ATS की पूछताछ में PAK से आई 300 करोड़ की ड्रग्स का खुलासा

पाकिस्तान से आने वाली ड्रग्स की तस्करी मामले में पकड़े गए अब्दुल अजीज ने एटीएस की पूछताछ में करीब चार महीने पहले 300 करोड़ की ड्रग्स देश में पहुंचने का खुलासा किया है. आरोपी के मुताबि‍क, इस पूरे कन्साईमेन्ट में वह सिर्फ एक कैरियर के तौर पर काम कर रहा था. अब्दुल को इस कन्साइमेन्ट को सुरक्षित ट्रक तक पहुंचाने के लिए 50 लाख रुपये दिए गए थे.

पाकिस्तान से आई ड्रग्स की खेप को भारत के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाने का काम करने वाला आरोपी पेशे से मछुआरा है. एटीएस का कहना है कि अब्दुल ड्रग्स का बैग मछलियों के साथ द्वारिका के सलाया तक लेकर आया. इसके बाद उसने सभी बैग को एक ट्रक के जरिए उत्तर गुजरात भेजा दिया. जहां मसालों के साथ ड्रग्स के बैग को दिल्ली और पंजाब की तरफ भेजा दिया था.

दिलचस्प बात है कि ड्रग्स के काले कारोबार में अब्दुल की बेइमानी उसकी गिरफ्तारी का कारण साबित हुई. आरोपी ने बताया कि जब वह ड्रग्स की डिलीवरी लेने गया था, तब उसे बताया गया कि जीपीएस से इंटरनेशनल मरीन बॉर्डर के पास एक पाकिस्तानी बोट सामने से 3 बार बैट्री की लाइट जलाकर इशारा करेगी, जि‍सके बाद तुम्हें जवाब में दो बार बैट्री की लाइट से इशारा करना है. इसके बाद वह बोट उसके पास आ जाएगी.

अब्दुल ने वही किया, पाकिस्तान से जब बोट उसके पास आई तो बोट के अंदर मौजूद लोगों ने उससे कहा कि ड्रग्स के 100 बैग लेने है. हालांकि, अब्दुल ने लालच में 100 की बजाय 105 बैग अपनी बोट में रख लिए. यहां बता दें कि पांच ड्रग्स के बैग यानी 5 किलो शुद्ध हेरोइन की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कीमत 15 करोड़ है. अब्दुल अजीज इसके चार महीने बाद अपने पास रखी 15 करोड़ की ड्रग्स बेचने निकला और पकड़ा गया.

एटीएस के मुताबिक, अब्दुल का मामा भी 2014 में ऑस्ट्रेलियन नेवी की कार्रवाई में एक बोट में 353 मिलियन पाउंड कीमत की ड्रग्स के साथ पकड़ा गया था. वह पाकिस्तान से ड्रग्स दुनिया के अलग अलग हिस्सों में सप्लाई करता था।

एटीएस सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान के बहावलपुर से आंतकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद शुद्ध हेरोइन बनाने का काम करता है. जि‍से बहावलपुर से कराची के समुद्री रास्ते होते हुए भारत और दूसरे देशों में बेचा जाता है. एटीएस के मुताबिक ड्रग्स के जरिये हुई इस कमाई का इस्तेमाल आतंकवादी वारदातों को अंजाम देने में किया जाता है.

ज्यादातर देशों में ड्रग्स को फिशिंग बोट के जरिये ही पहुंचाया जाता है. जि‍ससे लोकल ऑथिरिटी को इसकी भनक तक नहीं लगती पाती.

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