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बाबा साहब पर मेहरबान योगी सरकार

(मोहन भुलानी)

दलित महापुरुष बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के जन्म दिन पर 14 अप्रैल को उत्तर प्रदेश में सरकार अवकाश तो पहले रहता था. योगी सरकार ने इसमें नया बदलाव किया है. जिसमें कहा गया है कि 14 अप्रैल को पहले की तरह छुट्टी रहेगी पर 13 अप्रैल को प्रदेश में सभी स्कूलों में बाबा साहब के आचार, विचार और व्यक्तित्व को लेकर अलग अलग आयोजन होंगे. इसके जरीये अंबेडकर जंयती मनाने का काम किया जाये. अपर शिक्षा निदेशक नीना श्रीवास्तव के पत्र के द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि स्कूलों में प्रार्थना के बाद लंच से पहले 1 घंटे का कार्यक्रम किया जाये. इसमें बाबा साहब की मूर्ति या फोटो के समक्ष उनके जीवन के कार्यों, विचारधारा, प्रेरक प्रसंगों आदि पर चर्चा की जाये.

इस मौके पर केवल स्कूल के छात्र ही नहीं शिक्षक, ग्राम प्रधान, एमएमसी सदस्य, बच्चों के माता पिता को भी बुलाया जाये. इसमें हिस्सा लेने वालों की पूरी जानकारी नाम और नम्बर के सहित संकलित कर शिक्षा विभाग के छोटे बड़े अफसरों तक पहुचाई जाये. यही नहीं इस कार्यक्रम में जो छात्र या बाकी सदस्य 13 अप्रैल को शामिल नहीं हुये उनको 14 अप्रैल के अवकाश के बाद 15 अप्रैल को 45 मिनट के लिये एकत्र कर बाबा साहब की जानकारी दी जाये. इसका भी पूरा रिकार्ड पूरी तरह से तैयार करके विभाग को भेजा जाये.

असल में भाजपा को अंबेडकर और दलित विरोधी ऊंची जातियों की पार्टी माना जाता रहा है. ऐसे में सरकार अपनी इस छवि को साफ करना चाहती है. ऐसे में एक दिन की जगह पर लगातार 3 दिन तक वह अंबेडकर साहब की चर्चा करना चाहती है. बाबा साहब अंबेडकर के नाम पर दल एक वोट बैंक तैयार करने की फिराक में रहते हैं. बहुजन समाज पार्टी ने बाबा साहब के नाम पर मूर्ति और पार्क बनवाये. समाजवादी और कांग्रेसी सरकारें भी इस परिपाटी पर चलती रही हैं. अब भाजपा भी दलित वोट बैंक पर कब्जा मजबूत करने के लिये बाबा साहब का सहारा ले रही है.

2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को दलितों का समर्थन बडी संख्या में मिला. उसका कारण धार्मिक ध्रुवीकरण था. अब भाजपा इसको बनाये रखने के प्रयास में बाबा साहब को आगे करना चाहती है. भाजपा इस क्रम में बाबा साहब के उन विचारों को आगे चर्चा में बढ़ाना चाहती है जो उसके लिये सहयोगी हों. भाजपा बाबा साहब के उन विचारों को सामने नहीं लाना चाहती जो उन्होंने हिन्दू धर्म की आलोचना में कहे थे. असल में बाबा साहब ने हिन्दू धर्म की संकीर्णता के विरोध में ही बौद्व धर्म को अपनाया था.

भाजपा की विचारधारा के समर्थक कभी भी बाबा साहब के विचारों के समर्थक नहीं रहे. यह जरूर रहा कि बाबा साहब के विचारों को अपने हिसाब से लेकर उसको अपने पक्ष में करने का काम किया गया. अब योगी सरकार बाबा साहब के जन्म दिन को 3 दिन तक मनाकर नई शुरुआत करने जा रही है. भाजपा के प्रबल समर्थक किस तरह से इस बदलाव को स्वीकार करेंगे और बाबा साहब के समर्थकों के साथ कैसे सामंजस्य बैठा पायेंगे, यह देखने वाली बात होगी.

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