OPINION

शहरों के नाम बदलने से पहले तस्वीर बदलनी जरुरी

(मोहन भुलानी ) आजकल पता नहीं यह क्या प्रचलित हो गया है कि शहरों के नाम बदले जा रहे हैं? एक-एक करके कई शहरों के नाम बदल दिए गए हैं और कई अन्य नाम बदलने की चर्चा भी जोरों पर है। मेरा मानना है कि बदलना ही है, तो शहर की तस्वीर बदलनी चाहिए। जैसे, वहां की सड़कें दुरुस्त की ...

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पूजा-पाठ में आस्था के साथ स्वच्छता भी जरुरी

(मोहन भुलानी ) हिंदी पट्टी में दुर्गा पूजा के साथ त्योहारों की लंबी शृंखला शुरू हो जाती है। दीपावली, गोवर्धन पूजा, छठ जैसे तमाम त्योहार मनाए जाते हैं। लोग अपनी-अपनी आस्था के साथ इन्हें मनाते हैं। खूब पूजा-पाठ किया जाता है। लेकिन कुछ लोग पूजा-पाठ के दौरान इस्तेमाल किए गए फूल-माला, गोबर से निर्मित चित्र आदि जगह-जगह तीतर-बीतर करके चले ...

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हरिद्वार में क्यों बढ़ा बहरेपन और दिमागी बीमारियों का खतरा ?

धर्मनगरी में बढ़ता शोर (ध्वनि प्रदूषण) बहरेपन और दिमागी बीमारियों का खतरा पैदा कर रहा है। ध्वनि प्रदूषण तय मानकों की सीमा को लांघ गया। इस दीपावली पटाखों के शोर ने इसमें और इजाफा कर दिया। ‘पीक आवर्स’ (सुबह 9 से 11 और शाम 6 से 8 बजे तक) में यह तय मानकों से पांच गुना अधिक तक पहुंच जा ...

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राष्ट्र के निर्माण में हमारी कमजोर मानसिकता

किसी भी राष्ट्र के निर्माण में उस देश के लोगों का अहम योगदान होता है। मुल्क कब और कितना विकास करेगा, यह पूरी तरह से उस देश के नागरिकों पर निर्भर है। जिस देश के नागरिक जितने जागरूक, समझदार, सहनशील, अहिंसावादी और कर्तव्यों के प्रति ईमानदार होते हैं, वह देश उतनी ही तरक्की करता है। मगर हमारे यहां लोगों को ...

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बूढ़ी उम्मीदों का जवान राज्य है उत्तराखंड

(भूपेश पंत) लड़ भिड़ कर पर्वतीय राज्य उत्तराखंड के लोगों ने नौ नवंबर 2000 में अलग राज्य की अपनी मांग मनवा ही ली। इस मांग को लेकर हुए जनांदोलन को चौबीस साल बीत गये और राज्य मिले अठारह साल। यूपी के पर्वतीय इलाके की उपेक्षा और योजनाओं में पहाड़ की अनदेखी के आक्रोश से जन्मा था पृथक पर्वतीय राज्य का ...

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दिल्ली- सिग्नेचर ब्रिज और गुजरात- स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की सौगातें

(मोहन भुलानी. न्यूज़ ट्रस्ट ऑफ़ इंडिया) राजधानी दिल्ली को सिग्नेचर ब्रिज और गुजरात को स्टैच्यू ऑफ यूनिटी जैसी दो बड़ी सौगातें मिली हैं। इनसे देश को कुछ लाभ की आशा है। सिग्नेचर ब्रिज की शुरुआत शीला सरकार ने लगभग चौदह वर्ष पूर्व की थी, जो बहुत बड़ी धनराशि और लंबे समय के बाद अब पूरी हो पाई है, हालांकि जनता ...

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दिवाली पर पटाखे और प्रदूषण अब गैस चैंबर की चिंता

(मोहन भुलानी ) कुछ समय की अपनी खुशी के लिए दूसरों को परेशानी देना या वातावरण को नुकसान पहुंचाना उचित नहीं। इस दिवाली पर पटाखे कम से कम या बिल्कुल न चलाने की आवाजें उठ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसके लिए एक समय-सीमा तय कर दी है। कोर्ट के इस फैसले पर सबके अपने-अपने विचार हैं। मगर यह ...

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स्पीड ब्रेकर से हादसों को न्योता

सुरक्षा की दृष्टि से बनाए गए अनेक स्पीड ब्रेकर दुर्घटना का सबब बन रहे हैं। स्थिति यह है कि छोटी-छोटी गलियों में भी दो से तीन स्पीड ब्रेकर बना दिए जाते हैं। जब गलियां छोटी और तंग हों, तब भला कैसे कोई उसमें तेज गति से गाड़ी चला सकता है? कुछ ऐसी ही हालत बड़ी सड़कों की भी है। वहां ...

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हमें गरीब कुम्हारों का ध्यान ही नहीं रहता

कल दीयों का त्योहार दिवाली है। लोगों में इसे लेकर खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। सभी अपने-अपने घरों की साफ-सफाई और उसे बिजली की सुंदर-सुंदर लड़ियों से सजाने में व्यस्त हैं। मगर हमें यह जरूर जानना चाहिए कि दिवाली का त्योहार मूलत: है क्या? यह बम-पटाखों या लड़ियों का त्योहार नहीं है, बल्कि जब श्रीराम अपना वनवास खत्म ...

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रुद्रप्रयाग की युवती विदेश में रहकर संवार रही पैतृक गांव की तकदीर

गोपेश्‍वर : जर्मनी में जा बसी यह बेटी अपनी माटी को नहीं भूली। विदेशी पर्यटकों को उत्तराखंड के गांवों तक पहुंचा वह उन्हें स्थानीय घरों में ठहराती है ताकि ग्रामीणों की आमदनी हो सके। सीमांत चमोली जिले के पोखरी विकासखंड की पूनम रावत हाने जर्मनी में रहते हुए भी पहाड़ के गांवों की गरीबी दूर करने के लिए यहां लोगों को ...

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