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OPINION

पुत्र मोह में विपक्ष की सभी राजनीतिक पार्टियां बर्बाद

पहले कांग्रेस, फिर मुलायम सिंह यादव और अब लालू प्रसाद यादव ने अपनी लुटिया पुत्र मोह में डुबो दी. जब लालू प्रसाद को सत्ता की सबसे ज्यादा जरूरत थी, ठीक तभी सत्ता उनके हाथ से निकल गयी.लालू परिवार के विभिन्न ठिकानों पर लगातार छापे पड़ रहे हैं. लालू खुद भी बार-बार कोर्ट के चक्कर काट रहे है. बावजूद इसके लालू ...

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हिन्दू बनाम मुस्लिम क्यों बन जाता है यूनिफॉर्म सिविल कोड?

(मोहन भुलानी, न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया ) भारत देश में अब तक किसी कानून को पारित करने में इतना विवाद नहीं हुआ जितना समान नागरिक संहिता पर हुआ जिसने हिन्दू व मुस्लिम धार्मिक संप्रदाय को सदैव आमने – सामने लाकर खड़ा किया है। समान नागरिक संहिता का नाम आते ही विवाद की स्थिति बनती हैं परन्तु यह मामला विमर्श का ...

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क्या कोर्ट राज्यसभा की तीनों सीटों का चुनाव रद्द कर सकती है?

चुनाव आयोग ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को कैसे बदला- चुनाव आयोग द्वारा 17 जनवरी, 2007 को जारी दिशा-निर्देश के अनुसार मतगणना की वीडियोग्राफी कराई जाती है. दो विधायकों ने अपना वोट डालते वक्त उसे बीजेपी के प्रतिनिधि को दिखाया, जिस वीडियो के आधार पर कांग्रेस ने चुनाव आयोग में अपील की. कानून के शासन की बार-बार बात करने वाली ...

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सोशल’ समाज का अ ‘सोशल’ चेहरा

हम उदासी, अवसाद के नए मुकाम तक पहुंच गए हैं. फेसबुक और इंस्‍टाग्राम पर पोस्‍ट की गई तस्‍वीरों के विश्‍लेषण से पता लगाया जा रहा है कि हम अवसाद में हैं या नहीं. एक अमेरिकी यूनिवर्सिटी के रिसर्चर क्रिस्‍टोफर डेनफोर्थ ने इस तरह के दावे किए हैं. जिसमें रंग के आधार पर तस्‍वीरों को मन: स्‍थि‍त से सीधे जोड़ा जा ...

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युवा वोटर आखिर कांग्रेस से क्यूँ नहीं जुड़ना चाहता ?

(स्वाति चतुर्वेदी) कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ने अपनी प्रतिष्ठा बचा ली है. दिनभर चले सियासी ड्रामे के बाद कल देर रात ढाई बजे चुनाव जीतने के बाद उन्होंने राहत की सांस ली. लेकिन इस दौरान कांग्रेस को भारी मशक्क्त करनी पड़ी. पी चिदंबरम जैसे कांग्रेस के बड़े नेताओं को मोर्चा संभालना पड़ा था. यह ऐसा ...

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सरकारी स्कूलों की दयनीय स्थिति

सरकारी स्कूलों की दयनीय स्थिति जगज़ाहिर है, लेकिन इन स्कूलों में व्यापक स्तर पर सुधार की सरकारें जरूरत नहीं समझ रहीं हैं। पिछले दिनों मानव संसाधन मंत्रालय ने शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए सुझाव दिया कि सभी राज्य सरकारें शिक्षकों को जनगणना, चुनाव और आपदा राहत कार्यों को छोड़कर अन्य किसी भी ड्यूटी पर न लगाएं। इसके अलावा ...

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मोदी जी यदि 2022 ही सबकुछ है तो फिर 2019 क्या है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ में 2022 तक देशवासियों से नए भारत के निर्माण का संकल्प लेने की बात कही। इससे पहले पीएम मोदी 2022 तक हर परिवार को घर देने की बात कह चुके हैं। साथ ही उन्होंने किसानों की आमदनी को 2022 तक दोगुनी करने की बात कही है। अब सबसे बड़ा सवाल यह ...

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वो जो गरीबी में जीते हैं और गुमनामी में मर जाते हैं

(प्रातिभ मिश्रा) (नोएडा की महागुन सोसायटी में हुई घटना हमारे समाज की एक ऐसी तस्वीर दर्शाती है, जिससे पता चलता है कि हम सब में बर्दाश्त करने की क्षमता ख़त्म होती जा रही है। ये घटना इस बात पर भी प्रकाश डालती है कि शोषित और वंचित वर्ग के साथ अत्याचार और भीड़तंत्र हमारे देश में धीरे-धीरे स्थापित हो रहा है।) ...

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बिहार: सत्ता की प्यास और सिद्धांतों की लाश!

भूपेश पंत देश की सियासत के मौजूदा दौर में बिहार का ताज़ा राजनीतिक उलटफेर अप्रत्याशित नहीं लेकिन जेडीयू नेता और सीएम नीतीश कुमार ने सत्ता की चाह में जो राह पकड़ी है उसकी उम्मीद कई राजनीतिक विश्लेषकों ने नहीं की थी. भ्रष्टाचार के खिलाफ़ सिद्धांतों से समझौता ना करते हुए नीतीश कुमार ने जिस तरह अपने कई मूल्यों, विरोधों और ...

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देश में क्यों बढ़ रही है नफ़रत!

भूपेश पंत देश में विभिन्न समुदायों के बीच नफ़रत का ग्राफ पिछले तीन सालों से लगातार बढ़ रहा है. 2014 से अब तक नफ़रत से होने वाले अपराधों में 41 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी है. तीन सौ गुना बढ़ोत्तरी के साथ यूपी पहले नंबर पर है जबकि उत्तराखंड जैसे शांत प्रदेश में भी ऐसे मामले कई गुना बढ़े हैं. ...

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