सुप्रीम कोर्ट पंहुचा बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समित का विवाद

श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) को भंग करने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। बीकेटीसी को भंग करने के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने याचिका स्वीकार कर ली।

राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए चार हफ्ते में जवाब मांगा है। यह मामला जस्टिस जोजेफ कुरियन और जस्टिस संजय किशन कौल की बेंच में है। बीकेटीसी सदस्य दिवाकर चमोली, दिनकर बाबुलकर आदि ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

पिछले महीने 11 जुलाई को हाईकोर्ट की डबल बेंच ने बीकेटीसी को भंग करने के सरकार के फैसले के खिलाफ पूर्व में सिंगल बेंच द्वारा दिए गए फैसले को निरस्त कर दिया था। सिंगल बेंच ने सरकार के फैसले को गलत मानते हुए बीकेटीसी के पदाधिकारियों को राहत दे दी थी।डबल बेंच ने सरकार के फैसले को सही करार देते हुए बीकेटीसी को भंग करना उचित माना था।

बीकेटीसी की ओर से दिवाकर चमोली, दिनकर बाबुलकर आदि ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की।बीकेटीसी के निर्वतमान अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने समिति की अपील को स्वीकार कर लिया है। इस मामले में सरकार को जवाब देने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया गया है।

बीकेटीसी के निवर्तमान अध्यक्ष गोदियाल ने कहा कि बीकेटीसी को न्याय दिलाने के लिए हर हद तक संघर्ष किया जाएगा। ऐसी नजीर स्थापित करने की कोशिश की जाएगी कि भविष्य में कोई भी सरकार संवैधानिक और चुनी हुई संस्थाओं में हस्तक्षेप करने की हिम्मत न कर सकें। दरअसल, इस प्रकार के नीतिविरूद्ध काम भाजपा की सरकार के दौरान ही होते हैं। कांग्रेस ने संवैधानिक संस्थाओं का सदैव सम्मान किया है।

महाराज और गोदियाल की लड़ाई में पिसी बीकेटीसी: बीकेटीसी के विवाद को धर्मस्व मंत्री सतपाल महाराज और बीकेटीसी अध्यक्ष पूर्व विधायक गणेश गोदियाल की राजनीतिक लडाई के रूप में देखा जा रहा है। एक समय महाराज के राजनीतिक शिष्य रहे गोदियाल ने पूर्ववर्ती सरकार में महाराज का साथ छोड़कर अपनी राह अलग कर ली थी।

गोदियाल की पूर्व सीएम हरीश रावत से निकटता की वजह से भी वो महाराज को कभी पसंद नहीं आए। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद से दोनो के बीच शहमात का खेल चल रहा है। पिछले साल एक अप्रैल 2018 को सरकार ने पहली बार बीकेटीसी को भंग किया था। इसके बाद बीकेटीसी की वतर्मान कार्यकारिणी को को बार सरकार के खिलाफ हाईकोर्ट से राहत मिल गई थी। 11 जुलाई को डबल बेच में जरूर वो हार गए।

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