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OPINION

गढ़वाली बोली में प्रचार, सोशल मीडिया को कैसे बनाया हथियार

भारत में सौ से ज्यादा भाषाएं हैं, 15 सौ से ज्यादा बोलियां हैं और हर 20 कोस के बाद बोली बदल जाती है। वहीं कुछ ऐसी बोलियां हैं जो धीरे-धीरे दम तोड़ रही हैं। उत्तराखंड  के श्रीनगर इलाके में रहने वाली राखी धनाई  को अपनी गढ़वाली भाषा  से प्रेम था, लेकिन उन्होने अपने आसपास देखा कि लोग इसे बोलना पसंद ...

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देश में दारू की नदियां और दवाओं का अकाल क्यों ?

अपनी जिंदगी से जूझ रहे देश के ऐसे लाखों करोड़ों लोगों के लिए ये सूचनाएं क्या कहती हैं, दवा नकली मिलती है, खुद डॉक्टर्स घटिया दवा लिखते हैं कमीशन की खातिर। स्कूल हॉस्पिटल और खाने पीने का सामान बेचने वाले ही अगर किसी नियम गुणवत्ता के मापदंड पर खरे नहीं हैं तो फिर देश में सरकार क्या है। जब तक ...

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परंपरा के नाम पर वेश्यावृत्ति को मजबूर दिल्ली की ‘बहुएं’

दिल्ली! भागती-दौड़ती दिल्ली! विकास की रोशनी में चमचमाती दिल्ली! लाखों लोगों के सपनों को अपनी आंखों में जिंदा रखे दिल्ली! औरतों, मर्दो सबके बराबकी के हक की आवाज बुलंद करती दिल्ली! पैसे और शोहरत के रास्ते खोलती दिल्ली! इस चमक-धमक और दौड़ में दिल्ली का एक इलाका ऐसा भी है जो सदियों पीछे चल रहा है, रेंग रहा है… दिल्ली ...

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किसी को वोट की चिंता, किसी को नोट की चिंता !

(मोहन भुलानी, न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया) किसी को वोट की चिंता, किसी को नोट की। दोनो एक दूसरे में गुंथे हुए। यद्यपि दोनों का आपस में चोली-दामन का संबंध है लेकिन अपना-अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए बाजार की अपनी चिंताएं हैं और सरकार की अपनी चिंताएं। बाजार बेचने में मस्त हैं तो सरकार की चिंताएं कुछ और। आइए, आज ...

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कर्मकांडो के नाम पर महिलाओं को डराने का धंधा

(वन्दना राय, बिहार ) “सारे धार्मिक उत्तरदायित्वों को निभाने का ज़िम्मा स्त्रियों को जो मिला है और सारे अधिकारों को भोगने का हक़ पुरुषों को।” ईश्वर को लेकर इतना डर! अपनी इतनी ऊर्जा, इतना समय और जो कुछ भी कमाते हैं उसका एक बड़ा हिस्सा भगवान के नाम पर होने वाले तमाम कर्मकांडो में खर्च करते हुए मैंने यहां भागलपुर ...

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जो कभी आदर्श थे आज महज़ सरकारी नौकर क्यूं हैं

शिक्षकों के सम्मान में पढ़े जाने वाले कसीदे, शिक्षकों का अभिनंदन और ‘गुरूर बह्मा-गुरूर विष्णु’ कहने की रस्म अदायगी, शिक्षक दिवस का पर्याय बन चुकी है। ऐसे समय में जब सशक्त भारत के लिए राज्य (state) अपनी जिम्मेदारियों को निगरानी और नियंत्रण के तरीकों के साथ निभाना चाहता है, शिक्षकों की पेशेवर स्थिति के सामाजिक-राजनीतिक मूल्यांकन की ज़रूरत है। आधुनिक ...

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नदी जोड़ो मेगा प्रोजेक्ट : जल आपदाओं से मुक्ति

मोदी सरकार का मानना है कि बाढ़ और सूखे से बचने का टिकाऊ तरीका नदियों को जोड़ना है, इन आपदाओं के साथ ही सिंचाई और बिजली पैदा करने के लिये भी यह परियोजना महत्वाकांक्षी साबित हो सकती है, लेकिन पर्यावरणवादी इसके विरोध में आ गए हैं। वहीं सरकारी अधिकारियों का कहना है कि भरपूर पानी वाली नदियों जैसे गंगा, गोदावरी ...

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उम्र के हिसाब से काम करता है इंसानी दिमाग

शोधकर्ताओं ने अब मान लिया है कि बढ़ती उम्र के साथ हमारा दिमाग भी बदलता रहता है। उसकी संरचना और काम करने के तरीके में बदलाव आते रहते हैं और ये बदलाव बचपन से किशोरावस्था में पहुंचने और जवानी से बुढ़ापे की अवस्था तक आने में होते ही रहते हैं। बीजिंग जियातोंग यूनिवर्सिटी की लिक्जिया टियान, जो कि इस शोध ...

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इंसान ही स्वयं का गुरु बन सकता है

ज्ञान को उसके अंतिम सिरे तक प्राप्त करना ही किसी मनुष्य का मूल उद्देश्य है। अर्थात जब व्यक्ति की तमाम जिज्ञासाओं का अंत हो जाए तब ही माना जाएगा कि उसने चरम ज्ञान को प्राप्त कर लिया है। और इस चरम ज्ञान को प्राप्त कर लेना ही किसी इंसान का मूल धर्म है। हाल के काल में कथित आध्यात्मिक संतों ...

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आखिर किसके भरोसे इंतजार करें कांग्रेसी विधायक!

!!सुरेंद्र किशोर, राजनीतिक विश्लेषक!! हाल में देश के तीन राज्यों में विधानसभा के चार उपचुनाव हुए. इनमें से कांग्रेस को कोई सीट नहीं मिली. हालांकि संतोष की बात यह रही कि कांग्रेस को दिल्ली में इस बार पहले की अपेक्षा अधिक वोट मिले. दिल्ली में आप की विजय हुई. भाजपा दूसरे स्थान पर रही. गोवा की दोनों सीटें भाजपा को ...

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