Templates by BIGtheme NET

BJP सरकार की नीतियों से ब्राह्मणों में असंतोष

वाराणसी: देश के ब्राह्णणों ने केंद्र ही नहीं बल्कि भाजपा साशित राज्यों की मुखालफत शुरू कर दी है। उन्होंने इसके लिए देश के सभी ब्राह्मणों का एका का आह्वान किया है। कहा है कि ये नेता ब्राह्मणों को महज वोट बैंक समझते हैं। चुनाव से पूर्व ब्राह्मणहित की बात करने वाले सत्ता पाने के बाद उन्हें भूल जाते हैं। केंद्रीय ब्राह्मण महासभा सम्मेलन के मौके पर ये बातें कही गईं। मुख्य वक्ता विश्व ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष माने राम शर्मा और राम स्वरूप गोस्वामी ने इस मौके पर ब्राह्मण को एकजुट होने का आह्वान किया। महासभा के मंच से इन दोनों पदाधिकारियों ने जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था तत्काल समाप्त करने की मांग की।

शर्मा ने कहा कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से मिल कर उन्होंने देश के ब्राह्मणों की भावना से अवगता करा दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र की साढ़े तीन साल की भाजपा सरकार में गंगा की ब्राह्मणों की ही उपेक्षा नहीं हुई बल्कि मां गंगा के साथ भी अन्याय हुआ। प्रधानमंत्री की मां गंगा को साफ करने की घोषणा के अनुसार अब तक कोई पहल नहीं हुई।

भाजपा शासित राज्यों में ब्राह्मणों की उपेक्षा

महमूरगंज स्थित श्रृंगेरी मठ में आयोजित केंद्रीय ब्राह्मण महासभा और गुलाब कली स्मृति सेवा संस्थान के साझा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता विश्व ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष मानेराम शर्मा ने कहा कि ब्राह्मणों ने किसी को तुच्छ नहीं समझा, किसी का तिरस्कार नहीं किया। फिर भी वे ही उपेक्षित हैं तो इसके पीछे सबसे बड़ा कारण आपस में एका की कमी है और फूट है। उन्होंने कहा कि काशी विद्वानों, संतों की नगरी है। यहीं पंडित मदन मोहन मालवीय ने केंद्रीय ब्राह्मण महासभा की स्थापना की। काशी के स्वामी करपात्री जी ही थे जब 1948 में महात्मा गांधी की हत्या के बाद आरएसएस नेता माधव राव सदाशिव गोलवरकर पर बैन लगाया तो उसका मुखर विरोध किया। आरएसएस पर बैन का विरोध किया।

नतीजा तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू तक को झुकना पड़ा था। करपात्री जी ही थे जिन्होंने हिंदू कोड बिल का विरोध किया। आज आरएसएस का राजनीतिक संगठन बीजेपी केंद्रीय सत्ता पर काबिज है। उम्मदी जगी थी कि ये हिंदुत्व की बात करते हैं, हिंदुस्तान के विकास की बात करते हैं, लेकिन यह दोनों तभी संभव है जब ब्राह्मणत्व की रक्षा हो। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि 2014 में जब यह तय भी नहीं था कि नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे तब मैने इसी काशी में उन्हें वाराणसी से सांसद बनाने की अपील की थी ब्राह्मणों से। वह सिर्फ इसलिए कि उन्होंने गंगा को साफ करने की मंशा जताई थी। लेकिन साढ़े तीन साल में ऐसा कुछ भी नहीं दिखा। उन्होंने कहा कि बीते नौ अक्टूबर को दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से मिले और उन्हें देश के ब्राह्मणों में उपजे असंतोष से आगाह कर दिया।

साथ ही कहा कि इस संदेश को प्रधानमंत्री तक पहुंचा दें। कहा कि देश के भाजपा शासित राज्यों में ब्राह्मणों की सर्वाधिक उपेक्षा की जा रही है। तेलंगाना, पंजाब और आंध्र प्रदेश सरकार ने ब्राह्मण डेवलपमेंट कारपोरेशन का गठन कर दिया। फंड जारी कर दिया लेकिन भाजपा शासित राज्यों में इसके लिए पहल नहीं की गई। कम से कम यूपी में तो बने इस प्रदेश से प्रधानमंत्री हैं। इस कारपोरेशन से ब्राह्मणों का उत्थान होगा। वेदपाठी ब्राह्मणों का
उत्थान होगा। उन्होंने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यहां ऐसे व्यक्ति (स्वामीनाथ मौर्य) को मंत्री बना दिया गया जिसके विधानसभा क्षेत्र में एक दो नहीं पांच-पांच ब्राह्मणों की हत्या कर दी गई।

जाति आधारित आरक्षण खत्म करने की मांग

विश्व ब्राह्मण महासभा के अध्यक्ष ने जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था समाप्त करने की मांग की। कहा इस बाबत भाजपा अध्यक्ष शाह और केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ से भी साफ साफ कह दिया है। मैने सलाह दी है कि इसकी जगह आर्थिक आधार पर आरक्षण नीति लागू की जाए। इससे हर वर्ग के गरीब का लाभ होगा। कहा कि दोनों भाजपा नेताओं से साफ-साफ कहा है कि बीपीएल सूची के आधार पर आरक्षण मिले। इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका भी दायर कर दी गई है। न्यायालय ने इसे संवैधानिक पीठ को संदर्भित कर दिया है। शर्मा ने वाराणसी के मेयर पद के ओबीसी महिला आरक्षण का भी विरोध किया और काशी के ब्राह्मणों को इसका विरोध करने का आह्वान किया। कहा कि ब्राह्मणों में एकजुटता हो जाए तो संसद का मुखड़ा बदल दिया जाएगा। अगर ब्राह्मण अभी नहीं चेता तो आने वाली पीढ़ी खुद को ब्राह्मण कहना भूल जाएगी।

ब्राह्मणों के असम्मान से हिंदुत्व व देश का विकास नहीं

सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता राम स्वरूप गोस्वामी ने कहा कि नेता हमें वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करते हैं। वे चुनाव से पहले तो बहुत बड़ी-बड़ी बात करते हैं लेकिन सत्ता हासिल करने के बाद उससे कतराने लगता है। कहा कि ब्राह्मणों ने किसी को तुच्छ नहीं समझा, किसी का तिरस्कार नहीं किया। फिर भी वे ही उपेक्षित हैं तो इसके पीछे सबसे बड़ा कारण आपस में एका की कमी है और फूट है। कहा कि ब्राह्मणों ने हमेश से कुछ न कुछ दिया ही है। फिर भी हम ही उपेक्षित हैं। गोस्वामी ने कहा कि देश की दुर्दशा ब्राह्मणों की उपेक्षा के चलते है।

संतों का सम्मान, वेदों की रक्षा और देश के विकास के लिए जरूरी है कि ब्राह्मणों का स्मान हो। उन्होने कहा कि केंद्रीय व विश्व ब्राह्मण महासभा ब्राह्मण हित में काम करेगा। इसके लिए संघर्ष करेगा। कहा कि विधायक हों या सांसद वो पांच साल के लिए हैं लेकिन ब्राह्मण सेवक जीवन भर के लिए है। उन्होंने काशी से आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग बुलंद की।

केंद्रीय ब्राह्मण महासभा खेल प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पीपी आनंद मिश्र का सम्मान

इस सम्मलेन को महामंडलेश्वर संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा, काशी हिंदू विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्र ने भी संबोधित किया। सम्मेलन में पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ महेंद्र नाथ पांडेय, प्रदेश के सूचना व खेल राज्य मंत्री डॉ नीलकंठ तिवारी को भी आना था पर वे नहीं आ सके। इस सम्मेलन की अध्यक्षता अन्नपूर्णा मंदिर के महंत रामेश्वरपुरी ने की। केंद्रीय ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश चंद्र मिश्र, महामंत्री चेल्ला सुब्बा राव शास्त्री, वरिष्ठ उपाध्यक्ष कमला कांत उपाध्याय ने विशिष्ठ अतिथियों का अंग वस्त्रम व स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया।

सम्मेलन में तेलंगाना, दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल से आए पदाधिकारियों तथा हाल ही में महासभा से जुड़े लोगों को सम्मानित किया गया। महासभा में पहली बार खेल प्रकोष्ठ का पद सृजित किया गया। इसका अध्यक्ष पूर्व क्रिकेटर पीपी आनंद मिश्र को बनया गया। इस मौके पर मिश्र को भी सम्मानित किया गया।

About News Trust of India

News Trust of India is an eminent news agency

Leave a Reply

Your email address will not be published.

ăn dặm kiểu NhậtResponsive WordPress Themenhà cấp 4 nông thônthời trang trẻ emgiày cao gótshop giày nữdownload wordpress pluginsmẫu biệt thự đẹpepichouseáo sơ mi nữhouse beautiful