एमपी, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में टल सकता है चुनाव !

दरअसल, कुछ वर्गों की ओर से इन संकेतों के बीच कि लोकसभा का चुनाव अगले वर्ष की शुरुआत में 10-11 विधानसभाओं के साथ कराने को लेकर प्रयास किये जा सकते हैं, भाजपा ने ‘खर्च पर अंकुश’ के लिए एक साथ चुनाव कराने पर जोर दिया। भाजपा सूत्रों ने यद्यपि कहा कि राज्यों का चुनाव विलंबित करने या पहले कराने को लेकर कोई ठोस प्रस्ताव नहीं है और इस विचार पर पार्टी के भीतर औपचारिक रूप से चर्चा नहीं की गई है, क्योंकि ऐसे कदमों की संवैधानिक वैधता को ध्यान में रखना होगा

ठोस प्रस्ताव तैयार नहीं
ऐसे में जब मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ विधानसभाओं का कार्यकाल अगले वर्ष जनवरी में समाप्त हो रहा है, पार्टी के नेता ने संकेत दिया कि भाजपा शासित इन राज्यों के लिए कुछ समय के लिए राज्यपाल शासन की संभावना तलाशी जा सकती है, ताकि वहां विधानसभा चुनाव अगले वर्ष के शुरू में लोकसभा चुनाव के साथ हों। उन्होंने यद्यपि स्पष्ट किया कि अभी कोई ठोस प्रस्ताव तैयार नहीं किया गया है। कांग्रेस शासित मिजोरम विधानसभा का कार्यकाल भी इस वर्ष दिसम्बर में समाप्त हो रहा है।

विधिक वैधता पर सवाल
पूर्व लोकसभा महासचिव एवं संवैधानिक विशेषज्ञ पीडीटी अचार्य ने यद्यपि उन राज्यों में राज्यपाल शासन लगाने की विधिक वैधता पर सवाल उठाया जहां विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव से पहले होने हैं।

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