती है तो दूसरे के प्रेम में वासना। इस विषय में प्रसिद्ध कवि कुमार विश्वास की एक कविता की मशहूर पंक्ति भी है, “अभी तक डूबकर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत ...

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SC का सारा फैसला वोटबैंक की राजनीति पर आकर सिमट जाता है!

(आशीष झा ) संसद में एससी-एसटी अधिनियम बिल को उसके पूर्व रूप में लाने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने संविधान संसोधन विधेयक पेश कर दिया है। विपक्षी पार्टियां भी इस विधेयक पर एकमत है, तो उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही यह अपने 1989 वाले पूर्वरूप में आ जाएगी। जिसके अंतर्गत फिर से किसी व्यक्ति पर एससी-एसटी ...

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दोराहे पर खड़ी कश्मीर के यतीमख़ानों की ज़िन्दगी

ये कहानी है कश्मीर के कुछ यतीमख़ानों की जहां ज़िन्दगी के दोराहे पर खड़ी एक पीढ़ी अब जवान हो रही है. इस छत के नीचे रहने वाले हर किरदार की अपनी कहानी है लेकिन असली कश्मकश है उनमें, जिनके अब्बू कभी आतंकवाद के रास्ते पर चले थे और सेना की कार्रवाई में दुनिया छोड़ गए. .इन यतीमख़ानों में हमारी मुलाकात ...

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चुनाव आते ही जातिगत राजनीति हावी

इस साल दिसंबर में होने वाले हिन्दी पट्टी के तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले जातिगत राजनीति सिर चढ़ कर बोलने लगी है. बात हो रही है मध्य प्रदेश के अलग-अलग शहरों में सवर्णों के उस आंदोलन की जिसके विरोध के चलते कई मंत्रियों, सांसदों की घेरेबंदी हो रही है और उन्हें आंदोलनकारियों से बचाने के लिए पीछे के ...

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छोटे से गांव से निकल कर “लल्लनटॉप” बनाने का दिलचस्प सफर

उत्तर-प्रदेश के छोटे से गांव से निकल कर लल्लनटॉप पत्रकार बनने का दिलचस्प सफर जब पत्रकार की बात आती है तो एक झोला लिए हुए कुर्ता पहने आदमी की तस्वीर यकायक मष्तिष्क में उभर कर आ जाती है लेकिन आधुनिकता के दौर में पत्रकारों के काम काज में भी बहुत परिवर्तन आ गया है । सोशल मीडिया के दौर में भ्रामक और अफवाह ...

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क्या काशी बनेगी राजनीति का कुरुक्षेत्र ?

वाराणसी। बनारस की गलियां सियासी अखाड़े में तब्दील होने वाली हैं। काशी के घाट अगले कुछ दिनों तक राजनीति की रणभूमि में तब्दील हो जाएगी। जहां एक तरफ बीजेपी ने अटल जी की तेरहवीं के लिए वाराणसी का हरिशचंद्र घाट चुना है तो वहीं विपक्ष भी मोदी को मोदी के ही गढ़ में घेरने के लिए कमर कस चुका है। समाजवादी ...

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देवभूमि में सत्ता, सरकार और संगठन के सामने चुनौती

देहरादून। मिशन निकाय और 2019 से पहले RSS की छत्रछाया के तले सरकार-संगठन के बीच समन्वय को लेकर गुरुवार को मैराथन मंथन हुआ। इससे एक बात तो साफ है कि उत्तराखंड बीजेपी चुनाव के चक्रव्यूह में कहीं अभिमन्यू की तरह फंस ना जाए, लिहाजा सरकार-संगठन में रूठे हुए योद्धाओं को मनाना जरूरी है। भले ही ये बैठक बीजेपी के लिए आरएसएस के साथ एक रुटीन एक्सरसाइज हो, मगर सरकार और संगठन के बीच समन्वय की ...

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क्या सौगातों के बल पर फिर वापसी करेंगे शिवराज ?

भोपाल। बीजेपी राज्य में एंटी इंकम्बेंसी फैक्टर से साफ इंकार कर रही है, लेकिन शिवराज अपने कई मंत्रियों की खराब परफार्मेंस से परेशान हैं। कई विधायक निष्क्रिय हैं और योजनाओं में भ्रष्टाचार और घोटाले का बोलबाला है। प्रदेश में बेरोज़गार सिर उठा रहे हैं और नेताओं की मनमानी जारी है। यही वो मुद्दे हैं, जो एंटी-इन्कम्बेंसी का माहौल बना रहे हैं। ...

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