कांग्रेस की इस चाल से चित हुई कर्नाटक में भाजपा

गोवा की विधानसभा में सबसे ज्यादा विधायक होने के बावजूद कांग्रेस विपक्ष में है. 11 मार्च 2017 को पांच राज्यों के चुनाव नतीजे घोषित हुए. यूपी और उत्तराखंड में बीजेपी को पूर्ण बहुमत हासिल हुआ, जबकि मणिपुर और गोवा में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. पंजाब में कांग्रेस ने सरकार बनाई, लेकिन गोवा और मणिपुर में सबसे ज्यादा सीटें पाकर भी वह सत्ता हासिल नहीं कर सकी और बीजेपी ने बाजी मार ली.

कांग्रेस ने बीजेपी पर लोकतंत्र की हत्या करने के आरोप लगाए तो वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक विश्लेषकों ने कांग्रेस नेताओं की सुस्ती को बीजेपी की जीत की अहम वजह बताया. कहा गया कि कांग्रेस नेता गोवा जाकर घूमने में लगे रहे और बीजेपी ने निर्दलीयों और क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर बहुमत का आंकड़ा जुटा लिया. कुल मिलाकर कांग्रेस की काफी किरकिरी हुई और अमित शाह की रणनीति की जमकर चर्चा की गई.

ऐसी ही कुछ स्थिति अब कर्नाटक में उभरी है. 15 मई को जब नतीजे आए तो बीजेपी 104 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन वह बहुमत का आंकड़ा नहीं छू सकी. जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस और जेडीएस ने गठजोड़ कर लिया और निर्दलीय विधायक को भी अपने साथ ले लिया. आज हालात ये हैं कि सीएम पद की शपथ ले चुके बीएस येदियुरप्पा अपनी सरकार का बहुमत तक साबित कर पाने में विफल रहे और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा. वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस इस पूरी रस्साकशी में काफी आगे नजर आई और एक के बाद एक हर मोर्चे पर वह बीजेपी को पछाड़ती चली गई.

पहला कदम: 15 मई को जब चुनाव नतीजे घोषित हो रहे थे, तब शुरुआती रुझानों में बीजेपी बहुमत का आंकड़ा पार करती दिखाई दे रही थी. लेकिन दोपहर ढलते-ढलते उसकी सुईं 104 तक अटक गई. जबकि दूसरी तरफ कांग्रेस 78 और जेडीएस 38 सीटों तक पहुंच गई. कांग्रेस ने तुरंत इस आंकड़े को जोड़कर जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाने का फैसला कर लिया. कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने खुद कर्नाटक में मौजूद अपने नेताओं को जेडीएस संस्थापक एचडी देवगौड़ा से बात करने के निर्देश दिए. कांग्रेस ने जेडीएस के एचडी कुमारस्वामी को सीएम पद ऑफर कर दिया और शाम होने से पहले ही दोनों दलों में गठजोड़ हो गया.

दूसरा कदम: कांग्रेस ने जेडीएस से बात करने के लिए बसपा सुप्रीमो मायावती को भी लगाया. मायावती ने कर्नाटक में जेडीएस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था और उनकी पार्टी के एक विधायक ने जीत भी दर्ज की है. कांग्रेस ने जेडीएस को साथ लाने के लिए इस हथियार का भी इस्तेमाल किया.

तीसरा कदम: 15 मई को जब जेडीएस से बात बन गई तो कांग्रेस ने राज्यपाल से मिलने का वक्त मांगा और जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर दिया. शाम 5 बजे बीजेपी नेता येदियुरप्पा ने सरकार का दावा पेश किया और उनके पीछे-पीछे 5.30 बजे जेडीएस और कांग्रेस नेता राजभवन पहुंच गए और अपनी चिट्ठी राज्यपाल को सौंप दी.

चौथा कदम: इस पूरे घटनाक्रम के बीच ही ये खबरें आने लगीं कि कांग्रेस और जेडीएस के कुछ विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं. बीजेपी के इस वार का पलटवार करते हुए जेडीएस और कांग्रेस ने बीजेपी पर अपने विधायकों की खरीद के लिए 100 करोड़ के प्रलोभन का आरोप लगा डाला. बाद में कांग्रेस ने बीजेपी नेताओं पर विधायकों को खरीदने की कोशिश के सबूत होने के भी दावे किए. फ्लोर टेस्ट से पहले कांग्रेस ने बीएस येदियुरप्पा, श्रीरामुलू और दूसरे बीजेपी नेताओं के ऑडियो क्लिप भी जारी किए.

पांचवां कदम: कांग्रेस और जेडीएस ने अपने विधायकों को भी अलग नहीं होने दिया. 16 मई को दोनों पार्टियों के विधायकों की राजभवन तक परेड तक करा दी गई और राज्यपाल को 117 विधायकों के हस्ताक्षर वाला पत्र तक सौंप दिया.

 छठा कदम: कांग्रेस ने अपने विधायकों को इकट्ठा कर बेंगलुरु के ईगलटन रिजॉर्ट में जमा कर लिया. इसके बाद खतरा मंडराता देख विधायकों को बेंगलुरु से हैदराबाद भेजा गया.

सांतवां कदम: 16 मई को रात 8.30 बजे राज्‍यपाल वजुभाई वाला ने बीजेपी को सरकार बनाने का न्‍योता भेज दिया. जिसके बाद येदियुरप्‍पा ने 17 मई की सुबह 9 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने की घोषणा कर दी.  येदियुरप्‍पा को 15 दिन में बहुमत साबित करने का मौका मिला. कांग्रेस ने राज्यपाल के इस फैसले पर सवाल उठाए और रात में ही सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा दिया.

कांग्रेस और जेडीएस की अर्जी पर रात पौने दो बजे सुप्रीम कोर्ट में 3 जजों की बेंच ने सुनवाई शुरू की और सुबह 5.27 बजे सुप्रीम कोर्ट में बहस पूरी हो गई. येदियुरप्पा की शपथ को सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिल गई. लेकिन कोर्ट ने फिर से मामले की सुनवाई करने का आदेश दिया और दिन की सुनवाई में कोर्ट ने येदियुरप्पा को 24 घंटे के अंदर बहुमत साबित करने का आदेश दिया. सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से पेश वकील ने यहां तक कहा कि बहुमत साबित करने के लिए सोमवार तक का वक्त दिया जाए, क्योंकि विधायक बाहर हैं. इस पर कांग्रेस के वकील ने कहा कि उनके विधायक 24 घंटे के अंदर लौट आएंगे.

आठवां कदम: बीएस येदियुरप्पा ने 17 मई की सुबह सीएम पद की शपथ ले ली. इसके बाद कांग्रेस और जेडीएस ने इसका जबरदस्त विरोध किया. यहां तक कि दोनों पार्टियों के वरिष्ठ नेता विधानसभा के बाहर धरने पर बैठ गए. कांग्रेस नेता पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा तक को लेकर चिलचिलाती धूप में धरने पर बैठ गए. यहां तक कि देशभर में लोकतंत्र बचाओ के आह्वान के साथ देशभर में धरने-प्रदर्शन भी कराए.

नौंवा कदम: 18 मई को राज्यपाल ने नवगठित विधानसभा के संचालन हेतु अस्थायी (प्रोटेम) स्पीकर के लिए बीजेपी के विधायक केजी बोपैया को चुना. इस पर विरोध शुरू हो गया. कांग्रेस रात में ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई और के.जी बोपैया को प्रोटेम स्पीकर के पद से हटाने की मांग की. हालांकि, शनिवार सुबह जब सुनवाई हुई तो कोर्ट ने कांग्रेस की मांग नकार दी, लेकिन इस बात पर बहस शांत हुई कि बहुमत परीक्षण का लाइव प्रसारण होगा. कांग्रेस ने इसे भी अपनी जीत के रूप में लिया.

दसवां कदम: आज फ्लोर टेस्ट से पहले विधानसभा में सभी विधायकों ने शपथ ग्रहण की. इस दौरान लंच के वक्त सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई. लंच के दौरान भी कांग्रेस ने अपने विधायकों को किसी बीजेपी नेता के संपर्क में नहीं आने दिया और पैकेट भेजकर विधायकों को लंच कराया गया. बाद में बीजेपी सूत्रों से ये जानकारी भी मिली कि बीजेपी का प्लान लंच के दौरान ही कांग्रेस और जेडीएस विधायकों से संपर्क बनाने और उन्हें समर्थन के लिए मनाने का था, लेकिन ऐसा भी नहीं हो पाया और उन्होंने सदन के अंदर इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया.

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