Templates by BIGtheme NET

हिमाचल और गुजरात में किस करवट बैठेगा चुनावी ऊंट?

हिमाचल प्रदेश और गुजरात विधानसभा के चुनाव इस मायने में विशेष हैं कि उत्तर एवं पश्चिम भारत के इन दो राज्यों के ये चुनाव नरेन्द्र मोदी के दो बड़े निर्णयों से प्राप्त परिणामों के बाद हो रहे हैं. विमुद्रीकरण के लगभग तीन माह बाद फरवरी में 5 राज्यों में जो चुनाव हुए थे, उनमें उत्तरप्रदेश में जहां बीजेपी ने समाजवादियों का सफाया कर दिया था, वहीं पंजाब में कांग्रेस सत्ता में आई. पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में बीजेपी सत्ता में रही. लेकिन अब मामला वैसा ही नहीं है. खासकर जीएसटी की जटिलता ने जहां व्यापारी वर्ग को बेहद नाराज कर दिया है, वहीं करों की ऊंची दरों ने आम लोगों का मोहभंग किया है. विमुद्रीकरण का जो नकारात्मक प्रभाव अर्थव्यवस्था पर पड़ा है, उसकी अंतिम परिणति अब बेरोजगारी के रूप में सामने आने लगी है. निश्चित रूप से ये तथ्य इन दोनों राज्यों के चुनाव पर अपना असर डालेंगे.

तो यहां प्रश्न यह उठता है कि क्या हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस बनी रहेगी और गुजरात में बीजेपी बेदखल हो जाएगी? फिलहाल इन दोनों प्रश्‍नों के जो उत्तर नजर आ रहे हैं, वह यह कि दोनों में से किसी के होने की संभावना नहीं है. 68 सीटों वाली हिमाचल की विधानसभा में कांग्रेस ने 2012 में 36 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. बीजेपी इससे 10 कम रही थी. कांग्रेस ने अपने 83 वर्षीय जिस नेता को भावी मुख्यमंत्री के रूप में प्रस्तुत किया है, वे इस बीच लगातार भ्रष्टाचार के मामलों में चर्चा में रहे हैं. ऐसा करके पहले से ही भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण केंद्र से बेदखल कांग्रेस के इस निर्णय ने बीजेपी के हाथों एक अच्छा तीखा और घातक हथियार थमा दिया है और नरेन्द्र मोदी इस हथियार का जमकर इस्तेमाल भी कर रहे हैं.

हिमाचल के 43 प्रतिशत मतदाता युवा हैं. इनके लिए मुख्य मुद्दा है-राज्य का विकास, ताकि उन्हें रोजगार मिल सके. उल्लेखनीय है कि आचार संहिता लागू होने के कुछ ही पहले प्रधानमंत्री ने वहां साढ़े तेरह सौ करोड़ रुपयों की परियोजनाओं की आधारशिला रखी थी और 15 हजार करोड़ रुपये की योजनाओं का वायदा भी किया था. प्रधानमंत्री की आर्थिक विकास की विभिन्न योजनाओं में पर्यटन शुरू से ही प्राथमिकता पर रहा है, जिसकी हिमाचल में काफी संभावनाएं हैं. प्रधानमंत्री मतदाताओं को इस बात की याद भी दिला रहे हैं.जाहिर है कि बीजेपी के पास कहने के लिए काफी है और करने के लिए भी. कांग्रेस के पास कहने के लिए कुछ नहीं है, सिवाय वायदों के. कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का प्रभाव शून्य-सा है. ऐसे में ताज्जुब नहीं कि हिमाचल प्रदेश में बीजेपी का कद पहले से दुगुना हो जाये और कांगेस का घटकर आधा रह जाए.

हालांकि गुजरात के चुनावों में अभी काफी वक्त है, लेकिन इतना निश्चित है कि वहां हिमाचल जैसा वहां कोई चमत्कार होने नहीं जा रहा है. नरेन्द्र मोदी के काल में वहां बीजेपी ने 92 (सरकार बनाने के लिए) से 23 सीटें अधिक (कुल 115) पाई थीं. इस बीच वहां स्थितियां क्रमशः खराब ही होती गई हैं. हार्दिक पटेल के आंदोलन तथा आनंदी बेन पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाने के निर्णय ने पटेलों को विमुख कर दिया है. व्यापार प्रधान इस राज्य का व्यापारी न केवल जीएसटी से बेहद परेशान है, बल्कि वह अर्थव्यवस्था की मंदी को भी झेल रहा है. तो फिर इस आक्रोश की अभिव्यक्ति कहां हो? कांग्रेस को वोट देने का अर्थ है, अपना वोट खराब करना. बावजूद इसके कांग्रेस के वोटों का प्रतिशत पिछले 38.9 से 2-3 प्रतिशत बढ़ सकता है लेकिन सरकार बीजेपी की ही बनने की संभावना है. यदि इस समय कांग्रेस में आंतरिक कलह नहीं होता तथा राष्ट्रीय नेतृत्व किसी अन्य के हाथ में होता, तो वह बीजेपी को एक अच्छी टक्कर दे सकती थी. किन्तु कुल मिलाकर वहां स्थिति कमोवेश पहले जैसी ही बनी रहेगी, ऐसा लगता है.

About News Trust of India

News Trust of India is an eminent news agency

Leave a Reply

Your email address will not be published.

ăn dặm kiểu NhậtResponsive WordPress Themenhà cấp 4 nông thônthời trang trẻ emgiày cao gótshop giày nữdownload wordpress pluginsmẫu biệt thự đẹpepichouseáo sơ mi nữhouse beautiful